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बसने लगा तंबुओं का नगर, पहला स्नान आज

Mon, 07 Nov 2016 09:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Mon, 07 Nov 2016 09:46 PM IST
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The city of tents.
बसने लगा तंबुओं का नगर - फोटो : अमर उजाला

पौराणिक खादर मेले में धीरे-धीरे तंबुओं की महानगरी बसने लगी है। सोमवार तक मेले में करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे टेंट-तंबू गाढ़कर पड़ाव डाल लिया है। गोपाष्टमी पर मंगलवार को पहला स्नान होगा।

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पौराणिक खादर मेला इस बार करीब 15 किलोमीटर लंबी परिधि में बसा हुआ है। यहां धीरे-धीरे तंबुओं की महानगरी बसने का सिलसिला तेज होता जा रहा है। जिला पंचायत विभाग के आंकड़ों के अनुसार सोमवार देर शाम तक खादर मेले में एक लाख से अधिक श्रद्धालु पड़ाव डाल चुके थे।
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गढ़ समेत जंगल से होकर निकल रहे संपर्क मार्गों पर श्रद्धालुओं से भरे वाहनों का तांता लगा हुआ है। इनमें सवार महिला-बच्चे ढोलक की थाप पर गंगा मैया के गीत गाते हुए चल रहे हैं। इससे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया है।
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विभिन्न स्थानों से आ रहे श्रद्धालु भक्ति और मस्ती का अनूठा संगम कहलाए जाने वाले खादर के इस मेले का खूब लुत्फ उठा रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से बचे समय में महिलाएं चूल्हे चौके की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

बुजुर्ग हुक्का गुड़गुड़ाकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं तो युवा वर्ग गंगा के रेतीले मैदान में क्रिकेट, कबड्डी, फुटबॉल जैसे खेलों का लुत्फ ले रहे हैं। शिरडी साईं बाबा, आर्य सभा, खिचड़ी वाले बाबा समेत विभिन्न अखाड़ों में प्रवचन का कार्यक्रम चल रहा है।

श्रद्धा के सैलाब में हर पल तेजी आती जा रही है, लेकिन अब तक जिला पंचायत की तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं। वहीं मेला ड्यूटी में आने वाली बाहरी पुलिस भी अब तक नहीं पहुंची है। मेले में मेरठ सेक्टर में रोशनी और निगरानी से लेकर पीने के पानी के लिए हैंडपंप तक भी नहीं लगे हैं।

इससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। वहीं रेतीली सड़कों पर पर्याप्त मात्रा में फूस और कबाड़ न डाले जाने से वाहनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। वहीं स्पेशल झूले, टॉय ट्रेन, 50 वीआईपी कॉटेज और फूड कोर्ट बनाने का काम अब भी जारी है।

जिला पंचायत अधिकारी नरेश यादव और जेई आदेश कुमार का कहना है कि एक सप्ताह के लिए रेतीले जंगल में अस्थाई तौर पर ढेरों तैयारी करना चुनौती की तरह है। इसके बाद भी जिला पंचायत के सभी इंतजाम पूरी तरह चाक चौबंद कराए जा रहे हैं।

बुलंदशहर सेक्टर में थाने के पास सड़क और गंगा के बीच वाली भूमि को पूरी तरह नो एंट्री घोषित कर बैरिकेडिंग कराई गई है। इसके बाद भी कुछ लोगों ने वर्जित क्षेत्र में पड़ाव डाल लिया है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने इसे सख्ती से हटवा दिया।

गोपाष्टमी पर्व को लेकर ब्रजघाट तीर्थनगरी में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत महानगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया है।

पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि नंद बाबा ने कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को पहली बार भगवान श्रीकृष्ण को गायों को चराने के लिए जंगल में भेजा था। उन्होंने गोमाता की वैदिक रीति रिवाज से पूजा अर्चना कर अपने दायित्व का निर्वहन प्रारंभ किया था।

इसके उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष गोपाष्टमी पर्व मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद पांडवों को गढ़ खादर मेले में लेकर आए भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे विभिन्न अनुष्ठान संपन्न कराए थे, जिनमें सर्वप्रथम गोपाष्टमी पर्व मनाया गया था।

इस दिन गंगा मैया में डुबकी लगाकर गोमाता को गुड़, चने, जौ, मालपूड़ा, गन्ना खिलाने के साथ ही रोली, चावल, फूल, चंदन से तिलक कर पूजा अर्चना की जाती है। गोपाष्टमी पर गंगा में डुबकी लगाने वाले मनोवांछित फल पाने के साथ ही पापों से मुक्ति मिलती है।

सड़कों के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। अखाड़े का सामान लाने के दौरान कई जगह गाड़ी फंस गई थी। इसे निकालने में काफी परेशानी हुई। - महात्मा निर्भय दास, खिचड़ी वाले बाबा का अखाड़ा

मेले की व्यवस्थाएं किसी भी रूप में दुरुस्त नहीं हैं। पुलिस-प्रशासन और जिला पंचायत अमला महज अपनी तैयारियों तक सीमित चल रहा है। इससे पानी और सुरक्षा भी मुहैया नहीं है। अजय भारद्वाज भराला, राष्ट्रीय अध्यक्ष ,भाजपा किसान मजदूर संघ

एक तरफ केंद्र और प्रदेश शासन गंगा को साफ-सुथरा बनाने की योजनाएं चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मेले में अब तक कूड़ा करकट साफ करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे अपशिष्ट पदार्थ गंगा में प्रभावित हो रहे हैं।  सरदार राजेद्र सिंह, संयोजक , जल संरक्षण समिति


40 सालों से इस मेले में आ रहा हूं। हर बार शासन से अनुदान और मेला मानचित्र में स्थान दिलाने का दावा तो होता है लेकिन बाद में सब कुछ ठंडे बस्ते में पड़ जाता है। राजकुमार राजू, संचालक, साईं धाम कैंप

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