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सैकड़ों को जिंदगी देने वाली एंबुलेंस को ‘सांसों’ की दरकार
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फोटो-34-राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के निकट खड़ी एंबुलेंस। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले हादसों मेें घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस की दशा बेहद खराब है। इस एंबुलेंस पर न तो कोई चालक है और न ही ईंधन की व्यवस्था। करीब आठ माह से यह एंबुलेंस पिहानी कोतवाली क्षेत्र की जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के निकट बदहाल स्थिति में खड़ी है।
लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 24 का लगभग आठ किमी हिस्सा हरदोई जिले की सीमा में भी है। पिहानी कोतवाली क्षेत्र की जहानीखेड़ा पुलिस चौकी में आने वाले इस क्षेत्र में आये दिन हादसे हाते हैं। हादसे में घायल लोगों को को जल्द से जल्द इलाज मिल जाए, इसके लिए कई साल पहले केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी।
जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के निकट ही एंबुलेंस रहती थी। इस एंबुलेंस से बड़ी संख्या में लोगों को राहत भी मिली। करीब आठ माह से इस एंबुलेंस का पहिया एक बार भी नहीं घूमा। कारण एंबुलेंस के लिए न तो चालक है और न ही ईंधन की व्यवस्था। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक ने भी इस ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया। एंबुलेंस धीरे-धीरे कबाड़ होती जा रही है।
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चंदे से होता था ईंधन का इंतजाम
जहानीखेड़ा और आसपास के गांवों के लोग बताते हैं कि एंबुलेंस पर चालक कभी नहीं रहा और न ही इसके लिए ईंधन का इंतजाम हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसा होने पर सामर्थ्यवान लोग और जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी आपसी सहयोग से रुपयों की व्यवस्था कर लेते थे। एंबुलेंस भी पुलिस वाले चलाकर ले जाते थे।
अब 108 एंबुलेंस सेवा का सहारा
सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय से मिली एंबुलेंस के पहिये थम जाने के बाद हाईवे पर होने वाले हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में 108 एंबुलेंस सेवा का ही भरोसा रह गया है। फर्क यह है कि 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्धता के आधार पर मौके पर पहुंचती है, जबकि राजमार्ग मंत्रालय से मिली एंबुलेंस सिर्फ हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए थी।
मंत्रालय से करेेंगे बात : सांसद
सांसद जयप्रकाश ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय में बात करेंगे। प्रयास होगा कि एंबुलेंस सेवा जल्द से जल्द बहाल हो जाए। साथ ही साथ यह भी कोशिश होगी, कि स्थानीय स्तर से वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए तब तक एक एंबुलेंस राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए उपलब्ध करा दी जाए।
राजमार्ग पर उपलब्ध एंबुलेंस के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई हो पाएगी। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए विचार कर आलाधिकारियों से दिशा निर्देश मांगा जाएगा। प्रयास होगा कि जल्द से जल्द एंबुलेंस की व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्ग पर हो जाए।-डॉ. एसएम त्रिपाठी, सीएमओ।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर एंबुलेंस रहना जरूरी है। पूरा प्रकरण अब संज्ञान में आया है। डीएम से भी इस मामले पर बात कर एंबुलेंस की व्यवस्था में सुधार कराने की कोशिश होगी। साथ साथ सीएमओ को एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए लिखा जाएगा।-अनुराग वत्स, पुलिस अधीक्षक।
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लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 24 का लगभग आठ किमी हिस्सा हरदोई जिले की सीमा में भी है। पिहानी कोतवाली क्षेत्र की जहानीखेड़ा पुलिस चौकी में आने वाले इस क्षेत्र में आये दिन हादसे हाते हैं। हादसे में घायल लोगों को को जल्द से जल्द इलाज मिल जाए, इसके लिए कई साल पहले केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी।
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जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के निकट ही एंबुलेंस रहती थी। इस एंबुलेंस से बड़ी संख्या में लोगों को राहत भी मिली। करीब आठ माह से इस एंबुलेंस का पहिया एक बार भी नहीं घूमा। कारण एंबुलेंस के लिए न तो चालक है और न ही ईंधन की व्यवस्था। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक ने भी इस ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया। एंबुलेंस धीरे-धीरे कबाड़ होती जा रही है।
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चंदे से होता था ईंधन का इंतजाम
जहानीखेड़ा और आसपास के गांवों के लोग बताते हैं कि एंबुलेंस पर चालक कभी नहीं रहा और न ही इसके लिए ईंधन का इंतजाम हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसा होने पर सामर्थ्यवान लोग और जहानीखेड़ा पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी आपसी सहयोग से रुपयों की व्यवस्था कर लेते थे। एंबुलेंस भी पुलिस वाले चलाकर ले जाते थे।
अब 108 एंबुलेंस सेवा का सहारा
सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय से मिली एंबुलेंस के पहिये थम जाने के बाद हाईवे पर होने वाले हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में 108 एंबुलेंस सेवा का ही भरोसा रह गया है। फर्क यह है कि 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्धता के आधार पर मौके पर पहुंचती है, जबकि राजमार्ग मंत्रालय से मिली एंबुलेंस सिर्फ हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए थी।
मंत्रालय से करेेंगे बात : सांसद
सांसद जयप्रकाश ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय में बात करेंगे। प्रयास होगा कि एंबुलेंस सेवा जल्द से जल्द बहाल हो जाए। साथ ही साथ यह भी कोशिश होगी, कि स्थानीय स्तर से वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए तब तक एक एंबुलेंस राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए उपलब्ध करा दी जाए।
राजमार्ग पर उपलब्ध एंबुलेंस के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई हो पाएगी। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए विचार कर आलाधिकारियों से दिशा निर्देश मांगा जाएगा। प्रयास होगा कि जल्द से जल्द एंबुलेंस की व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्ग पर हो जाए।-डॉ. एसएम त्रिपाठी, सीएमओ।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर एंबुलेंस रहना जरूरी है। पूरा प्रकरण अब संज्ञान में आया है। डीएम से भी इस मामले पर बात कर एंबुलेंस की व्यवस्था में सुधार कराने की कोशिश होगी। साथ साथ सीएमओ को एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए लिखा जाएगा।-अनुराग वत्स, पुलिस अधीक्षक।