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समय के साथ बदले सहरी जगाने के तरीके
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Wed, 15 Jun 2016 11:49 PM IST
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मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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पिहानी (हरदोई)। रमजानुल मुबारक में सहरी के समय रोजेदरों को जगाने के तरीके समय के साथ साथ बदलते गए। मोबाइल पर काल कर और लाउडस्पीकर से सहरी जगाने का तरीका पहले नहीं था। बुजुर्ग कहते हैं कि पुराने समय में सहरी के लिए मोहल्लों में टोलियां बनाकर तराने गाते हुए लोगों को जगाया जाता था। ये तरीके धीरे धीरे बदलते गए। आज के युवा मोबाइल एप पर ही सारी जानकारी प्राप्त कर ले रहे हैं।
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सहरी को अल्लाह के रसूल की सुन्नत बताया गया है। अल्लाह के पैगंबर हुजूर मोहम्मद सल. ने फरमाया कि मुसलमानों सहरी खाया करो, क्यूं कि सहरी में बरकत है। रात के आखिरी हिस्से में सूरज निकलने से पहले कुछ खाने पीने को सहरी कहते हैं। सहरी की बरकत हासिल करने को रोजेदार एक दूसरे को सहरी के लिए उठाते हैं। यह तरीका शुरू से चला आ रहा है।
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अस्सी वर्षींय बुजुर्ग हाजी शराफत हुसैन कहते हैं कि आज के समय में सहरी को जगाने का जो अंदाज है यह पहले से काफी जुदा है। उनके जमाने मेें नौजवान लड़कों की टोलियां निकला करती थीं जो मोहल्ले की गलियों में घूमते हुए सहरी के तरानों के जरिए रोजेदारों को उठाया करती थीं। छोटे- छोटे बच्चे मस्जिदों में तराने और नात पढ़ कर लोगों को बेदार किया करते थे। समय जैसे जैसे आगे बढ़ता गया, सहरी जगाने के पुराने अंदाज भी नए होते गए।
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साठ वर्षीय अलीमुल्लाह ने बताया कि उनकी उम्र तकरीबन बारह वर्ष रही होगी जब गली के लड़कों की टोली में वह भी सहरी जगाने निकल जाया करते थे। सब एक आवाज में जब सहरी के तराने गाते थे तो गलियों में भी एक मुकद्दस रुहानी मंजर उतर आता था। यह तरीका इस लिए भी अहम था कि आसपास के घरों की खबरगीरी भी हो जाया करती थी जो इस्लाम का हुक्म है।
सत्तर साल के कल्लू खां ने कहा कि वह सहरी की टोलियों के साथ मस्जिदों में भी तराने गाकर मोहल्ले के लोगोें को जगाते थे। अब मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए सहरी जगाने का रिवाज और रिकार्डिंग के जरिए तराने बजाए जाने का चलन हो गया। अहमद नदीम, अहमद खां और नौशाद का कहना है कि अपने मोबाइल पर रमज़ान एप लोड कर रखी है, जिसमें इस इलाके की लोकेशन फीड करते ही सारी जानकारी मिलने लगती है। इस तरह के एप में पांच समय की नमाज का समय अजान की आवाज के साथ बताया जाता है। सहरी का समय और इफ्तार की जानकारी भी इसी के जरिए मिल जाती है। साथ ही इसमें नात, कुरआन की आयतें भी सुनी जा सकती हैं।