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मनु सतरूपा ने नारायण को पुत्र रूप में मांगा
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sun, 31 Jan 2016 12:53 AM IST
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ऐतिहासिक नुमाइश मैदान में शनिवार को मनु सतरूपा तप का मंचन किया गया। श्री गोविंद गोपाल लीला संस्थान केकलाकारों ने मनु सतरूपा के तप के कारण नारायण के रूप में श्रीराम के जन्म लेने का जीवंत मंचन किया। जिसको दर्शकों ने काफी सराहा।
मेला श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला में शनिवार को संचालक स्वामी विष्णु कुमार शर्मा दत्तात्रेय ने समझाया कि राजा दशरथ पूर्व जन्म में मनु महाराज थे। सार गर्भित वर्णन के बाद कथा व्यास ने ओजस्वी वाणी से दोहा मय कथा सुनाई। कथा व्यास ने सुनाया कि होई न विषय विराग भवन बसत था चौथापन, हृदय बहुत दुख लाग जन्म भयो हरि भगत बिन।
कलाकारों ने भगवान को पाने केलिए तपस्या पर बैठे मनु और सतरूपा केचरित्र को वास्तविक ढंग से अभिनित किया। दीर्घकाल की तपस्या के बाद मनु और सतरूपा को ब्रहमा, विष्णु और महेश ने दर्शन दिए और मनु और सतरूपा से वरदान मांगने की इच्छा की। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर में स्वयं पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। इस प्रकार श्री विष्णु मनु और सतरूपा बने राजा दशरथ व कौशल्या के घर में जन्म लेते हैं। कलाकारों ने इस कथा को बड़े ही भावपूर्ण मंचन किया। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, प्रेम शंकर द्विवेदी, संत कुमार सिंह, राकेश कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मेला श्रीराम लीला कमेटी के तत्वावधान में नुमाइश मैदान में चल रही रामलीला में शनिवार को संचालक स्वामी विष्णु कुमार शर्मा दत्तात्रेय ने समझाया कि राजा दशरथ पूर्व जन्म में मनु महाराज थे। सार गर्भित वर्णन के बाद कथा व्यास ने ओजस्वी वाणी से दोहा मय कथा सुनाई। कथा व्यास ने सुनाया कि होई न विषय विराग भवन बसत था चौथापन, हृदय बहुत दुख लाग जन्म भयो हरि भगत बिन।
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कलाकारों ने भगवान को पाने केलिए तपस्या पर बैठे मनु और सतरूपा केचरित्र को वास्तविक ढंग से अभिनित किया। दीर्घकाल की तपस्या के बाद मनु और सतरूपा को ब्रहमा, विष्णु और महेश ने दर्शन दिए और मनु और सतरूपा से वरदान मांगने की इच्छा की। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर में स्वयं पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। इस प्रकार श्री विष्णु मनु और सतरूपा बने राजा दशरथ व कौशल्या के घर में जन्म लेते हैं। कलाकारों ने इस कथा को बड़े ही भावपूर्ण मंचन किया। इस मौके पर मुख्य आयोजक राम प्रकाश प्रकाश शुक्ला, लीला संयोजक कृष्ण अवतार दीक्षित बाले, वियोग चंद्र मिश्र, प्रेम शंकर द्विवेदी, संत कुमार सिंह, राकेश कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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