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Hapur Factory Blast: अस्पताल में इलाजरत दो और घायलों ने तोड़ा दम, मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 15
Thu, 09 Jun 2022 03:35 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हापुड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हापुड़
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 09 Jun 2022 03:35 PM IST
सार
हापुड़ में चार जून को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में झुलसे दो और मजदूरों की गुरुवार को मौत हो गई। मृतकों की पहचान गांव चरढिया निवासी शिवम और गांव भंडेरी निवासी सनोज के रूप में हुई है।
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हापुड़ फैक्टरी में धमाका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हापुड़ के धौलाना औद्योगिक क्षेत्र में चार जून को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में झुलसे दो और मजदूरों की गुरुवार को मौत हो गई। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान गांव चरढिया निवासी शिवम और गांव भंडेरी निवासी सनोज के रूप में हुई है। इसी के साथ हादसे में मरने वालों की संख्या अब 15 हो गई है। जबकि अभी भी कई घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मालूम हो कि चार जून को सुबह फैक्टरी में मजदूर काम कर रहे थे। अनहोनी से अनजान कामगार टैंक में बारूद का मसाला तैयार कर रहे थे कि अचानक बारूद ने आग पकड़ ली। कामगारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पलक झपकते ही टैंक आग का गोला बनकर फट गया। आग का गोला अपने साथ फैक्टरी के टीन शेड को गरीब 50 फुट ऊपर तक उड़ा ले गया। धमाका इतना भीषण था कि बारूद बनाने का काम कर रहे कामगारों के शव भी इसके साथ उड़कर फैक्टरी के बाहर जाकर गिर पड़े थे।
फैक्टरी में खिलौना बंदूकों के लिए मिसाइल की तरह दिखने वाले पटाखे बनाए जा रहे थे। इनमें बारूद का इस्तेमाल किया जाता है। पटाखा बंदूक से निकलने के बाद थोड़ी दूर पर जाकर तेज आवाज के साथ फट जाता है। इन पटाखों को बनाने के लिए बड़ी मात्रा में बारूद और अन्य रसायन एक ही जगह रखे हुए थे। इसी दौरान धमाका हुआ, जिसमें बारूद के साथ फटे पटाखे मजदूरों के शरीर में तीन इंच तक घुस गए। शवों के पोस्टमार्टम के दौरान ये धंसे हुए मिले।
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मालूम हो कि चार जून को सुबह फैक्टरी में मजदूर काम कर रहे थे। अनहोनी से अनजान कामगार टैंक में बारूद का मसाला तैयार कर रहे थे कि अचानक बारूद ने आग पकड़ ली। कामगारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पलक झपकते ही टैंक आग का गोला बनकर फट गया। आग का गोला अपने साथ फैक्टरी के टीन शेड को गरीब 50 फुट ऊपर तक उड़ा ले गया। धमाका इतना भीषण था कि बारूद बनाने का काम कर रहे कामगारों के शव भी इसके साथ उड़कर फैक्टरी के बाहर जाकर गिर पड़े थे।
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फैक्टरी में खिलौना बंदूकों के लिए मिसाइल की तरह दिखने वाले पटाखे बनाए जा रहे थे। इनमें बारूद का इस्तेमाल किया जाता है। पटाखा बंदूक से निकलने के बाद थोड़ी दूर पर जाकर तेज आवाज के साथ फट जाता है। इन पटाखों को बनाने के लिए बड़ी मात्रा में बारूद और अन्य रसायन एक ही जगह रखे हुए थे। इसी दौरान धमाका हुआ, जिसमें बारूद के साथ फटे पटाखे मजदूरों के शरीर में तीन इंच तक घुस गए। शवों के पोस्टमार्टम के दौरान ये धंसे हुए मिले।
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