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10,138 मजदूरों का भुगतान जल्द
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 25 Feb 2015 12:27 AM IST
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मनरेगा योजना में हर हाथ को काम और दाम देने की मंशा
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जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। एक तो एफटीओ लागू होने से
जिम्मेदारों द्वारा मनमानी की जा रही, वहीं धनराशि का भी अभाव बना हुआ है,
पर अब मनरेगा के जाबकार्ड धारकों को अधिक दिन बिना मजदूरी के परेशान नहीं
होना पड़ेगा।
सरकार ने मनरेगा मजदूरों का भुगतान करने को किश्त जारी कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ही लोगों को काम देने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को संचालित किया है। जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में जाब कार्ड बनाकर लोगों को काम दिया गया।
मनरेगा से हर जाबकार्ड धारक को 100 दिन का काम देने के निर्देश हैं, पर जिम्मेदारों की लापरवाही से जाब कार्डधारकों को एक तो 100 दिन का काम नहीं मिल रहा है और जो काम कर रहे, उन्हें भुगतान तक नहीं हो रहा है। जाब कार्डधारकों को मजदूरी देने के लिए अब आनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई।
इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा जाबकार्ड धारकों को मजदूरी का भुगतान किया जाना है, पर जिम्मेदारों की लापरवाही और उदासीनता से जाब कार्डधारकों को समय से भुगतान नहीं हो पाया और अब जिले के पास धनराशि का भी अभाव है।
इससे संचालित होने वाले कार्य भी ठप होने की कगार पर हैं। धनराशि न होने से जिले के 10138 जाबकार्ड धारकों का 775.93439 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ, जबकि 1064 सामग्री बिलों का कुल 217.15 लाख रुपये मिलाकर सामग्री और श्रम पर कुल 1009.14 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है।
जिसको लेकर ही अब केंद्र सरकार ने सातवीं किश्त के अंतर्गत 759.32 करोड़ रुपये प्रदेश को दे दिए हैं। वित्तीय वर्ष 14-15 के लिए निर्धारित श्रम बजट में से ग्राम्य विकास प्रमुख सचिव अरुण सिंघल ने धनराशि जारी कर दी, साथ ही जनपदों को धनराशि की डिमांड करने के निर्देश दिए हैं।
ताकि मजदूराें व सामग्री का लंबित भुगतान किया जा सके और नवीन कार्य शुरू हो सके। उधर, मनरेगा उपायुक्त अनिल सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार से 759.32 करोड़ रुपये प्रदेश को दिए गए हैं, अब डिमांड भेज कर धनराशि मंगवाई जाएगी और मजदूरों तथा सामग्री का भुगतान किया जाएगा।
सरकार ने मनरेगा मजदूरों का भुगतान करने को किश्त जारी कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ही लोगों को काम देने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को संचालित किया है। जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में जाब कार्ड बनाकर लोगों को काम दिया गया।
मनरेगा से हर जाबकार्ड धारक को 100 दिन का काम देने के निर्देश हैं, पर जिम्मेदारों की लापरवाही से जाब कार्डधारकों को एक तो 100 दिन का काम नहीं मिल रहा है और जो काम कर रहे, उन्हें भुगतान तक नहीं हो रहा है। जाब कार्डधारकों को मजदूरी देने के लिए अब आनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई।
इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम द्वारा जाबकार्ड धारकों को मजदूरी का भुगतान किया जाना है, पर जिम्मेदारों की लापरवाही और उदासीनता से जाब कार्डधारकों को समय से भुगतान नहीं हो पाया और अब जिले के पास धनराशि का भी अभाव है।
इससे संचालित होने वाले कार्य भी ठप होने की कगार पर हैं। धनराशि न होने से जिले के 10138 जाबकार्ड धारकों का 775.93439 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ, जबकि 1064 सामग्री बिलों का कुल 217.15 लाख रुपये मिलाकर सामग्री और श्रम पर कुल 1009.14 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है।
जिसको लेकर ही अब केंद्र सरकार ने सातवीं किश्त के अंतर्गत 759.32 करोड़ रुपये प्रदेश को दे दिए हैं। वित्तीय वर्ष 14-15 के लिए निर्धारित श्रम बजट में से ग्राम्य विकास प्रमुख सचिव अरुण सिंघल ने धनराशि जारी कर दी, साथ ही जनपदों को धनराशि की डिमांड करने के निर्देश दिए हैं।
ताकि मजदूराें व सामग्री का लंबित भुगतान किया जा सके और नवीन कार्य शुरू हो सके। उधर, मनरेगा उपायुक्त अनिल सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार से 759.32 करोड़ रुपये प्रदेश को दिए गए हैं, अब डिमांड भेज कर धनराशि मंगवाई जाएगी और मजदूरों तथा सामग्री का भुगतान किया जाएगा।