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पटरियों पर जान, हादसों से अफसर अंजान
Hardoi
Updated Sun, 07 Dec 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। रेलगाड़ी की पहियों के कुचल कर मौतों का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ रहा है। लेवल क्रासिंग पार करने के दौरान मासूम अपनी जान खो रहे और अब तो कोहरे ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। शुक्रवार को उमरताली के पास दो बच्चे कोहरे की भेंट चढ़ गए, जबकि इसके पहले भी कइयों ने अपनी जान ऐसी ही लेबल क्रासिंगों को पार करने के दौरान खो दी। मानव रहित अथवा मानव युक्त लेवल क्रासिंगों पर हादसे बढ़ रहे, पर इसके बावजूद रेलवे अफसर कोई विशेष सावधानी नहीं बरत रहे हैं।
जिले में तो मानव रहित क्रासिंगों को समाप्त करने का दावा किया गया और उन पर गेट मित्र की नियुक्ति हो गई है, पर इसके बाद भी लोग अपनी जान गवां रहे हैं। इतना ही नहीं कोहरा बढ़ने से लेबल क्रासिंगों पर सावधानी को लेकर भी कोई एहतियात नहीं बरती जा रही, जिससे आए दिन हो रही घटनाओं में सामने आ रहे हैं। अफसरों की माने तो रेलवे द्वारा क्रासिंगों पर गेट मित्र रखे जा रहे हैं, पर ज्यादा सुविधाएं दे पाना तो बस में भी नहीं है। उधर, रेलवे के अभिलेखों पर भले ही अब कोई क्रासिंग मानव रहित न रह गई हो, पर हादसों की वजह कागजों की पोल खोल को काफी हैं। जिले में तमाम क्रासिंगें ऐसी हैं जिन पर इतने अधिक हादसे हुए हैं वह अब डेथ प्वाइंट में शुमार हो गए।
हरदोई स्टेशन के पास महोलिया क्रासिंग पर अब न तो फाटक है और न ही कोई गार्ड और इस क्रासिंग पर भी सैकड़ों लोगों ने अपनों की जिंदगी खो दी। पिहानी के पास मनिकापुर क्रासिंग पर दो बार ट्रेन और कई बार वाहन की भिड़ंत हो चुकी है। शाहाबाद के अटवा मुटिया क्रासिंग भी कई हादसों की वजह बन चुकी है। संडीला स्टेशन के पास भी एक ट्रक और ट्रेन में टक्कर हो चुकी। शहर के पास पिहानी लेबल क्रासिंग भी डेथ प्वाइंट है। उधर, सावधानी हटी और दुर्घटना घटी के मंत्र को सभी जानते हैं और समझते भी है लेकिन इन मंत्र पर तो यात्री अमल करते हैं और न ही रेलवे के अधिकारी। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में तमाम जगह यह लिखा पाया जाता है, पर इसका पालन कोई नहीं करा रहा।
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बीते एक वर्ष में जिले में ट्रेन के पहियों के नीचे 105 मासूमों ने जीवन लीला को समाप्त कर लिया। शुक्रवार को भी दो भाइयों की मौत भी लापरवाही का नतीजा है। जीआरपी और जिला स्तर से जुटाए गए आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में जनवरी से दिसंबर के पहले सप्ताह तक 105 ने अपनी जिंदगी गवां दी। इनमें जीआरपी के अंतर्गत संडीला से शाहाबाद के बीच स्टेशन के क्षेत्र में कुल 41 लोगों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई है, जबकि जनपद के कई थाना क्षेत्राें के अंतर्गत करीब 64 लोगों की मौत ट्रेन एक्सीडेंट में हुई है। उधर, हरदोई के अंतर्गत रेलवे की तीन लाइनों पर ट्रेनों का यातायात होता है, जिसमें लखनऊ से हरदोई रेलवे रूट सबसे अधिक व्यस्त है।
इस रूट पर करीब तीन दर्जन से अधिक सवारी गाड़ी और दर्जनों मालगाड़ी का संचालन 24 घंटे के अंदर होता है, जबकि बालामऊ जंक्शन से दो ब्रांच लाइनें संचालित होती हैं, जिसमें सीतापुर रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत बालामऊ से सीतापुर और कानपुर रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत बालामऊ से कानपुर रेलवे लाइन पर हर दो किमी पर मानव रहित क्रासिंग हैं, पर उन पर ट्रेनों का अधिक यातायात नहीं होता है। ऐसे में उस रूट पर क्रासिंगाें को मानव युक्त करने में समय लग सकता है।
इंसेट---
जिले के 42 फाटक बन जाते मौत के द्वार
हरदोई। रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत संडीला के उमरताली से लेकर शाहाबाद स्टेशन तथा अन्य दो रेलवे लाइनों के जिले में कुल 42 रेलवे फाटक हैं। अफसरों के अनुसार इनमें अब कोई मानव रहित नहीं हैं, पर फिर भी यह रेलवे फाटक मासूमों के लिए मौत का द्वार बन जाते हैं, पर जिस पर नियंत्रण नहीं लग रहा है। रेल पथ इंजीनियर एपी त्रिपाठी ने बताया कि गेट संख्या 244 से 286 तक कुल 42 लेवल क्रासिंग हैं। जिनमें से बघौली के पास लेवल क्रासिंग ही सिर्फ मानव रहित क्रासिंग में दर्ज था, पर अब उसे भी मानवयुक्त कर दिया गया। हालांकि दो ब्रांच लाइनों पर अभी दर्जनों क्रासिंग मानव रहित हैं, पर यातायात अधिक न होने से उनमें थोड़ा समय लगेगा।
