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झूम के बरसे बदरा, फसलों को आक्सीजन
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:44 PM IST
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पिछले लंबे समय से झमाझम बारिश की उम्मीद लगाए लोगों
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को रविवार को अचानक आए बादलों ने निराश नहीं किया। करीब डेढ़ घंटे तक बरसे
बादल गरज गरज कर बरसते रहे। करीब 30 मिमी पानी बरस गया। इससे शहर में जहां
कुछ देर के लिए सड़काें से लेकर गलियों में जल भराव हुआ और यातायात ठहरा
रहा वहीं प्यासे खेतों की किसी हद तक पानी की आस पूरी हुई और झुलस रही
फसलों को आक्सीजन मिल गया।
रविवार को अचानक करीब दो बजे बादल गरजने के साथ ही बरसने लगे। इससे पहले तेज धूप के बीच लोग उमस और पसीना निकालू गर्मी से परेशान थे कि अचानक हुई बारिश से वातावरण में ठंडक आने के साथ ही बारिश तेज हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक बारिश हुई।
कुछ देर काफी तेज गति से बारिश होने से शहर के घंटाघर रोड, सुभाषनगर, एमजी रोड समेत कई मार्गों एवं गलियों में जलभराव हो गया, जिससे यातायात भी ठहरा रहा, पर कुछ देर बाद ही जैसे बारिश की गति धीमी पड़ी तो गलियों एवं सड़कों पर जमा पानी निकल गया। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से किसानों ने काफी हद तक राहत की सांस ली।
हालांकि, सितंबर माह में अपेक्षित सामान्य बारिश 130 मिमी के सापेक्ष अभी तक करीब 40 फीसदी बारिश हुई, पर इसके बाद भी इस बारिश को लेकर कुछ राहत महसूस की जा रही। पिछले लंबे समय से धान, मक्का, गन्ना आदि की सिंचाई के लिए किसानों को परेशान होकर निजी संसाधनों से फ सलों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
रविवार की बारिश ने किसी हद तक फसलों एवं किसानों को राहत दी है। यह अलग बात है कि बारिश लेट एवं अपेक्षा से कम होने के चलते अभी भी फसलों के लिए बारिश की दरकार बनी हुई है। सामान्य औसत बारिश से कम बारिश होने के चलते कृषि क्षेत्र में निराशा स्वाभाविक है।
रविवार को अचानक करीब दो बजे बादल गरजने के साथ ही बरसने लगे। इससे पहले तेज धूप के बीच लोग उमस और पसीना निकालू गर्मी से परेशान थे कि अचानक हुई बारिश से वातावरण में ठंडक आने के साथ ही बारिश तेज हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक बारिश हुई।
कुछ देर काफी तेज गति से बारिश होने से शहर के घंटाघर रोड, सुभाषनगर, एमजी रोड समेत कई मार्गों एवं गलियों में जलभराव हो गया, जिससे यातायात भी ठहरा रहा, पर कुछ देर बाद ही जैसे बारिश की गति धीमी पड़ी तो गलियों एवं सड़कों पर जमा पानी निकल गया। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से किसानों ने काफी हद तक राहत की सांस ली।
हालांकि, सितंबर माह में अपेक्षित सामान्य बारिश 130 मिमी के सापेक्ष अभी तक करीब 40 फीसदी बारिश हुई, पर इसके बाद भी इस बारिश को लेकर कुछ राहत महसूस की जा रही। पिछले लंबे समय से धान, मक्का, गन्ना आदि की सिंचाई के लिए किसानों को परेशान होकर निजी संसाधनों से फ सलों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
रविवार की बारिश ने किसी हद तक फसलों एवं किसानों को राहत दी है। यह अलग बात है कि बारिश लेट एवं अपेक्षा से कम होने के चलते अभी भी फसलों के लिए बारिश की दरकार बनी हुई है। सामान्य औसत बारिश से कम बारिश होने के चलते कृषि क्षेत्र में निराशा स्वाभाविक है।