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खनन ठेकेदार ने रोका गर्रा नदी का बहाव

Sun, 17 Dec 2017 10:50 PM IST
हरदाेई
हरदाेई Updated Sun, 17 Dec 2017 10:50 PM IST
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mine contractor stops garra river flow
किया जा रहा खनन। - फोटो : अमर उजाला

खनन के परमिट की आड़ में ठेकेदार ने गर्रा नदी की धार ही रोक दी। खनन करने के लिए मिट्टी का पुल सा बना डाला। स्थानीय पुलिस को पूरे मामले की जानकारी है लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।

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सवायजपुर तहसील के ग्राम भटेउली में खनन के लिए छह माह का परमिट जारी किया गया था। गर्रा नदी के किनारे के गाटा संख्या 100 में खनन की अनुमति ठेकेदार को दी गई। इसके बदले में एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि ठेकेदार से राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जमा कराई थी। ये  परमिट 29 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। परमिट की आड़ में ठेकेदार ने इन दिनों गर्रा में पानी का बहाव ही रोक दिया है। मिट्टी के ढेर को पुलनुमा आकार देकर जहां बहाव रोक दिया गया है। वहीं दूसरी ओर जेसीबी से लगातार बालू का खनन किया जा रहा है। परमिट की वैधता की तिथि करीब आने के साथ ही ठेकेदार ने जेसीबी की संख्या बढ़ा दी है और रात दिन ट्रैक्टरों से बालू ढोई जा रही है। इतना ही नहीं ठेकेदार ने बिलग्राम तहसील के राजस्व विभाग के अधिकारियों और पुलिस के साथ सांठ गांठ कर चौधरियापुर और हरिवंशापुर गांव में भी खनन शुरू करा दिया है। 
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विरोध जता चुके हैं स्थानीय लोग
गर्रा नदी के ग्राम भटेउली में बालू खनन का परमिट जारी होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई थी। गांव के संजीव कुमार यादव, रामवीर, वीरेंद्र, बालकराम, केशाराम आदि ने जिला स्तर तक आंदोलन किया था। अक्तूबर में खनन ठेकेदार सुभाष शर्मा को ग्रामीणों ने खदेड़ लिया था। तत्कालीन एसडीएम सवायजपुर श्रद्धा शांणिल्यायन और पुलिस अफसरों के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए थे। 
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एसपी का आदेश हवा में उड़ा 
अभी दो दिन पहले ही पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र ने सभी थानाध्यक्षों और क्षेत्राधिकारियों के साथ बैठक की थी। एसपी ने सभी थानेदारों को दो टूक कहा था कि किसी भी क्षेत्र में अवैध खनन हुआ तो संबंधित थानेदार को ही जिम्मेदार माना जाएगा। महज 48 घंटों में ही एसपी के निर्देश उनके अपने मातहत ही हवा में उड़ा बैठे। अब देखना ये है कि अवैध खनन की मूक सहमति देने वाले थानाध्यक्ष के विरुद्ध एसपी के स्तर से क्या कार्रवाई होती है।

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