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‘पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रहीं नीतियां’
ब्यूरो/अमर उजाला हरदोई
Updated Thu, 08 Jan 2015 11:53 PM IST
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एसोसिएशन आफ नान इक्जिक्यूटिव एंड इक्जिक्यूटिव के राष्ट्रीय आह्वान पर
बीएसएनएल कर्मियों ने कई मांगों को लेकर बीएसएनएल बचाओ देश बचाओ मुहिम के
साथ मंगलवार को शुरू किया गया धरना गुरुवार को संपन्न हो गया। प्रदर्शन के
अंतिम दिन वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां सिर्फ और सिर्फ
पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं।
सिविल लाइंस स्थित टेलीफोन एक्सचेंज में कर्मचारी नेता कामरेड वाईपी गुप्ता के नेतृत्व में कर्मियों एवं अफसरों ने बीएसएनएल को बचाने को अंतिम सांस तक संघर्ष करने का संकल्प लिया। जेएसी के अध्यक्ष मो. आलम ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं, इसलिए भारत में पूंजीपतियों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है।
देश की सकल पूंजी का 95 प्रतिशत हिस्सा देश के पांच प्रतिशत पूंजीपतियों के पास हैं, जबकि देश की 95 प्रतिशत जनता पांच प्रतिशत पूंजी में गुजारा करने को विवश है। सरकार की गलत नीतियों से ही गरीब और गरीब होता चला जा रहा है। बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार धीरे-धीरे सभी सरकारी उपक्रमों को विदेशी कंपनियों के हाथ बेंच डालना चाहती है।
सुनील त्रिपाठी ने कहा कि एक ओर बीएसएनएल सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में दे रहा, दूसरी ओर सरकार ने बीएसएनएल को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के नाम पर मिलने वाला 10 हजार करोड़ रुपये एडीसी के रूप में पिछले पांच वर्षों से बंद कर दिया है। 7500 करोड़ रुपये नेशनल लोन के नाम पर वसूल लिया तथा सात हजार करोड़ बीडब्ल्यूए उपक्रम का पैसा वापस नहीं किया।
ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे बीएसएनएल घाटे में जा रहा है और घाटे का ठीकरा कर्मियों, अफसरों की सुविधाओं को बंद करके उनके सिर फोड़ा जा रहा है। कहा कि यदि सरकार ने रवैया न बदला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी सिलसिले में 25 फरवरी को संसद मार्च तथा 17 मार्च से बेमियादी हड़ताल पर सभी कर्मी, अफसर जाएंगे। इस मौके पर वाईपी गुप्ता, एसके सिंह, पवन अस्थाना, मदन पाल, रामसुंदर शुक्ला, प्रेमकुमार गुप्ता, आलम आदि थे।
सिविल लाइंस स्थित टेलीफोन एक्सचेंज में कर्मचारी नेता कामरेड वाईपी गुप्ता के नेतृत्व में कर्मियों एवं अफसरों ने बीएसएनएल को बचाने को अंतिम सांस तक संघर्ष करने का संकल्प लिया। जेएसी के अध्यक्ष मो. आलम ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं, इसलिए भारत में पूंजीपतियों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है।
देश की सकल पूंजी का 95 प्रतिशत हिस्सा देश के पांच प्रतिशत पूंजीपतियों के पास हैं, जबकि देश की 95 प्रतिशत जनता पांच प्रतिशत पूंजी में गुजारा करने को विवश है। सरकार की गलत नीतियों से ही गरीब और गरीब होता चला जा रहा है। बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार धीरे-धीरे सभी सरकारी उपक्रमों को विदेशी कंपनियों के हाथ बेंच डालना चाहती है।
सुनील त्रिपाठी ने कहा कि एक ओर बीएसएनएल सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में दे रहा, दूसरी ओर सरकार ने बीएसएनएल को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के नाम पर मिलने वाला 10 हजार करोड़ रुपये एडीसी के रूप में पिछले पांच वर्षों से बंद कर दिया है। 7500 करोड़ रुपये नेशनल लोन के नाम पर वसूल लिया तथा सात हजार करोड़ बीडब्ल्यूए उपक्रम का पैसा वापस नहीं किया।
ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनसे बीएसएनएल घाटे में जा रहा है और घाटे का ठीकरा कर्मियों, अफसरों की सुविधाओं को बंद करके उनके सिर फोड़ा जा रहा है। कहा कि यदि सरकार ने रवैया न बदला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी सिलसिले में 25 फरवरी को संसद मार्च तथा 17 मार्च से बेमियादी हड़ताल पर सभी कर्मी, अफसर जाएंगे। इस मौके पर वाईपी गुप्ता, एसके सिंह, पवन अस्थाना, मदन पाल, रामसुंदर शुक्ला, प्रेमकुमार गुप्ता, आलम आदि थे।