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Hardoi News: गैंगस्टर एक्ट के दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। गैंगस्टर एक्ट के दो आरोपियों की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट फर्रुख इनाम सिद्दीकी ने खारिज कर दी है।अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और इस स्तर पर राहत देने से निष्पक्ष विवेचना प्रभावित हो सकती है।
कोतवाली शहर के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार राय ने चार जुलाई 2026 को गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि शहर कोतवाली क्षेत्र के आशा नगर निवासी आरोही सिंह उर्फ शिवानी देहात कोतवाली क्षेत्र के महोलिया शिवपार निवासी संध्या सिंह आर्थिक भौतिक लाभ के लिए मकान के ताले तोड़कर चोरी की घटनाएं कारित करती है। पुलिस का दावा है कि गिरोह की गतिविधियों से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था।
विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि गिरोह के सदस्यों के खिलाफ पहले से अलग-अलग थानों में संगठित अपराध के कई मुकदमे दर्ज हैं। कई मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल हो चुके हैं। इन्हीं आपराधिक गतिविधियों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का दाखिल की। उनके अधिवक्ता ने कहा कि उसको झूठा फंसाया गया है। एफआईआर विलंब से दर्ज हुई है। किसी प्रत्यक्षदर्शी का उल्लेख नहीं है और गैंग का सदस्य होने का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। आरोपी व्यापारी है।
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दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने केस डायरी और उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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कोतवाली शहर के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार राय ने चार जुलाई 2026 को गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि शहर कोतवाली क्षेत्र के आशा नगर निवासी आरोही सिंह उर्फ शिवानी देहात कोतवाली क्षेत्र के महोलिया शिवपार निवासी संध्या सिंह आर्थिक भौतिक लाभ के लिए मकान के ताले तोड़कर चोरी की घटनाएं कारित करती है। पुलिस का दावा है कि गिरोह की गतिविधियों से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था।
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विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि गिरोह के सदस्यों के खिलाफ पहले से अलग-अलग थानों में संगठित अपराध के कई मुकदमे दर्ज हैं। कई मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल हो चुके हैं। इन्हीं आपराधिक गतिविधियों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का दाखिल की। उनके अधिवक्ता ने कहा कि उसको झूठा फंसाया गया है। एफआईआर विलंब से दर्ज हुई है। किसी प्रत्यक्षदर्शी का उल्लेख नहीं है और गैंग का सदस्य होने का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। आरोपी व्यापारी है।
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दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने केस डायरी और उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।