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अनाज पर कीटनाशकों के प्रभाव की हापुड़ में होगी जांच

Fri, 22 Jul 2016 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Fri, 22 Jul 2016 10:17 PM IST
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Will examine the effects of pesticides.
हापुड़ में बनी विभाग की पहली लैब - फोटो : अमर उजाला

अनाज पर कीटनाशकों के प्रभाव की जांच अब स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगी। इससे फसलों की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर एक साथ ध्यान दिया जा सकेगा। इसके लिए भारतीय अनाज प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान (आईजीएमआरआई) के परिसर में पांच करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक लैब स्थापित की गयी है।

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इसमें रेडियोधर्मिता के आधार पर काम करने वाली चार कंप्यूटराइज्ड मशीन लगी हैं। समूचे भारत में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन इस तरह की यह अकेली लैब है। संस्थान के सूत्रों की मानें तो गेंहू और चावल समेत अन्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों का कितना भाग है
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और लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इसकी जानकारी अब हापुड़ में ही हो सकेगी। यहां पर बनी लैब में एक ग्राम के 10 लाख वें भाग की गणना भी की जा सकेगी। इस लैब को संचालित करने के लिए आईजीएमआरआई हापुड़ के चार कर्मचारी हैदराबाद में 19 जनवरी से 17 फरवरी तक प्रशिक्षण ले चुके हैं।
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प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में सुनील शर्मा, प्रदीप, प्रदीप मन्यम और शिवकुमार शामिल हैं। लैब में अब केमिकल और ग्लास वेयर आने शेष हैं। कंपनी के अधिकारी यहां निरीक्षण कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि आईजीएमआरआई का शिलान्यास 14 मार्च 1962 को खाद्य एवं कृषि मंत्रालय भारत सरकार के सचिव बीबी घोष ने किया था। यहां देशभर में अनाज की कीटों से सुरक्षा के उपायों पर रिसर्च होती है। इस संस्थान के देश में उदयपुर समेत अनेक स्थानों पर केंद्र थे,

जिनमें से अधिकांश बंद हो गये हैं। केन्द्रीय संयुक्त सचिव (खाद्य) से सेवानिवृत डा. सुभाष गुप्ता को आईजीएमआरआई का सलाहकार नियुक्त किया गया है। इस लैब में जांच के आधार पर फसलों पर सीमित मात्रा में कीटनाशक प्रयोग कर कीटों और बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।


इससे कम लागत में ज्यादा पैदावार लेना संभव हो सकेगा। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों की मात्रा की जांच की जा सकेगी। जिससे लोगों को कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकेगा।

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