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रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:52 PM IST
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पिहानी। रमजान का पहला अशरा मुकम्मल हो गया। अशरा ए रहमत में रोजेदारों ने रहमत और बरकत की दुआएं मांगीं। इस दौरान तीन स्थानों पर नमाजे तरावीह के दौरान कुराने पाक का पाठ भी मुकम्मल हो गया। उलमा ए कराम ने नमाजियों को कुरान की अहमियत बयां कीं।
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तरावीह रमजान में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज है। इसकी बीस रकाअतों में कुरान का पाठ किया जाता है। पूरे माह चलने वाली नमाज में एक कुरान का पाठ सुन्नत है। बीती शाम रमजान का पहला अशरा मुकम्मल हुआ। इसके साथ ही यहां बड़े चौराहे पर सलीम मंसूरी, मरहूम राजा कुरैशी के आवास और टावर वाली अस्थायी मस्जिद में जारी तरावीह में कुरान पाक का पाठ मुकम्मल हो गया।
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इस दौरान नमाजियों में मिष्ठान वितरित किया गया। उलमा ए कराम ने कुरान पढ़ने और समझने के साथ ही इसके अहकाम पर अमलपैरा होने की सीख दी। तकमीले कुरान के अवसर पर रोजेदारों ने अल्लाह से रहमत की बारिश, मुल्क की तरक्की और अमन के लिए दुआ मांगी। पहला अशरा पूरा होने के साथ ही बीती रात से ही रमजान के दूसरे अशरे का आगाज हो गया।
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तीन अशरों में विभाजित इस माह का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा व अंतिम अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। अशरा ए मगफिरत की शुरुआत में साथ ही इबदतगुजारों में रो रोकर अल्लाह से गुनाहों पर माफी मांगने का सिलसिला चल निकला है। इबादतों के दौर में दूसरी तमाम इबादतों के साथ ही मुस्लिम जकात और फितरे की अदायगी का भी एहतेमाम कर रहे हैं।