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फर्जीवाड़ा कर वीआईपी मोबाइल नंबर बेचने वाला अंतर्राज्यीय गिरोह पकड़ा

Wed, 29 Sep 2021 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 11:39 PM IST
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गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ करते एसपी अजय कुमार। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। कोतवाली पुलिस ने वीआईपी मोबाइल नंबर फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम स्वैप कर महंगे दामों पर बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इसमें इंजीनियर, एयरटेल कंपनी का एक अधिकारी भी शामिल है, जबकि उड़ीसा के कटक और राजस्थान के जयपुर निवासी एक एक-युवक की तलाश की जा रही है।
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अपने कार्यालय कक्ष में एसपी अजय कुमार ने बताया कि भारतीय एयरटेल कंपनी के विभूति खंड गोमतीनगर लखनऊ कार्यालय से एसाइनमेंट मैनेजर सिक्योरिटी सुरेंद्र यादव ने शहर कोतवाली पुलिस को जानकारी दी गई थी कि हरदोई निवासी एक मोबाइल शॉप का मालिक साथियों के साथ फर्जी दस्तावेजों के जरिए वीआईपी नंबरों के सिम स्वैप कर दूसरे लोगों को महंगे दामों पर बेच देता है। एसपी ने सीओ सिटी विकास जायसवाल के नेतृत्व में शहर कोतवाली, सर्विलांस और स्वाट की एक संयुक्त टीम गठित की।
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मामले में लखनऊ के ठाकुरगंज के कबीरनगर निवासी एयरटेल कंपनी के फस्ट टाइम एक्टीवेशन ऑफिसर (एफटीए) अरुणेश कुमार, संडीला के तिलकखेड़ा निवासी राकेश पाल और उसका भाई प्रवेश पाल, बाराबंकी के फतेहपुर थाना क्षेत्र के साढ़ेमऊ निवासी सौरभ वर्मा को गिरफ्तार किय गया है। राकेश कुमार पाल की संडीला में रिटेल मोबाइल शॉप है। सौरभ वर्मा बीटेक है और राकेश के संपर्क में आकर उसकी मदद करता था। इनके दो साथी उड़ीसा के कटक निवासी केशवधीर चंद्रा और राजस्थान के जयपुर निवासी लोकेश फरार हैं और इनकी तलाश पुलिस कर रही है। एसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर देते थे फर्जीवाड़ा को अंजाम
ग्राहकों को सुविधा देने के लिए विभिन्न कंपनियां आधुनिक तकनीकों और ऐप का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इन्हीं के जरिए फर्जीवाड़े को भी अंजाम दिया जाता है। बुधवार को हुए खुलासे से यह बात सबित भी हो गई है। एसपी अजय कुमार के मुताबिक पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी राकेश पाल है। एयरटेल मित्रा एप की मदद से देख लिया जाता था कि कौन कौन से वीआईपी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कम हो रहा है। इन्हीं नंबरों को चिह्नित कर फेस स्वैप एप्लीकेशन और फेक पैनकार्ड ऐप का इस्तेमाल कर फर्जी अभिलेख तैयार कर लिए जाते थे। संबंधित मोबाइल नंबर का पूरा ब्योरा लेने के लिए एफटीए अरुणेश से संपर्क किया जाता था। एफटीए ही स्वैप किए गए नंबरों को स्वीकृति दे देता था। यूपीसी यूनीक पोर्टिंग कोड निकालकर वीआईपी नंबरों महंगे दामों पर बेच दिया जाता था।
परिवार के सदस्यों तक के अभिलेख फर्जीवाड़े में लगे
सीओ सिटी विकास जायसवाल के मुताबिक राकेश पाल ने फर्जीवाड़े के लिए परिवार के सभी सदस्यों के अभिलेखों का भी इस्तेमाल किया। अपने भाई प्रवेश पाल को भी फर्जीवाड़े में शामिल रखा। साठ हजार रुपये तक में एक-एक सिम इन लोगों ने वीआईपी नंबर के बेचे और रकम का बंटवारा आपस में कर लिया।

अभी कई और फंसेंगे फर्जीवाड़े में
पुलिस महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस फर्जीवाड़े में अभी कई और लोग भी फंसेंगे। दरअसल, कहीं भी पते के अभिलेख के रूप में पैनकार्ड का इस्तेमाल आमतौर पर नहीं होता, लेकिन सिम स्वैप के फर्जीवाड़े में शामिल लोगों ने अभिलेख के रूप में पैनकार्ड का इस्तेमाल किया। इसी के लिए पैनकार्ड एप के जरिए फर्जी पैनकार्ड तैयार करा लिया जाता था।
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