{"_id":"c584114fae298d2f989354e4a70fcf27","slug":"after-pressing-the-protest-is-not-over-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दबाव के बाद भी धरना खत्म नहीं हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दबाव के बाद भी धरना खत्म नहीं हुआ
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहू और कताई मिल चौकी पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की
विज्ञापन
मांग को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में बैठे संडीला के बुजुर्ग दंपति का धरना
प्रदर्शन छठे दिन रविवार को भी जारी रहा। उधर, दंपति ने पुलिस पर अनशन
समाप्त करने के लिए दबाव डाले जाने का आरोप लगाया है।
मिली जानकारी के अनुसार, कचहरी परिसर में आमरण अनशन पर बैठे संडीला के सोम बाजार निवासी शिवकुमार ने आरोप लगाया कि छठे दिन पुलिस ने मौके पर उन्हें यहां से धरना समाप्त करने का दबाव डाला तथा जबरन यहां से उठा कर ले जाने की बात कही।
कलक्ट्रेट में बुजुर्ग दंपति ने बताया कि वह जबरन यहां से भले ही हटा दिए जाए, लेकिन जब तक उनको न्याय नहीं मिल जाता वह स्वेच्छा से यहां से नहीं जाना चाहते और न ही अभी जाएंगे। वह 21 व 22 सितंबर को दो दिन वह भूख हड़ताल करेंगे।
कहा कि यदि फिर भी न्याय न मिला तो 23 सितंबर को आत्मदाह करने को विवश होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। बुजुर्ग दंपति ने कहा कि उन्होंने सुना था कि जब दुख की घड़ी होती है, तो कोई साथ नहीं देता और उन्होंने यह देख लिया इस लोकतंत्र में भी साथ उन्हीं का दिया जाता है, जिनके साथ सभी होते हैं। गरीबों व पीड़ितों की कोई नहीं सुनता।
मिली जानकारी के अनुसार, कचहरी परिसर में आमरण अनशन पर बैठे संडीला के सोम बाजार निवासी शिवकुमार ने आरोप लगाया कि छठे दिन पुलिस ने मौके पर उन्हें यहां से धरना समाप्त करने का दबाव डाला तथा जबरन यहां से उठा कर ले जाने की बात कही।
कलक्ट्रेट में बुजुर्ग दंपति ने बताया कि वह जबरन यहां से भले ही हटा दिए जाए, लेकिन जब तक उनको न्याय नहीं मिल जाता वह स्वेच्छा से यहां से नहीं जाना चाहते और न ही अभी जाएंगे। वह 21 व 22 सितंबर को दो दिन वह भूख हड़ताल करेंगे।
कहा कि यदि फिर भी न्याय न मिला तो 23 सितंबर को आत्मदाह करने को विवश होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। बुजुर्ग दंपति ने कहा कि उन्होंने सुना था कि जब दुख की घड़ी होती है, तो कोई साथ नहीं देता और उन्होंने यह देख लिया इस लोकतंत्र में भी साथ उन्हीं का दिया जाता है, जिनके साथ सभी होते हैं। गरीबों व पीड़ितों की कोई नहीं सुनता।