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चेहल्लुम आज, सादगी के साथ होंगे कार्यक्रम
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पिहानी। नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन की शहादत के चालीस दिन पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर मजालिस-ए-चेहल्लुम का आयोजन कर इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादतों के पैगाम को आम करने पर जोर दिया जाएगा।
इस्लामिक वर्ष के पहले माह मोहर्रम की दस तारीख को करबला की जंग में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था। फातिमा के लाल की खता ये थी कि उन्होंने जालिम के हाथ पर बैयत नहीं की। जुल्म और जब्र के आगे सर कटाना गवारा किया, लेकिन सर झुकना नहीं। उनकी शहादत की याद में शियाओं में मोहर्रम से लेकर सवा दो माह तक लगातार मातम मजलिस का सिलसिला चलता है।
इसी क्रम में शहादते हुसैन के चालीस दिन मुकम्मल होने पर चेहल्लुम का आयोजन किया जाता है। इस बार चेहल्लुम 28 सितम्बर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इसे लेकर करबला में तमाम तैयारियां मुकम्मल कर ली गईं हैं। कोरोन संक्रमण के दृष्टिगत इस बार भी जुलूस समेत भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम नहीं होंगे। परम्परागत ढंग से ताजिये सुपुर्द-ए-खाक कर शोहदा-ए-करबला को सलाम पेश किया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक दिलेश कुमार सिंह ने बताया कि चेहल्लुम पर कोई जुलूस नहीं होगा। भीड़भाड़ जमा करने पर भी पाबंदी होगी, प्रमुख स्थानों पर फोर्स तैनात रहेगा।
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इस्लामिक वर्ष के पहले माह मोहर्रम की दस तारीख को करबला की जंग में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था। फातिमा के लाल की खता ये थी कि उन्होंने जालिम के हाथ पर बैयत नहीं की। जुल्म और जब्र के आगे सर कटाना गवारा किया, लेकिन सर झुकना नहीं। उनकी शहादत की याद में शियाओं में मोहर्रम से लेकर सवा दो माह तक लगातार मातम मजलिस का सिलसिला चलता है।
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इसी क्रम में शहादते हुसैन के चालीस दिन मुकम्मल होने पर चेहल्लुम का आयोजन किया जाता है। इस बार चेहल्लुम 28 सितम्बर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इसे लेकर करबला में तमाम तैयारियां मुकम्मल कर ली गईं हैं। कोरोन संक्रमण के दृष्टिगत इस बार भी जुलूस समेत भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम नहीं होंगे। परम्परागत ढंग से ताजिये सुपुर्द-ए-खाक कर शोहदा-ए-करबला को सलाम पेश किया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक दिलेश कुमार सिंह ने बताया कि चेहल्लुम पर कोई जुलूस नहीं होगा। भीड़भाड़ जमा करने पर भी पाबंदी होगी, प्रमुख स्थानों पर फोर्स तैनात रहेगा।
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