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सांप के काटने पर सीएचसी पर ही मिलेगा इलाज
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 13 Jun 2017 10:42 PM IST
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सांप
- फोटो : demo pic
जिले में किसी ग्रामीण को यदि सांप ने काट लिया तो उसे इलाज के लिए सीएचसी तक की दौड़ लगानी पड़ेगी। गांवों में बने किसी उप स्वास्थ्य केंद्र पर एंटीस्नेक वेनम मौजूद नहीं है।
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गर्मी में सांप निकलकर इधर-उधर भटकने लगे हैं। सर्पदंश का सबसे ज्यादा खतरा खेतों में काम करने वाले किसानों को होता है। जागरूकता के अभाव में देहात में सर्पदंश की घटना पर परिजन मरीज का झाड़ फूंक कराने में लग जाते हैं।
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ऐसे में मरीज को इलाज मिलने में काफी देरी हो जाती है इससे उसकी मौत तक हो जाती है। डिप्टी सीएमओ डा.प्रवीण शर्मा का कहना है कि सांप काटने पर मरीज में दो प्रकार के लक्षण नजर आते हैं।
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एक न्यूरो टॉक्सिस और दूसरा कार्डियक टॉक्सिस। कार्डियक टॉक्सिस होने पर मरीजों में ह्दयाघात होने की संभावना बढ़ जाती है। मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
न्यूरो टॉक्सिस के मरीजों में समय से इलाज मिलने पर नर्वस सिस्टम खराब होने लगता है। दिमाग कार्य करना बंद कर देता है। मरीज की हालत खराब होने पर नाक और कान से खून तक आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि सभी सांप जहरीले नहीं होते इसलिए मरीज को घबराना नहीं चाहिए।