इंसेट
कोहरा बढ़ने पर सावधानी के नहीं इंतजाम
हरदोई। शुक्रवार को उमरताली के पास हुई घटना के पीछे कोहरे को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। कोहरा अधिक होने के कारण ट्रेन को देखा नहीं गया और टक्कर हो गई। घनी आबादी के बीच जिले में करीब पांच से छह रेलवे क्रासिंग हैं, जिसमें बघौली और संडीला की क्रासिंग सबसे अधिक भीड़ भरे इलाके में हैं, पर खास बात तो यह है कि इन क्रासिंगों पर सावधानी बरतने के कोई इंतजाम नहीं हैं। कोहरा अधिक होने पर इन आबादी वाली क्रासिंगों पर न तो कर्मचारी नियुक्त हैं और न ही किसी तकनीकी का संचालन किया गया है।
इंसेट---
क्रासिंगों पर अब नियुक्त किए गए गेटमित्र
हरदोई। जिले में मानव रहित क्रासिंगों पर गेट मित्र की नियुक्ति शुरू कर दी गई। इनमें भूतपूर्व सैनिकों को भी जिम्मेदारी दी गई। बघौली स्थिति मानव रहित क्रासिंग पर गेट मित्र की नियुक्ति कर ली गई और अब अन्य स्थानों पर भी मानव रहित क्रासिंगों पर गेट मित्र नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह गेट मित्र फाटकाें पर नियुक्त रहने के साथ ही लोगाें को सावधानी से गेट पार करने के प्रति जागरूक भी करेंगे।
इंसेट---
भंग हुुई रेलवे सतर्कता, उपभोक्ता कमेटी
हरदोई। जिले में रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति लड़ने के लिए मौजूदा समय में कोई कमेटी ही नहीं गठित है। रेलवे उपभोक्ता समिति का गठन दो वर्ष पहले किया गया था। जिसके सदस्य भी जिले से बनाया गया, पर कमेटी के सदस्यों द्वारा निष्क्रिय रहने से अब सतर्कता और उपभोक्ता समिति को भंग कर दिया गया। जिसके बाद से नई समिति का गठन नहीं हुआ है।
इंसेट---
‘लेवल क्रासिंगों पर यात्रियों के संग हादसों को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, गेट मित्रों की नियुक्ति के साथ कहीं-कहीं पर लेवल क्रासिंगों पर छोटे ओवर ब्रिज भी बनाए गए हैं।’ रामरतन, स्टेशन अधीक्षक
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जिले में तो मानव रहित क्रासिंगों को समाप्त करने का दावा किया गया और उन पर गेट मित्र की नियुक्ति हो गई है, पर इसके बाद भी लोग अपनी जान गवां रहे हैं। इतना ही नहीं कोहरा बढ़ने से लेबल क्रासिंगों पर सावधानी को लेकर भी कोई एहतियात नहीं बरती जा रही, जिससे आए दिन हो रही घटनाओं में सामने आ रहे हैं। अफसरों की माने तो रेलवे द्वारा क्रासिंगों पर गेट मित्र रखे जा रहे हैं, पर ज्यादा सुविधाएं दे पाना तो बस में भी नहीं है। उधर, रेलवे के अभिलेखों पर भले ही अब कोई क्रासिंग मानव रहित न रह गई हो, पर हादसों की वजह कागजों की पोल खोल को काफी हैं। जिले में तमाम क्रासिंगें ऐसी हैं जिन पर इतने अधिक हादसे हुए हैं वह अब डेथ प्वाइंट में शुमार हो गए।
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हरदोई स्टेशन के पास महोलिया क्रासिंग पर अब न तो फाटक है और न ही कोई गार्ड और इस क्रासिंग पर भी सैकड़ों लोगों ने अपनों की जिंदगी खो दी। पिहानी के पास मनिकापुर क्रासिंग पर दो बार ट्रेन और कई बार वाहन की भिड़ंत हो चुकी है। शाहाबाद के अटवा मुटिया क्रासिंग भी कई हादसों की वजह बन चुकी है। संडीला स्टेशन के पास भी एक ट्रक और ट्रेन में टक्कर हो चुकी। शहर के पास पिहानी लेबल क्रासिंग भी डेथ प्वाइंट है। उधर, सावधानी हटी और दुर्घटना घटी के मंत्र को सभी जानते हैं और समझते भी है लेकिन इन मंत्र पर तो यात्री अमल करते हैं और न ही रेलवे के अधिकारी। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में तमाम जगह यह लिखा पाया जाता है, पर इसका पालन कोई नहीं करा रहा।
