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डेंगू से निपटना तो दूर, टेस्ट की सुविधा नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Thu, 04 Aug 2016 07:44 PM IST
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डेंगू, मच्छर
- फोटो : file photo
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जिले के वाशिंदों की सेहत भगवान भरोसे है। मौसमी बीमारियों के बाद अब डेंगू का खतरा सताने लगा है। डेंगू के ‘डंक’ से सभी डरे हुए हैं। पर मजे की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू से निपटने का कुछ भी इंतजाम नहीं है।
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स्थिति तो यह है कि डेंगू की पुष्टि के लिए टेस्ट की भी व्यवस्था नहीं है। बीते वर्ष जिले के 350 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी, इसके बाद भी स्वास्थ्य महकमा नहीं चेता। जिले में सपनावत, गढ़मुक्तेश्वर, धौलाना और हापुड़ चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
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इन स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू से निपटने का इंतजाम तो दूर, पुष्टि के लिए टेस्ट तक की व्यवस्था नहीं है। प्लेटलेट्स कम होने पर ब्लड सेपरेटर करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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यदि रोगी के ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाती है, तो उसकी पूर्ति करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास मरीज को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है। ब्लड भी प्राइवेट अस्पताल में चढ़वाना पड़ता है। जबकि जिले में हर वर्ष अनेक लोग डेंगू की चपेट में आते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बिगड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई पहल नहीं की गई।
डेंगू फैलाने वाला मच्छर अक्सर बरसात के मौसम में सक्रिय होता है। इसके काटने से मरीज के शरीर में तेज दर्द, सिर दर्द व बुखार हो जाता है। जल्द इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी मरीज के लिए जानलेवा बन जाती है।
जिले भर में बीते वर्ष डेंगू के करीब 350 केस सामने आए थे। इन सभी ने शहर और अन्य जिलों के निजी नर्सिंग होम में इलाज कराया था। निजी अस्पताल में डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानने को तैयार नहीं थे। लेकिन सरकारी लैब की रिपोर्ट में भी इन मरीजों में डेंगू की पुष्टि होने से अफसरों में अफरातफरी मच गई थी।
जिले में डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। अभी तक सामान्य वायरल के केस सामने आ रहे हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के निर्देश दिए गए है। प्राइवेट डॉक्टरों को भी निर्देशित किया गया है कि डेंगू का संदेह होने पर उन्हें सूचना दी जाए। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