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... तो यह है सर्वशिक्षा के अभियान की हकीकत
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Fri, 19 May 2017 09:45 PM IST
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सर्वशिक्षा अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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शासन ने शिक्षा अधिकार अधिनियम को मंजूरी दी हुई है। इसके तहत 6 से 14 साल तक की आयु वाले सभी बच्चों का स्कूल में रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें शिक्षा देना जरूरी किया हुआ है। इसके बाद भी कैसी पढ़ाई,
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कहां स्कूल और कौन अध्यापक इससे कई मासूमों को कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें सुबह होते ही चंद पैसे कमाने के लालच में जान जोखिम में डालकर हाईवे पर वाहनों में चढ़ उतरकर खाने पीने की चीजें बेचनी पड़ती हैं।
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समय-12 बजे, स्याना चौपला
यहां खड़ा दस वर्षीय बच्चा अपने हाथ में टोकरी लिए हुए था। वह हाईवे से होकर गढ़ की तरफ जा रही कार में सवार परिवार को चिलचिलाती धूप और वाहनों की कतारों के बीच दाल बेच रहा था। बच्चे का कहना था कि पढ़ाई से पहले तो परिवार के खर्च में हाथ बंटाना जरूरी है।
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सीन-2 समय-12.50 बजे, हाईवे
फर्राटा भर रही बस के साथ दौड़ रहा दस साल का बच्चा मौका मिलते ही खिड़की पकड़कर उसमें चढ़कर नारियल बेचने गया। बच्चे को दौड़ लगाता देख अनहोनी की आशंका में यात्री भी सहम गए थे।
बच्चे का कहना था कि किराए के मकान में परिवार रहता है और गुजर बसर का भी कोई साधन नहीं है। इसलिए कैसी पढ़ाई, कहां स्कूल और कौन अध्यापक उसे कुछ पता नहीं है।
सीन-3 समय-2.30 बजे, स्याना रोड
रेलवे फाटक पर 8 वर्षीय बच्चा अपने हाथ में भुट्टे लेकर खड़ा था। वह हाईवे पर बस आती देख एक हाथ से खिड़की पकड़कर उसमें चढ़ गया और गिरने से बाल बाल बचा। बच्चे का कहना था कि बीमार मां-बाप के इलाज के लिए यह सब कुछ कर रहा है।
एसडीएम आरएन पांडेय का कहना है कि समाजसेवी संगठनों समेत गणमान्य लोगों की मदद लेकर शिक्षा से वंचित चल रहे बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलवाने की मुहिम चलाई जाएगी।