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Hapur News: गोदामों में 4.39 लाख क्विंटल चीनी, बिक्री कोटे की आड़ में रोका भुगतान
Wed, 08 Jan 2025 10:12 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Wed, 08 Jan 2025 10:12 PM IST
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हापुड़। जिले के दोनों चीनी मिलों के गोदामों में करीब 4.39 लाख क्विंटल (अनुमानित 142 करोड़) चीनी भंडारित है, फिर भी किसानों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। दोनों मिलों ने पिछले सत्र का करीब 87 करोड़ भुगतान नहीं किया है। नए सत्र में भी 65 लाख क्विंटल गन्ना खरीद लिया है, जिसका कोई पैसा किसानों के खातों में नहीं पहुंचा।
दरअसल, पिछले कई साल से दोनों ही मिल गन्ना भुगतान में पिछड़ी हुई हैं। बैंकों से लिया ऋण समय से न चुका पाने के कारण भी चीनी मिलों की साख गिरी है। पिछले दिनों मैनेजमेंट को हटाकर सिंभावली मिल पर रिसिवर नियुक्त कर दिया गया है। लेकिन अभी भी भुगतान की स्थिति नहीं सुधर रही है।
आलम यह है कि पेराई सत्र 2023-24 का सिंभावली मिल पर करीब 53 करोड़ और ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर करीब 34 करोड़ रुपये बकाया है। गोदामों में चीनी की भरमार होने के बावजूद अधिकारी बिक्री कोटे का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि पड़ोस के जिलों में चल रहे चीनी मिल हापुड़ के मिलों से कहीं अधिक भुगतान कर चुके हैं।
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दोनों चीनी मिलों के गोदामों में भंडारित चीनी-
चीनी मिली पुराना स्टॉक नया स्टॉक
सिंभावली 59000 क्विंटल 2.44 लाख क्विंटल
ब्रजनाथपुर 13733 क्विंटल 1.23 लाख क्विंटल
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दोनों चीनी मिलों द्वारा वर्तमान पेराई सत्र में खरीदा गन्ना-
चीनी मिल खरीदा गन्ना
सिंभावली 44.55 लाख क्विंटल
ब्रजनाथपुर 19.75 लाख क्विंटल
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जनप्रतिनिधियों के दावे भी नहीं दिला सके राहत-
तीन लोकसभा और तीन ही विधानसभा वाले हापुड़ जिले में गन्ना किसान परेशान है। गढ़, हापुड़ और धौलाना के तीनों विधायक सत्ताधारी पार्टी से हैं, फिर भी भुगतान नहीं सुधर रहा। साथ ही तीनों लोकसभा से चुने सांसद भी सत्ताधारी पार्टी हैं, उनका भी किसानों को खास लाभ नहीं मिल सका है।
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दूसरे जिलों की चीनी मिलों ने किया भुगतान
हापुड़ जिले के नजदीक मेरठ में नंगलामल, मोहद्दीनपुर चीनी मिल हैं, जो किसानों का पिछले सत्र का पूरा भुगतान कर चुकी हैं। नंगलामल चीनी मिल नए सत्र में भी अधिकांश भुगतान कर चुकी है। मोदीनगर चीनी मिल भी पुराने सत्र का भुगतान कर चुकी हैं, लेकिन हापुड़ के दोनों ही चीनी मिल पिछड़ रहे हैं।
कोट -
सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल से किसानों को लगातार भुगतान कराया जा रहा है। चीनी का बिक्री कोटा भारत सरकार ही निर्धारित करती है। किसानों को जल्द से जल्द भुगतान कराने का प्रयास है। - सना आफरीन खान, जिला गन्ना अधिकारी।
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दरअसल, पिछले कई साल से दोनों ही मिल गन्ना भुगतान में पिछड़ी हुई हैं। बैंकों से लिया ऋण समय से न चुका पाने के कारण भी चीनी मिलों की साख गिरी है। पिछले दिनों मैनेजमेंट को हटाकर सिंभावली मिल पर रिसिवर नियुक्त कर दिया गया है। लेकिन अभी भी भुगतान की स्थिति नहीं सुधर रही है।
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आलम यह है कि पेराई सत्र 2023-24 का सिंभावली मिल पर करीब 53 करोड़ और ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर करीब 34 करोड़ रुपये बकाया है। गोदामों में चीनी की भरमार होने के बावजूद अधिकारी बिक्री कोटे का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि पड़ोस के जिलों में चल रहे चीनी मिल हापुड़ के मिलों से कहीं अधिक भुगतान कर चुके हैं।
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दोनों चीनी मिलों के गोदामों में भंडारित चीनी-
चीनी मिली पुराना स्टॉक नया स्टॉक
सिंभावली 59000 क्विंटल 2.44 लाख क्विंटल
ब्रजनाथपुर 13733 क्विंटल 1.23 लाख क्विंटल
दोनों चीनी मिलों द्वारा वर्तमान पेराई सत्र में खरीदा गन्ना-
चीनी मिल खरीदा गन्ना
सिंभावली 44.55 लाख क्विंटल
ब्रजनाथपुर 19.75 लाख क्विंटल
जनप्रतिनिधियों के दावे भी नहीं दिला सके राहत-
तीन लोकसभा और तीन ही विधानसभा वाले हापुड़ जिले में गन्ना किसान परेशान है। गढ़, हापुड़ और धौलाना के तीनों विधायक सत्ताधारी पार्टी से हैं, फिर भी भुगतान नहीं सुधर रहा। साथ ही तीनों लोकसभा से चुने सांसद भी सत्ताधारी पार्टी हैं, उनका भी किसानों को खास लाभ नहीं मिल सका है।
दूसरे जिलों की चीनी मिलों ने किया भुगतान
हापुड़ जिले के नजदीक मेरठ में नंगलामल, मोहद्दीनपुर चीनी मिल हैं, जो किसानों का पिछले सत्र का पूरा भुगतान कर चुकी हैं। नंगलामल चीनी मिल नए सत्र में भी अधिकांश भुगतान कर चुकी है। मोदीनगर चीनी मिल भी पुराने सत्र का भुगतान कर चुकी हैं, लेकिन हापुड़ के दोनों ही चीनी मिल पिछड़ रहे हैं।
कोट -
सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल से किसानों को लगातार भुगतान कराया जा रहा है। चीनी का बिक्री कोटा भारत सरकार ही निर्धारित करती है। किसानों को जल्द से जल्द भुगतान कराने का प्रयास है। - सना आफरीन खान, जिला गन्ना अधिकारी।