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मनरेगा में लापरवाही पर उपायुक्त का वेतन रोकने के निर्देश
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हरदोई। मनरेगा के तहत कार्य करने वाले श्रमिकों का भुगतान गलत खाता संख्या दर्ज होने के कारण नहीं हो पा रहा है। खास बात यह है कि सीडीओ की ओर से कई बार इस संबंध में मनरेगा उपायुक्त और खंड विकास अधिकारियों को सख्त हिदायत दिए जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। अब मुख्य विकास अधिकारी ने मनरेगा उपायुक्त से जवाब तलब करने के साथ ही एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश जारी किए हैं।
जनपद में रिजेक्ट ट्रांजेक्शन और डिले पेमेंट को लेकर स्थिति खराब है। पिछले कई वित्तीय वर्षों के रिजेक्ट ट्रांजेक्शन अभी तक दुरुस्त नहीं कराए जा सके हैं, तो भुगतान भी समय से नहीं हो पा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि पिछले कई माह से खुद सीडीओ निधि गुप्ता वत्स मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल और सभी खंड विकास अधिकारियों से स्थिति में सुधार लाने के लिए हर सप्ताह समीक्षा कर रही हैं। बीती 17 नवंबर को भी सीडीओ ने डिले पेमेंट और रिजेक्ट ट्रांजेक्शन की समीक्षा के दौरान स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। अब सीडीओ ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से रिजेक्ट ट्रांजेक्शन की खराब स्थिति पर स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके अलावा मनरेगा में डिले पेमेंट को लेकर नाराजगी जताते हुए जवाब तलब करने के साथ ही एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश भी सीडीओ ने जारी किया है।
इन ब्लॉकों में डिले पेमेंट की स्थिति बेहद खराब
मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को उनकी मजदूरी अधिकतम 15 दिन के अंदर मिल जानी चाहिए। 15 दिन बाद भी भुगतान न होने पर यह डिले पेमेंट की श्रेणी में आ जाता है। अहिरोरी, बावन, बेंहदर, संडीला, भरखनी, पिहानी, हरियावां, हरपालपुर और कछौना में डिले पेमेंट की स्थिति बेहद खराब है।
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रिजेक्ट पेमेंट में कुछ ऐसा है हाल
मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों के बैंक खातों में मजदूरी भेजी जाती है। कई बार खाता संख्या गलत होने, खाता बंद होने आदि कारणों से पेमेंट रिजेक्ट हो जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 का जनपद में 15 लाख 34 हजार 530 रुपये का रिजेक्ट पेमेंट है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष का एक करोड़ 17 लाख 96 हजार 489 रुपये रिजेक्ट पेमेंट है।
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जनपद में रिजेक्ट ट्रांजेक्शन और डिले पेमेंट को लेकर स्थिति खराब है। पिछले कई वित्तीय वर्षों के रिजेक्ट ट्रांजेक्शन अभी तक दुरुस्त नहीं कराए जा सके हैं, तो भुगतान भी समय से नहीं हो पा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि पिछले कई माह से खुद सीडीओ निधि गुप्ता वत्स मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल और सभी खंड विकास अधिकारियों से स्थिति में सुधार लाने के लिए हर सप्ताह समीक्षा कर रही हैं। बीती 17 नवंबर को भी सीडीओ ने डिले पेमेंट और रिजेक्ट ट्रांजेक्शन की समीक्षा के दौरान स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। अब सीडीओ ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से रिजेक्ट ट्रांजेक्शन की खराब स्थिति पर स्पष्टीकरण तलब किया है। इसके अलावा मनरेगा में डिले पेमेंट को लेकर नाराजगी जताते हुए जवाब तलब करने के साथ ही एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश भी सीडीओ ने जारी किया है।
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इन ब्लॉकों में डिले पेमेंट की स्थिति बेहद खराब
मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को उनकी मजदूरी अधिकतम 15 दिन के अंदर मिल जानी चाहिए। 15 दिन बाद भी भुगतान न होने पर यह डिले पेमेंट की श्रेणी में आ जाता है। अहिरोरी, बावन, बेंहदर, संडीला, भरखनी, पिहानी, हरियावां, हरपालपुर और कछौना में डिले पेमेंट की स्थिति बेहद खराब है।
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रिजेक्ट पेमेंट में कुछ ऐसा है हाल
मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों के बैंक खातों में मजदूरी भेजी जाती है। कई बार खाता संख्या गलत होने, खाता बंद होने आदि कारणों से पेमेंट रिजेक्ट हो जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 का जनपद में 15 लाख 34 हजार 530 रुपये का रिजेक्ट पेमेंट है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष का एक करोड़ 17 लाख 96 हजार 489 रुपये रिजेक्ट पेमेंट है।