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Hardoi News: स्वास्थ्य सेवाओं पर 46 करोड़ लुटाए, व्यवस्था बेहतर फिर भी नहीं बना पाए

Fri, 16 May 2025 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 10:53 PM IST
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46 crores were spent on health services, but still could not improve the system
हरदोई। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य की बुनियादी सेवाओं पर हर साल करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सीएचसी व पीएचसी पर व्यवस्थाएं जस की तस हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मामूली रोगों की दवाएं देकर मरीजों को चलता कर दिया जाता है, जबकि गंभीर घटना व रोग पर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों को बेहतर सुविधा तक मयस्सर नहीं है।
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शासन की ओर से गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारी भरकम बजट दिया जाता है। ताकि लोगों को उनके गांव में ही उपचार मिल सके। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जिले के सभी ब्लॉकों से संबंधित सीएचसी व पीएचसी सहित मेडिकल कॉलेज और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय को 47 करोड़, 88 लाख, 64 हजार, 128 रुपये मिले। 47 करोड़ रुपये से अधिक बजट के सापेक्ष मार्च तक 46 करोड़, 51 लाख, 77 लाख, 643 रुपये खर्च भी कर दिए गए हैं।
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विभिन्न मदों में मिली धनराशि का 97 फीसदी खर्च कर दिया गया है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि गांवों से लोग इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज और शहर के दूसरे अस्पतालों में दौड़ने को मजबूर हैं। करोड़ाें की धनराशि का उपयोग धरातल पर कहां हो रहा है, दिख नहीं रहा। सर्दी व खांसी की दवा दे दी जाती है, लेकिन किसी हादसे व रोग में मरीज की हालत गंभीर होती है तो मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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तीन ब्लाॅकों ने पूरा तो छह ब्लाकों ने 96 फीसदी किया खर्च

हरदोई। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य कार्य व वेतन के लिए दी गई धनराशि में तीन ब्लॉकों ने शत प्रतिशत धनराशि खर्च कर दी है। इनमें संडीला, बेहंदर व पिहानी में लगभग शत प्रतिशत खर्च हो गया है। वहीं, हरियावां, कोथावां, अहिरोरी, मल्लावां, भरावन और भरखनी में 99 फीसदी राशि खर्च कर दी गई है। टड़ियावां ने 98 और सांडी ने 97 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है। सात ब्लॉकों ने 96 फीसदी और माधौगंज ने 94 और बावन ने 91 फीसदी धनराशि खर्च की है।





विकास खंडों में बने स्वास्थ्य केंद्राें पर अलग-अलग मदों में धनराशि का आवंटन होता है। राशि कहां और किस मद में खर्च हो रही है। इसका पूरा ब्योरा लिया जाता है, कहीं पर कोई अनियमितता सामने आती है तो कार्रवाई भी की जाती है। -डॉ. रोहताश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी, हरदोई
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