फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Where are the lost ponds.

कहां गुम हो गए तालाब, अब गांव-गांव जाकर खोजेंगे साहब

Mon, 17 Apr 2017 08:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Mon, 17 Apr 2017 08:28 PM IST
विज्ञापन
Where are the lost ponds.
तालाब - फोटो : अमर उजाला

अवैध कब्जों के कारण अस्तित्व खो चुके तालाबों के फिर से वजूद में आने की उम्मीद जगी है। सरकार ने तालाब विकास प्राधिकरण बनाने की घोषणा कर दी है। इसके बाद जिले के अधिकारी गायब हो चुके तालाबों की खोज में जुट गए हैं।

विज्ञापन


तालाबों का रिकार्ड खंगालकर उन्हें अस्तित्व में लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब अधिकारी गांव व क्षेत्र में पहुंचकर लुप्त हो चुके तालाबों को दोबारा से तैयार कराने की पहल करेंगे।  
विज्ञापन


गिरते भूजल को नियंत्रित करने और गायब तालाबों को अस्तित्व में लाने के लिए प्रदेश सरकार ने तालाब विकास प्राधिकरण का गठन करने की घोषणा की थी। इसका असर अभी से अधिकारियों पर दिखाई देना शुरू हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारियों ने संबंधित फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बना रहा है। ऐसे में तालाबों की स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। रिकार्ड के अनुसार जिले की कुल 273 ग्राम पंचायतों में करीब 710 तालाब हैं।

यह कड़वी सच्चाई है कि इनमें से अधिकतर तालाबों पर कब्जे हैं। अतिक्रमण के चलते तालाबों की संख्या में कमी के साथ साथ इनके क्षेत्रफल सिमटकर आधे रह गए हैं। कुछ का तो अस्तित्च ही मिट चुका है।

विभागीय सूत्रों की माने तो जिले के करीब 60 प्रतिशत तालाबों पर कब्जे हैं। जबकि बीस प्रतिशत तालाब ऐसे हैं जो अपना पूर्णतया अस्तित्व ही खो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद इन तालाबों को कब्जा मुक्त नहीं किया जा सका है।

पिछले एक साल में तालाबों पर कब्जे की करीब डेढ़ सौ शिकायतें हुई हैं। जिन पर कोई सुनवाई नहीं हुई। जिले में तालाबों की स्थिति हापुड़  में 310, गढ़ में  250 और धौलाना में 150 तालाब थे।

धौलाना तो छोड़कर जिले के हापुड़, गढ़ व सिंभावली ब्लाक डार्क जोन में हैं। तालाब के गायब होने और अंधाधुंध भूजल के दोहन ने जलस्तर को पिछले दस वर्षों में ही कई मीटर नीचे कर दिया है। जिससे पूरे जिले के ड्रार्क जोन में जाने का खतरा बन गया है।

सीडीओ कुणाल सिल्कू कहते हैं कि तालाबों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी जिला स्तरीय योजना बनायी जा रही है। तालाबों की जांच के बाद उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। प्रशासन तालाबों को कब्जा मुक्त कराने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है।


डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि गांवों में तालाबों को लेकर पंचायती राज विभाग ग्राम प्रधानों की मदद से तालाबों को कब्जा मुक्त कराने के प्रयास शुरू करेगा। जल्द ही जिले के तालाबों की सूरत बदलती दिखायी देगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed