चिट्टी लिख कस्तूरबा की छात्राएं कहेंगी मन की बात
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हरदोई। जिले के समस्त कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालयों की दो हजार छात्राएं अपने मन की बात आला अधिकारियों तक सीधे पहुंचा सकेंगी। इसके लिए प्रत्येक बा स्कूल में एक पेटिका लगेगी। जिसमें पत्र के माध्यम से वह सप्ताह में चिट्ठी कभी भी डाल सकेंगी। खास बात यह है कि उनकी बात वार्डन व वहां के शिक्षिकाओं को बगैर पता चले अधिकारियों की मौजूदगी में ही लॉक पेटिका से बाहर निकाली जाएगी।
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय से प्रदेश के समस्त जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रत्येक कस्तूरबा विद्यालयों में 100 छात्राएं पंजीकृत होती हैं। वहां के रहन-सहन, पठन-पाठन व उनको दिए जाने वाले भोजन व रोज मर्रा की वस्तुओं को लेकर छात्राओं के मन में कोई बात हो सकती है, जो कि बालिकाएं खुलकर अधिकारियों से नहीं बता पातीं।
यही नहीं संज्ञान में यह भी लाया गया है कि यदि विद्यालय के पठन-पाठन, रहन-सहन व भोजन आदि को लेकर कोई शिकायतें की गई तो उन्हें वार्डन व शिक्षिकाओं ने दबाव में लेकर उसे दबा दिया। जिससे उनकी बात विद्यालय में ही रह गई। इसी के चलते निर्णय लिया कि प्रत्येक विद्यालय में पेटिका लगाई जाए। जिसकी चाभी वार्डन के पास न होकर आला अधिकारियों को दी जाए और उन्हीं की मौजूदगी में यह पेटिका खोली जाए। जो शिकायत या सुझाव मिले शिक्षा अधिकारी उसको अमल में लाएं और शिकायतों को जल्द से निवारण किया जाए।
यदि बालिकाओं का सुझाव है जिसे विद्यालयों में लागू किया जा सकता है तो उसको भी लागू किया जाए। इस संबंध में बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने डीसी बालिका शैलेश गुप्ता व समस्त वार्डन को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। समस्त विद्यालयों में प्रत्येक दशा में पेटिका लगवाने को कहा। कहा यदि निरीक्षण में पेटिका लगी न पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी का कहना है कि परियोजना का यह मन की बात पेटिका वाला उद्देश्य यदि पूरा हो गया तो विद्यालयों में मौजूदा हालातों की सही स्थिति सामने आएगी। जिस पर जांच कराकर निर्णय लिया जा सकेगा। उनका भी मानना है कि निरीक्षण में आमतौर पर वार्डन व शिक्षिकाओं के दबाव में बालिकाएं सही स्थिति नहीं बता पाती और न ही कोई शिकायत कर पाती हैं। पेटिका में कभी भी पत्र के माध्यम से अपनी शिकायत कर सकेंगी।
विभागीय सूत्रों की मानें तो विद्यालयों में दूध व फलों का वितरण बालिकाओं को कराया जाता है लेकिन कई विद्यालयों में दबी जुबान से फल व दूध न मिलने की शिकायतें आती रहती हैं। जिसके बाद यह पेटिका इन समस्याओं को भी उजागर करेगी। बीएसए ने बताया कि यदि ऐसी कोई समस्या सामने आती है तो जांच कराकर निश्चित कार्रवाई की जाएगी।