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Hapur News: चमन सिंह और सतपाल ने कारगिल युद्ध में बढ़ाया था जिले का मान
Tue, 25 Jul 2023 10:00 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 25 Jul 2023 10:00 PM IST
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हापुड़। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के अदम्य शौर्य के हापुड़ के दो जवान भी गवाह बने थे। दोनों शूरवीरों ने भी अपना लहू व बलिदान देकर जिले का देश में मान बढ़ाया। हापुड़ के गांव उदयपुर के लायंस नायक शहीद चमन सिंह और लुहारी गांव के सतपाल सिंह की शहादत लोगों को आज भी जुबानी याद है। उन्होंने जंग में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे।
कारगिल में उदयपुर गांव के लायंस नायक चमन सिंह ने राजपुताना राइफल्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तोलोलिंग चोटी पर कब्जा करने के लिए पांच जवानों के साथ चमन सिंह ऊपर चढ़े थे। ऊपर पहुंचकर उन्होंंने कई दुश्मनों को ढेर कर दिया और खुद भी शहीद हो गए। 13 जून 1999 को उन्हें वीरगति प्राप्त हुई। 1984 में उन्हें सेना में भर्ती किया गया था।
करीब चार दिन बाद शहीद चमन सिंह का पार्थिव शरीर जब गांव उदयपुर जाने के लिए शहर में पहुंचा था तो हजारों की संख्या में शहरवासियों ने नम आंखों के बीच इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी थी। चमन सिंह अमर रहे, भारत माता की जय के नारों से हापुड़ गूंज गया था। चमन सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचा था तो उनके पिता दलपत सिंह ने पुत्र का स्वागत करते हुए उसकी वीरता पर गर्व किया था।
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फिलहाल नोएडा में रहता है शहीद का परिवार -
शहीद की पत्नी शकुंतला देवी फिलहाल अपने दो पुत्रों कपिल और गौरव के साथ नोएडा में रहती हैं। सरकार द्वारा दी गई आर्थिक मदद और पेट्रोल पंप मिलने के बाद उन्होंने बच्चों के पालन पोषण के लिए नोएडा रहना शुरू कर दिया। जबकि शहीद के माता पिता का भी देहांत हो चुका है। अब गांव में उनका मकान खंडहर में तब्दील हो चुका है। हालांकि गांव में शहीद की प्रतिमा और समाधि मौजूद है। उनके भाई गिरीराज परिवार के साथ यहां रहते हैं।
कारगिल शहीद सतपाल की शहादत पर ग्रामीणों को गर्व
गढ़ क्षेत्र के गांव लुहारी निवासी सतपाल सिंह भारतीय सेना में लांस नायक के पद पर कार्यरत थे। जो कारगिल युद्ध में दुश्मन फौज से युद्ध के दौरान 28 जून 1999 शहीद हो गए थे। परिजनों और ग्रामीणों द्वारा गांव में शहीद की स्मृति उनका स्मारक बनाया गया है। जिस पर प्रतिवर्ष शहादत दिवस पर हवन-पूजन किया जाता है। वहीं शासन ने भी शहीद के परिजनों व गांव को दी जाने वाली सुविधाओं की घोषणाओं पर अमल किया है। ग्रामीणों व परिजनों को शहीद सतपाल की शहादत पर गर्व है, शहीद का बेटा और बेटी भी भारतीय सेना ज्वाइन कर पिता के सपने को पूरा करना चाहते हैं।
केवल 32 वर्ष की उम्र में ही कारगिल युद्ध के दौरान सतपाल सिंह ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी थी। सतपाल का जन्म गांव लुहारी में ही 17 जनवरी 1967 को हुआ था। गांव में पुश्तैनी मकान और करीब 17 बीघा कृषि भूमि स्थित है। वर्तमान में शहीद के परिजन मेरठ में रहते हैं। गांव में पुश्तैनी मकान के सामने ही स्मारक स्थल बना हुआ है। भाकियू नेता दिनेश शर्मा ने बताया कि सतपाल की शहादत ने देश में गांव व क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।
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कारगिल में उदयपुर गांव के लायंस नायक चमन सिंह ने राजपुताना राइफल्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तोलोलिंग चोटी पर कब्जा करने के लिए पांच जवानों के साथ चमन सिंह ऊपर चढ़े थे। ऊपर पहुंचकर उन्होंंने कई दुश्मनों को ढेर कर दिया और खुद भी शहीद हो गए। 13 जून 1999 को उन्हें वीरगति प्राप्त हुई। 1984 में उन्हें सेना में भर्ती किया गया था।
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करीब चार दिन बाद शहीद चमन सिंह का पार्थिव शरीर जब गांव उदयपुर जाने के लिए शहर में पहुंचा था तो हजारों की संख्या में शहरवासियों ने नम आंखों के बीच इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी थी। चमन सिंह अमर रहे, भारत माता की जय के नारों से हापुड़ गूंज गया था। चमन सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचा था तो उनके पिता दलपत सिंह ने पुत्र का स्वागत करते हुए उसकी वीरता पर गर्व किया था।
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फिलहाल नोएडा में रहता है शहीद का परिवार -
शहीद की पत्नी शकुंतला देवी फिलहाल अपने दो पुत्रों कपिल और गौरव के साथ नोएडा में रहती हैं। सरकार द्वारा दी गई आर्थिक मदद और पेट्रोल पंप मिलने के बाद उन्होंने बच्चों के पालन पोषण के लिए नोएडा रहना शुरू कर दिया। जबकि शहीद के माता पिता का भी देहांत हो चुका है। अब गांव में उनका मकान खंडहर में तब्दील हो चुका है। हालांकि गांव में शहीद की प्रतिमा और समाधि मौजूद है। उनके भाई गिरीराज परिवार के साथ यहां रहते हैं।
कारगिल शहीद सतपाल की शहादत पर ग्रामीणों को गर्व
गढ़ क्षेत्र के गांव लुहारी निवासी सतपाल सिंह भारतीय सेना में लांस नायक के पद पर कार्यरत थे। जो कारगिल युद्ध में दुश्मन फौज से युद्ध के दौरान 28 जून 1999 शहीद हो गए थे। परिजनों और ग्रामीणों द्वारा गांव में शहीद की स्मृति उनका स्मारक बनाया गया है। जिस पर प्रतिवर्ष शहादत दिवस पर हवन-पूजन किया जाता है। वहीं शासन ने भी शहीद के परिजनों व गांव को दी जाने वाली सुविधाओं की घोषणाओं पर अमल किया है। ग्रामीणों व परिजनों को शहीद सतपाल की शहादत पर गर्व है, शहीद का बेटा और बेटी भी भारतीय सेना ज्वाइन कर पिता के सपने को पूरा करना चाहते हैं।
केवल 32 वर्ष की उम्र में ही कारगिल युद्ध के दौरान सतपाल सिंह ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी थी। सतपाल का जन्म गांव लुहारी में ही 17 जनवरी 1967 को हुआ था। गांव में पुश्तैनी मकान और करीब 17 बीघा कृषि भूमि स्थित है। वर्तमान में शहीद के परिजन मेरठ में रहते हैं। गांव में पुश्तैनी मकान के सामने ही स्मारक स्थल बना हुआ है। भाकियू नेता दिनेश शर्मा ने बताया कि सतपाल की शहादत ने देश में गांव व क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।