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Hapur News: दिसंबर में शुरू होगा काली नदी पर बन रहा 47 करोड़ का एसटीपी, शुद्धता के बाद गंगा में जाएगा पानी
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ततारपुर में निर्माणाधीन एसटीपी। संवाद
हापुड़। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए ततारपुर में काली नदी पर 47 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण दिसंबर तक पूरा होने के साथ इसे चालू भी कराया जाएगा। करीब चार हजार वर्ग मीटर भूमि पर बन रहे इस प्लांट का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद काली नदी में गिरने वाले औद्योगिक इकाइयों और नालों के दूषित पानी को शोधित किया जाएगा। इससे नदी के प्रदूषण को कम करने और गंगा के जल की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, आसपास के 20 गांवों में दूषित पानी से फैल रही बीमारियों को रोकने में भी सहायता मिलेगी।
गंगा में नहीं जाएगा बिना उपचार का पानी
काली नदी मेरठ के ग्रामीण क्षेत्रों से होकर हापुड़ के ततारपुर पहुंचती है। क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी फिलहाल नदी में गिर रहा है। इसके बाद काली नदी बुलंदशहर और अलीगढ़ होते हुए कासगंज में गंगा से मिलती है। ऐसे में नदी में बहने वाला प्रदूषित पानी गंगा के जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
रोजाना छह लाख लीटर पानी होगा शोधित
इस एसटीपी की क्षमता प्रतिदिन छह लाख लीटर दूषित पानी का उपचार करने की होगी। करीब दो साल से इसका निर्माण चल रहा है। निर्माण कार्य दिसंबर में पूरा होगा और इसी दौरान मशीनें भी स्थापित होंगी।
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20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को मिलेगी राहत
प्रदूषण विभाग के अनुसार, करीब 120 औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक पानी काली नदी में गिर रहा है। इससे आसपास के 20 से अधिक गांवों में भूजल और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। गांव असरा, मुरादपुर, मतनौरा, मलकपुर, बिगास, गजालपुर, बाबूगढ़ छावनी, लालपुर और ततारपुर सहित कई गांवों के लोग दूषित पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। बता दें कि क्षेत्र में हेपेटाइटिस, पेट संक्रमण और कैंसर जैसी बीमारियों ग्रामीणों में अधिक होने से लगातार चिंता बनी हुई है। एसटीपी के नियमित संचालन से नदी में प्रदूषण कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा।
दिसंबर माह में निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही एसटीपी का संचालन शुरू हो जाएगा। करीब 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष फिनिशिंग और मशीनरी लगाने से संबंधित कार्य चल रहा है। - पंकज पुरी, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
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गंगा में नहीं जाएगा बिना उपचार का पानी
काली नदी मेरठ के ग्रामीण क्षेत्रों से होकर हापुड़ के ततारपुर पहुंचती है। क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी फिलहाल नदी में गिर रहा है। इसके बाद काली नदी बुलंदशहर और अलीगढ़ होते हुए कासगंज में गंगा से मिलती है। ऐसे में नदी में बहने वाला प्रदूषित पानी गंगा के जल की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
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रोजाना छह लाख लीटर पानी होगा शोधित
इस एसटीपी की क्षमता प्रतिदिन छह लाख लीटर दूषित पानी का उपचार करने की होगी। करीब दो साल से इसका निर्माण चल रहा है। निर्माण कार्य दिसंबर में पूरा होगा और इसी दौरान मशीनें भी स्थापित होंगी।
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20 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को मिलेगी राहत
प्रदूषण विभाग के अनुसार, करीब 120 औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक पानी काली नदी में गिर रहा है। इससे आसपास के 20 से अधिक गांवों में भूजल और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। गांव असरा, मुरादपुर, मतनौरा, मलकपुर, बिगास, गजालपुर, बाबूगढ़ छावनी, लालपुर और ततारपुर सहित कई गांवों के लोग दूषित पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। बता दें कि क्षेत्र में हेपेटाइटिस, पेट संक्रमण और कैंसर जैसी बीमारियों ग्रामीणों में अधिक होने से लगातार चिंता बनी हुई है। एसटीपी के नियमित संचालन से नदी में प्रदूषण कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा।
दिसंबर माह में निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही एसटीपी का संचालन शुरू हो जाएगा। करीब 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष फिनिशिंग और मशीनरी लगाने से संबंधित कार्य चल रहा है। - पंकज पुरी, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण