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मोमबत्ती की रोशनी में लगता है इंजेक्शन

Mon, 20 Apr 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Mon, 20 Apr 2015 11:56 PM IST
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Candlelight think injection

गर्मी बढ़ते ही जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं भी चरमरा गई हैं। अस्पताल में न तो पीने के पानी का इंतजाम है और न ही जनरेटर चलता है।

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ऐसे में अंधाधुंध हो रही बिजली कटौती मरीजों का दर्द बढ़ा रही है। रात में वार्डों में भर्ती मरीज मोमबत्ती के सहारे रहते हैं। मोमबत्ती की रोशनी में ही उन्हें दवाएं लेनी पड़ती है और नर्स इंजेक्शन भी लगाती हैं।

गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली कटौती भी बढ़ने लगी है। रात में बिजली के आने और जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। ऐसे में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की सांसत बढ़ गई है। कहने के लिए अस्पताल में जनरेटर है, लेकिन डीजल बजट के अभाव में वह ठप रहता है।

जनरेटर न चलने की वजह से रात में मोमबत्ती की रोशनी में मरीजों को दवाएं लेनी पड़ती हैं। वार्ड भ्रमण के दौरान चिकित्सक भी अंधेरे में ही मरीजों का हालचाल पूछते हैं।

इतना ही नहीं नर्स को इंजेक्शन भी अंधेरे में ही लगाना पड़ता है। वहीं दिन में जनरेटर न चलने की वजह से बिजली न होने पर मरीजों को वापस लौट जाना पड़ता है।

जिला अस्पताल कई कई वार्डों से तो पंखे ही गायब हैं। पंखे के केवल हुक लगे हैं। पंखे न लगे होने के कारण बिजली आने के बाद भी मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल पाता है। इससे मरीजों का हाल बेहाल है।
 
जिला अस्पताल की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है। अस्पताल में तैनात सफाई कर्मी अपना कार्य छोड़ मरीजों की सर्जरी और मेडिकल लीगल कराने में व्यस्त रहते हैं। वार्डों में मच्छरों का प्रकोप है। बिजली जाते ही मच्छर हमला बोल देते हैं। इस कारण मरीज कई संक्रामक रोगों के शिकार हो रहे हैं।

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