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चिकनगुनिया का हाल, अफसरों-चिकित्सकों के बीच मरीज बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Mon, 12 Sep 2016 08:09 PM IST
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फैल रहा चिकनगुनिया
- फोटो : अमर उजाला
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एक ओर जहां निजी अस्पतालों में लोगों को चिकनगुनिया बुखार बताकर महंगा उपचार किया जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य अफसर जिले में इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। अफसरों का मानना है कि चिकनगुनिया का डर दिखाकर लोगों को बेवजह महंगा उपचार दिया जा रहा है।
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यदि चिकनगुनिया है तो चिकित्सक टेस्ट रिपोर्ट सौंपे। वहीं, चिकित्सक स्वास्थ्य अफसरों के डर से रिपोर्ट नहीं देने की बात कहकर चिकनगुनिया फैलने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में मरीज बेहाल हैं। निजी अस्पतालों में उनसे उपचार के नाम पर मोटी वसूली की जा रही है।
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पिछले साल सरकारी रिपोर्ट में 300 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की गई थी। इस वर्ष डेंगू के मरीजों की संख्या तो कम है, लेकिन चिकुनगुनिया मरीजों की कमर तोड़ रहा है। जोड़ों में असहनीय दर्द से मरीज कराह रहे हैं। हालांकि निजी चिकित्सक उनको जांच रिपोर्ट नहीं सौंप रहे हैं।
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कई चिकित्सक तो जांच कराए बगैर ही संदेह के आधार पर चिकनगुनिया का इलाज कर रहे हैं। इसके बदले में उपचार के नाम पर मनमानी वसूली हो रही है। स्वास्थ्य अफसरों ने डेंगू, चिकनगुनिया की रिपोर्ट सरकारी लैब में पुष्टि न होने तक सार्वजनिक न करने की चेतावनी दी हुई है।
ऐसे में यदि मरीज की निजी लैब पर कोई जांच हो भी रही है तो चिकित्सक उसे सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। सोमवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था के नगर अध्यक्ष तगासराय निवासी मुकेश त्यागी व रजनी त्यागी में चिकुन गुनिया की पुष्टि निजी अस्पताल में की गई, लेकिन रिपोर्ट नहीं दी।
लोगों में चिकनगुनिया का डर फैल रहा है, चिकित्सक इसका ही फायदा उठा रहे हैं। मरीज बुखार के दौरान जोड़ों में असहनीय दर्द से कराह रहे हैं। चिकित्सकों की माने तो जोड़ों में असहनीय दर्द चिकनगुनिया के कारण हो रहा है।
चिकित्सक चिकुनगुनिया को दबी जुबान केवल मरीज और परिजनों के सामने ही स्वीकार रहे हैं। स्वास्थ्य अफसरों का दावा है कि चिकनगुनिया के नाम पर लोगों की जेब ढीली की जा रही है। बुखार वायरल है, इसको ठीक होने में एक सप्ताह लगता है।
लोगों को सरकारी अस्पताल में टेस्ट कराकर अपनी बीमारी की जांच करा लेनी चाहिए। वहीं निजी चिकित्सक स्वास्थ्य अफसरों के डर से रिपोर्ट सार्वजनिक न करने का दावा कर रहे हैं।
सीएमओ डा.एके सिंह का कहना है कि जिले में फिलहाल वायरल सक्रिय है। चिकनगुनिया का अभी कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। कुछ सैंपल मेरठ मेडिकल में जांच के लिए भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीवी सिंह के अनुसार स्वास्थ्य विभाग और लैब रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मरीजों को वायरल और मलेरिया है। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, बेचैनी और उल्टी आने की शिकायत होती है।
ऐसे में मरीजों को घर पर केवल पैरासीटामोल दें और भरपूर लिक्विड डाइट दें। दर्द निवारक , एस्प्रिन और एंटीबायोटिक्स का प्रयोग भूलकर भी न करें। अपने चिकित्सक से सलाह लें। डेंगू या चिकनगुनिया बताने पर लैब की टेस्ट रिपोर्ट जरूर ले लें। चिकनगुनिया जानलेवा नहीं है।
इसमें जोड़ों में ज्यादा दर्द होता है। इसको ठीक होंने में एक महीने तक का समय लग सकता है। बुखार के बाद एलर्जी से शरीर में खाज होने और चिकनपाक्स के मामले भी सामने आ रहे हैं। यह सामान्य है, घबराने की बजाय अपने फैमिली चिकित्सक से संपर्क करें।