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Hardoi News: 30 साल से न्यायालय में हाजिरी होना भी सजा जैसा, एसीजेएम ने परिवीक्षा पर छोड़ा
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हरदोई। पीटने के आरोप में पिछले 30 साल से न्यायालय में हाजिरी लगा रहे दो आरोपियों को न्यायालय से राहत मिल गई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या दो सचिन वर्मा ने आरोपियों को दोषी तो करार दिया लेकिन सजा के तौर पर महज जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में एक साल तक हाजिरी लगाने के आदेश दिए हैं। इस दौरान अगर दोनों आरोपियों ने कोई गलत काम किया तो सजा भी दिए जाने की चेतावनी दी है।
लोनार कोतवाली क्षेत्र के बघौरामल निवासी राबिया बानो ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि 26 सितंबर 1996 की शाम अपने मकान के बाहर खड़ी थीं। गांव के युनुस अली और सुरेंद्र उर्फ सद्दीक आकर गाली-गलौज करने लगे। मना करने पर लात-घूंसों से पिटाई कर दी थी। शोर सुनकर कुछ लोग आ गए तो आरोपी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ पिटाई के आरोप में मामला दर्ज किया था। दोनों आरोपियों ने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होकर जुर्म स्वीकार कर लिया।
कहा कि हुजूर अब मुकदमा लड़ पाने की स्थिति में नहीं हैं। 30 साल से मुकदमा लड़ रहे है। हर तारीख पर उपस्थित रहे हैं। इस लिहाज से उन्हें सजा मिल चुकी है। उनका कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। परिवीक्षा पर छोड़े जाने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिवीक्षा पर छोड़े जाने का आदेश दिया।
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लोनार कोतवाली क्षेत्र के बघौरामल निवासी राबिया बानो ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि 26 सितंबर 1996 की शाम अपने मकान के बाहर खड़ी थीं। गांव के युनुस अली और सुरेंद्र उर्फ सद्दीक आकर गाली-गलौज करने लगे। मना करने पर लात-घूंसों से पिटाई कर दी थी। शोर सुनकर कुछ लोग आ गए तो आरोपी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ पिटाई के आरोप में मामला दर्ज किया था। दोनों आरोपियों ने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होकर जुर्म स्वीकार कर लिया।
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कहा कि हुजूर अब मुकदमा लड़ पाने की स्थिति में नहीं हैं। 30 साल से मुकदमा लड़ रहे है। हर तारीख पर उपस्थित रहे हैं। इस लिहाज से उन्हें सजा मिल चुकी है। उनका कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। परिवीक्षा पर छोड़े जाने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिवीक्षा पर छोड़े जाने का आदेश दिया।
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