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दस साल पहले मरे किसान के केसीसी से लेनदेन जारी
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बेहटागोकुल। किसानों को जीवित रहते विभागीय दौड़भाग के बाद भी योजनाओं का लाभ न मिलने की बात तो आम है, अब उनकी मृत्यु के बाद परिजनों को भी बैंकों की लापरवाही का दंश झेलना पड़ रहा है। थाना क्षेत्र के एक किसान की मौत के दस साल बाद भी उसके किसान क्रेडिट कार्ड के खाते से लेनदेन जारी है। जब उसका बेटा कर्जमाफी का लाभ लेने के लिए आवेदन करना गया तो उसे सच्चाई का पता चला। पता चला कि 2014 से 2016 के बीच पिता के केसीसी से हजारों की धनराशि निकाली गई। बैंक अधिकारी मामला काफी पुराना होने की बात कह रहे हैं। शाखा प्रबंधक ने कहा कि जांच के बाद ही हकीकत पता चलेगी।
थाना क्षेत्र के ग्राम भीखपुर निवासी योगेंद्र ने बताया कि उसके पिता रूप सिंह की वर्ष 2009 में मौत हो गई थी। उसके पिता ने 2004 में मानपुर स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। रुपये जमा न करने पर रकम वर्ष 2009 में 52 हजार रुपये हो गई थी। कई बार नोटिस आई, लेकिन वह आर्थिक परेशानी के कारण रकम जमा नहीं कर सका। योगेंद्र ने बताया कि सरकार ने 2017 में कर्ज माफी का एलान किया तो उसे पिता के खाते का कर्ज माफ होने उम्मीद हुई। लेकिन उसे योजना का लाभ नहीं मिल सका। हाल ही में सरकार ने कर्ज माफी के लिए पुन: आवेदन जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वह आवेदन करने गया तो अधिकारियों ने केसीसी अकाउंट की पासबुक बैंक से चढ़वाने को कहा। वह मानपुर स्थित बैंक गया और पास बुक पर इंट्री कराई। इंट्री कराने पर पता चला कि उसके पिता के खाते में 2014 और 2016 में दो बार में 90 हजार से अधिक की धनराशि जमा की गई और निकाली गई। उसने बैंक मैनेजर से शिकायत की, लेकिन अब तक उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। शाखा प्रबंधक अनुपम मिश्रा ने बताया कि मामला पुराना है। खाते में रकम किसने जमा की और निकाली, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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थाना क्षेत्र के ग्राम भीखपुर निवासी योगेंद्र ने बताया कि उसके पिता रूप सिंह की वर्ष 2009 में मौत हो गई थी। उसके पिता ने 2004 में मानपुर स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। रुपये जमा न करने पर रकम वर्ष 2009 में 52 हजार रुपये हो गई थी। कई बार नोटिस आई, लेकिन वह आर्थिक परेशानी के कारण रकम जमा नहीं कर सका। योगेंद्र ने बताया कि सरकार ने 2017 में कर्ज माफी का एलान किया तो उसे पिता के खाते का कर्ज माफ होने उम्मीद हुई। लेकिन उसे योजना का लाभ नहीं मिल सका। हाल ही में सरकार ने कर्ज माफी के लिए पुन: आवेदन जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वह आवेदन करने गया तो अधिकारियों ने केसीसी अकाउंट की पासबुक बैंक से चढ़वाने को कहा। वह मानपुर स्थित बैंक गया और पास बुक पर इंट्री कराई। इंट्री कराने पर पता चला कि उसके पिता के खाते में 2014 और 2016 में दो बार में 90 हजार से अधिक की धनराशि जमा की गई और निकाली गई। उसने बैंक मैनेजर से शिकायत की, लेकिन अब तक उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। शाखा प्रबंधक अनुपम मिश्रा ने बताया कि मामला पुराना है। खाते में रकम किसने जमा की और निकाली, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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