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Hapur News: सूखी सरिता देखकर, आए बदरा याद...
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काव्य गोष्ठी के कार्यक्रम में सम्मानित हुए कवि। स्रोत संस्था
हापुड़। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में श्रीनगर स्थित लक्ष्मी नर्सरी में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने विभिन्न रस से ओतप्रोत कविताएं पढ़कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में कवि प्रेम निर्मल ने वर्तमान हालात पर तंज कसते हुए पढ़ा महंगाई डायन हुई, रोज-रोज विकराल। प्रभुवर अपने हैं कहां, जीना हुआ मुहाल। कवयित्री सुनीता स्वामी ने पढ़ा हां मैं थोड़ी अजीब सी हूं पर प्यार सभी से करती हूं, मेरे दिल में किसी के लिए नफरत नहीं है मैं सबके लिए अच्छा ही सोचती हूं।
वरिष्ठ कवि डॉ.अनिल बाजपेयी ने पढ़ा सूखी सरिता देखकर, आए बदरा याद, मां धरती जल्दी करो, मेघों से संवाद। गीतकार महावीर वर्मा ने भीषण गर्मी की स्थिति का चित्रण करते हुए पढ़ा सूरज चच्चा आजकल हुए क्रोध से लाल, हर प्राणी का हो गया हाल यहां बेहाल। कवि मोहनलाल तेजियान ने सामाजिक विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए पढ़ा भारत माता रो रही, रोते हैं हालात, देश धरम न देखते, देखे कुल औ जात।
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पं. शिवप्रकाश शर्मा ने मां के वियोग की मार्मिक अभिव्यक्ति करते हुए पढ़ा मां ही चली गईं तो फिर रह ही क्या गया, किसी को क्या पता कि हम क्या गंवाए बैठे हैं। शायरा शहवार नावेद ने संघर्ष और लक्ष्य की साधना पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा मैं अकेला ढूंढ़ने को लक्ष्य जब भी बढ़ चला, आ गए सब संग मेरे, सत्य फिर बढ़ता चला। मार्ग किंचित था कठिन पर, शब्द अर्थ बनता चला।
कवयित्री वर्षा जैन ने पढ़ा स्वर्ग है मां के चरणों में, इन्हें पूजिए आप, मिट जाएंगे आपके, जगभर के संताप। मुख्य अतिथि अजय बंसल ने हिंदी साहित्य और काव्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में साहित्यिक आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रेम निर्मल व अजय मंगल ने भी विचार रखे।
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कार्यक्रम में कवि प्रेम निर्मल ने वर्तमान हालात पर तंज कसते हुए पढ़ा महंगाई डायन हुई, रोज-रोज विकराल। प्रभुवर अपने हैं कहां, जीना हुआ मुहाल। कवयित्री सुनीता स्वामी ने पढ़ा हां मैं थोड़ी अजीब सी हूं पर प्यार सभी से करती हूं, मेरे दिल में किसी के लिए नफरत नहीं है मैं सबके लिए अच्छा ही सोचती हूं।
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वरिष्ठ कवि डॉ.अनिल बाजपेयी ने पढ़ा सूखी सरिता देखकर, आए बदरा याद, मां धरती जल्दी करो, मेघों से संवाद। गीतकार महावीर वर्मा ने भीषण गर्मी की स्थिति का चित्रण करते हुए पढ़ा सूरज चच्चा आजकल हुए क्रोध से लाल, हर प्राणी का हो गया हाल यहां बेहाल। कवि मोहनलाल तेजियान ने सामाजिक विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए पढ़ा भारत माता रो रही, रोते हैं हालात, देश धरम न देखते, देखे कुल औ जात।
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पं. शिवप्रकाश शर्मा ने मां के वियोग की मार्मिक अभिव्यक्ति करते हुए पढ़ा मां ही चली गईं तो फिर रह ही क्या गया, किसी को क्या पता कि हम क्या गंवाए बैठे हैं। शायरा शहवार नावेद ने संघर्ष और लक्ष्य की साधना पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा मैं अकेला ढूंढ़ने को लक्ष्य जब भी बढ़ चला, आ गए सब संग मेरे, सत्य फिर बढ़ता चला। मार्ग किंचित था कठिन पर, शब्द अर्थ बनता चला।
कवयित्री वर्षा जैन ने पढ़ा स्वर्ग है मां के चरणों में, इन्हें पूजिए आप, मिट जाएंगे आपके, जगभर के संताप। मुख्य अतिथि अजय बंसल ने हिंदी साहित्य और काव्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में साहित्यिक आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रेम निर्मल व अजय मंगल ने भी विचार रखे।