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तेज बहाव में बह गया अस्थाई पुल

Thu, 03 Nov 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Thu, 03 Nov 2016 10:16 PM IST
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Strong currents swept bridge.
बह गया अस्थाई पुल - फोटो : अमर उजाला

अस्थाई पुल पानी के तेज बहाव में बहने के कारण मेरठ सेक्टर को जाने वाला रास्ता तैयार नहीं हो पा रहा है। जिला पंचायत महकमा सोती से होकर गंगा में गिर रहे पानी को रोकने के लिए जेसीबी मशीन से मिट्टी का भराव करने में जुटा हुआ है।

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पौराणिक गढ़ खादर मेले में जिस स्थान पर मेरठ सेक्टर बनाया जाना है, उसमें पहुंचने के लिए गंगा की एक छोटी जलधारा को पार करना है। इसलिए जिला पंचायत महकमा मेरठ सेक्टर में आने-जाने के लिए दो अस्थाई पुल तैयार करा रहा है।
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इनमें से एक पुल बृहस्पतिवार को तीसरी बार पानी के तेज बहाव में बह गया। इससे फिलहाल मेरठ सेक्टर में पहुंचने वाला अस्थाई रास्ता तैयार होना संभव नहीं हो पा रहा है। अस्थाई पुल तेज बहाव में बहने की खबर मिलते ही सदर सेक्टर में सड़क बनवा रहे
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जिला पंचायत जेई आदेश कुमार मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मेले में काम कर रही जेसीबी मशीन को बुलाकर गंगा में गिर रही सोती की जलधारा को मिट्टी भरवाकर रोकने की प्रक्रिया शुरू करवा दी है।

जेई ने बताया कि मिट्टी का भराव होने से सोती की जलधारा रुकने पर पानी का बहाव रुक जाएगा। दो दिनों के भीतर मेरठ सेक्टर में जाने के लिए रास्ता तैयार करवा लिया जाएगा।

गंगा मेले में पहुंचने वाले करीब दस लाख श्रद्धालु खुले में शौच के लिए मजबूर होंगे। वजह, मेले में महज 1600 शौचालयों का ही इंतजाम होगा। यह शौचालय भी अधिकारी और कर्मचारी ही प्रयोग कर सकेंगे।

ऐसे में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए चल रही तमाम कोशिशों पर पानी फिरना तय है। ऐतिहासिक गढ़ गंगा मेले की तैयारियों के लिए प्रशासन तेजी से जुटा है। गंगा तट पर करीब 10 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में लगने वाले इस मेले में पिछली बार करीब दस लाख श्रद्धालु पहुंचे थे।

खुले में शौच पर पाबंदी को लेकर गंभीरता दिखाने वाला प्रशासन मेले में इस व्यवस्था की ओर से आंखें मूंदे है। जिला पंचायत द्वारा मेला स्थल पर मात्र 1600 शौचालयों की ही व्यवस्था है। इनमें 1000 सीट वाले, 600 तख्तों वाले और 17 मोबाइल टायलेट शामिल हैं।

यह टायलेट भी केवल मुख्य मेला स्थल पर ही मौजूद रहेंगे। इनका प्रयोग अधिकारी और दूसरे कर्मचारी करेंगे। ऐसे में आम जनता के पास केवल खुले में शौच का ही विकल्प बचता है। कुल मिलाकर मेले के दौरान नमामि गंगा प्रोजेक्ट की खुलकर धज्जियां उड़ाई जाएंगी।

इस संबंध में सीडीओ कुणाल सिल्कू ने कहा कि जिले में मौजूद संसाधनों के अलावा गाजियाबाद व कुछ संस्थाओं से भी टायलेट मांगे गए हैं। जितना अधिक से अधिक हो सकेगा, उतने टायलेट गंगा मेले में लगाए जाएंगे।

आईजी अजय आनंद ने मेले में दौड़ के नाम पर पशुओं के साथ क्रूरता किए जाने की घटना को बेहद संगीन माना है। उन्होंने मेला ड्यूटी में आने वाली पुलिस को कड़ी हिदायत दी है कि पशुओं की दौड़ पर सख्ती के साथ रोक लगाई जाए।


साथ ही जो लोग दौड़ के नाम पर हजारों-लाखों की शर्त लगाकर पशुओं पर जुल्म ज्यादती कर रहे हैं, उन्हें संपर्क रास्तों पर रंगे हाथों दबोचा जाए। इनके खिलाफ केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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