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बीते एक वर्ष में जिले में ट्रेन के पहियों के नीचे 105 मासूमों ने जीवन लीला को समाप्त कर लिया। शुक्रवार को भी दो भाइयों की मौत भी लापरवाही का नतीजा है। जीआरपी और जिला स्तर से जुटाए गए आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में जनवरी से दिसंबर के पहले सप्ताह तक 105 ने अपनी जिंदगी गवां दी। इनमें जीआरपी के अंतर्गत संडीला से शाहाबाद के बीच स्टेशन के क्षेत्र में कुल 41 लोगों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई है, जबकि जनपद के कई थाना क्षेत्राें के अंतर्गत करीब 64 लोगों की मौत ट्रेन एक्सीडेंट में हुई है। उधर, हरदोई के अंतर्गत रेलवे की तीन लाइनों पर ट्रेनों का यातायात होता है, जिसमें लखनऊ से हरदोई रेलवे रूट सबसे अधिक व्यस्त है।
इस रूट पर करीब तीन दर्जन से अधिक सवारी गाड़ी और दर्जनों मालगाड़ी का संचालन 24 घंटे के अंदर होता है, जबकि बालामऊ जंक्शन से दो ब्रांच लाइनें संचालित होती हैं, जिसमें सीतापुर रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत बालामऊ से सीतापुर और कानपुर रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत बालामऊ से कानपुर रेलवे लाइन पर हर दो किमी पर मानव रहित क्रासिंग हैं, पर उन पर ट्रेनों का अधिक यातायात नहीं होता है। ऐसे में उस रूट पर क्रासिंगाें को मानव युक्त करने में समय लग सकता है।
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जिले के 42 फाटक बन जाते मौत के द्वार
हरदोई। रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत संडीला के उमरताली से लेकर शाहाबाद स्टेशन तथा अन्य दो रेलवे लाइनों के जिले में कुल 42 रेलवे फाटक हैं। अफसरों के अनुसार इनमें अब कोई मानव रहित नहीं हैं, पर फिर भी यह रेलवे फाटक मासूमों के लिए मौत का द्वार बन जाते हैं, पर जिस पर नियंत्रण नहीं लग रहा है। रेल पथ इंजीनियर एपी त्रिपाठी ने बताया कि गेट संख्या 244 से 286 तक कुल 42 लेवल क्रासिंग हैं। जिनमें से बघौली के पास लेवल क्रासिंग ही सिर्फ मानव रहित क्रासिंग में दर्ज था, पर अब उसे भी मानवयुक्त कर दिया गया। हालांकि दो ब्रांच लाइनों पर अभी दर्जनों क्रासिंग मानव रहित हैं, पर यातायात अधिक न होने से उनमें थोड़ा समय लगेगा।
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कोहरा बढ़ने पर सावधानी के नहीं इंतजाम
हरदोई। शुक्रवार को उमरताली के पास हुई घटना के पीछे कोहरे को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। कोहरा अधिक होने के कारण ट्रेन को देखा नहीं गया और टक्कर हो गई। घनी आबादी के बीच जिले में करीब पांच से छह रेलवे क्रासिंग हैं, जिसमें बघौली और संडीला की क्रासिंग सबसे अधिक भीड़ भरे इलाके में हैं, पर खास बात तो यह है कि इन क्रासिंगों पर सावधानी बरतने के कोई इंतजाम नहीं हैं। कोहरा अधिक होने पर इन आबादी वाली क्रासिंगों पर न तो कर्मचारी नियुक्त हैं और न ही किसी तकनीकी का संचालन किया गया है।
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क्रासिंगों पर अब नियुक्त किए गए गेटमित्र
हरदोई। जिले में मानव रहित क्रासिंगों पर गेट मित्र की नियुक्ति शुरू कर दी गई। इनमें भूतपूर्व सैनिकों को भी जिम्मेदारी दी गई। बघौली स्थिति मानव रहित क्रासिंग पर गेट मित्र की नियुक्ति कर ली गई और अब अन्य स्थानों पर भी मानव रहित क्रासिंगों पर गेट मित्र नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह गेट मित्र फाटकाें पर नियुक्त रहने के साथ ही लोगाें को सावधानी से गेट पार करने के प्रति जागरूक भी करेंगे।
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भंग हुुई रेलवे सतर्कता, उपभोक्ता कमेटी
हरदोई। जिले में रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति लड़ने के लिए मौजूदा समय में कोई कमेटी ही नहीं गठित है। रेलवे उपभोक्ता समिति का गठन दो वर्ष पहले किया गया था। जिसके सदस्य भी जिले से बनाया गया, पर कमेटी के सदस्यों द्वारा निष्क्रिय रहने से अब सतर्कता और उपभोक्ता समिति को भंग कर दिया गया। जिसके बाद से नई समिति का गठन नहीं हुआ है।
इंसेट---
‘लेवल क्रासिंगों पर यात्रियों के संग हादसों को रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, गेट मित्रों की नियुक्ति के साथ कहीं-कहीं पर लेवल क्रासिंगों पर छोटे ओवर ब्रिज भी बनाए गए हैं।’ रामरतन, स्टेशन अधीक्षक