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कंप्यूटर प्रशिक्षण में सीडीओ ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, कार्यवाई के आदेश
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हरदोई। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधीन संचालित ओ-लेवल प्रशिक्षण शिविर का औचक निरीक्षण सीडीओ आकांक्षा राना ने किया। सीडीओ को मौके पर 11 प्रशिक्षुओं की जगह सात ही मिले। अन्य खामियां मिलने पर सीडीओ ने संस्था के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रशिक्षण के लिए दी गई धनराशि वापस लेने के लिए कहा है।
सीडीओ ने सोमवार को सरॉय थोक पूर्वी में स्थित गंगा सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का औचक निरीक्षण किया। यहां पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण दिया जाता है। निरीक्षण के समय सात प्रशिक्षु मौजूद मिले। तीन प्रशिक्षुओं ने बताया कि वह अक्तूबर 2021 से प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि प्रशिक्षण सत्र एक सितंबर से शुरू किया गया था।
सीडीओ के मुताबिक यहां दो बैच में कुल तीस छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाना है। पंजीकृत तीस छात्रों में 23 से मोबाइल पर सीडीओ ने बात की, इनमें दो ने प्रशिक्षण छोड़ देने की बात कही। बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था होने के बाद भी सेंटर पर मैनुअल उपस्थिति दर्ज की जा रही थी जो कि शासनादेश के विपरीत है।
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नवंबर के 15 दिन बीतने के बाद भी दो नवंबर के बाद से किसी की उपस्थिति दर्ज नहीं थी।
यहां जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रणव पाठक ने सीडीओ को बताया कि प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक प्रशिक्षु पर 15 हजार रुपये खर्च करने के हिसाब से संस्था को साढ़े चार लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। इसके सापेक्ष 97 हजार पांच सौ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्र में उपस्थिति में फर्जीवाड़ा हो रहा है। संस्था के विरुद्ध कार्रवाई करने और उपस्थिति के सापेक्ष अग्रिम दी गई धनराशि वापस लेने के निर्देश भी सीडीओ ने दिए हैं।
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सीडीओ ने सोमवार को सरॉय थोक पूर्वी में स्थित गंगा सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का औचक निरीक्षण किया। यहां पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण दिया जाता है। निरीक्षण के समय सात प्रशिक्षु मौजूद मिले। तीन प्रशिक्षुओं ने बताया कि वह अक्तूबर 2021 से प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि प्रशिक्षण सत्र एक सितंबर से शुरू किया गया था।
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सीडीओ के मुताबिक यहां दो बैच में कुल तीस छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाना है। पंजीकृत तीस छात्रों में 23 से मोबाइल पर सीडीओ ने बात की, इनमें दो ने प्रशिक्षण छोड़ देने की बात कही। बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था होने के बाद भी सेंटर पर मैनुअल उपस्थिति दर्ज की जा रही थी जो कि शासनादेश के विपरीत है।
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नवंबर के 15 दिन बीतने के बाद भी दो नवंबर के बाद से किसी की उपस्थिति दर्ज नहीं थी।
यहां जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रणव पाठक ने सीडीओ को बताया कि प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक प्रशिक्षु पर 15 हजार रुपये खर्च करने के हिसाब से संस्था को साढ़े चार लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। इसके सापेक्ष 97 हजार पांच सौ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राना ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्र में उपस्थिति में फर्जीवाड़ा हो रहा है। संस्था के विरुद्ध कार्रवाई करने और उपस्थिति के सापेक्ष अग्रिम दी गई धनराशि वापस लेने के निर्देश भी सीडीओ ने दिए हैं।