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Hapur News: नलकूप बिल घोटाले में अग्रिम विवेचना के आदेश
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हापुड़। ऊर्जा निगम में नलकूप बिल घोटाले मामले में ईओडब्लू मेरठ ने अपनी अंतिम रिपोर्ट लगाकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हापुड़ के न्यायालय में पेश की। इसके विरुद्ध वादी केके अग्रवाल ने न्यायालय में अपनी आपत्ति दाखिल की, जिससे न्यायालय ने संतुष्ट होकर 2 फरवरी 2026 को अग्रिम विवेचना किए जाने के आदेश किए हैं।
विद्युत वितरण खंड हापुड़ में किसानों के निजी नलकूप के जमा बिलों में वर्ष-2004 से 2008 के बीच बिजली विभाग के अधिकारियों ने साठ-गांठ कर घोटाला कर लिया था। उस समय यह घोटाला करीब 225 करोड़ का बताया गया था, जो लगातार चक्रवर्ती ब्याज के साथ हर तीन साल में दोगुना हो रहा हैं।
अब घोटाला करीब 1200 करोड़ के आसपास है। उक्त घोटाले में वर्ष-2007 में विभाग के 12 अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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इसमें वर्ष-2012 में तत्कालीन अधिशासी अभियंता वीके जैन, तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजस्व आरके सिंह, निजि नलकूप बिल लिपिक देवेंद्र शर्मा के खिलाफ चार्जशीट आ गई थी। जबकि बाकी नौ अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी जांच आर्थिक अनुसंधान मेरठ (ईओडब्लू) में ट्रांसफर करा ली थी, इसमें तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी त्रिभवन कुमार गोयल, पूर्व डायरेक्टर कमर्शियल मेरठ एवं दक्षिणांचल के प्रबंध निदेशक सत्यवीर सिंह राठौर, अधिशासी अभियंता सुनील कपूर, प्रकाश नारायण, सुभाषचंद माथुर समेत नौ अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे।
ईओडब्लू ने सभी नौ अभियुक्तों की 11 जून 2022 में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश कर दी। इसके विरुद्ध वादी मुकदमा केके अग्रवाल ने न्यायालय में अपनी आपत्ति दाखिल की, जिससे न्यायालय ने संतुष्ट होकर 2 फरवरी 2026 को अग्रिम विवेचना किए जाने के आदेश किए है।
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विद्युत वितरण खंड हापुड़ में किसानों के निजी नलकूप के जमा बिलों में वर्ष-2004 से 2008 के बीच बिजली विभाग के अधिकारियों ने साठ-गांठ कर घोटाला कर लिया था। उस समय यह घोटाला करीब 225 करोड़ का बताया गया था, जो लगातार चक्रवर्ती ब्याज के साथ हर तीन साल में दोगुना हो रहा हैं।
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अब घोटाला करीब 1200 करोड़ के आसपास है। उक्त घोटाले में वर्ष-2007 में विभाग के 12 अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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इसमें वर्ष-2012 में तत्कालीन अधिशासी अभियंता वीके जैन, तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजस्व आरके सिंह, निजि नलकूप बिल लिपिक देवेंद्र शर्मा के खिलाफ चार्जशीट आ गई थी। जबकि बाकी नौ अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी जांच आर्थिक अनुसंधान मेरठ (ईओडब्लू) में ट्रांसफर करा ली थी, इसमें तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी त्रिभवन कुमार गोयल, पूर्व डायरेक्टर कमर्शियल मेरठ एवं दक्षिणांचल के प्रबंध निदेशक सत्यवीर सिंह राठौर, अधिशासी अभियंता सुनील कपूर, प्रकाश नारायण, सुभाषचंद माथुर समेत नौ अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे।
ईओडब्लू ने सभी नौ अभियुक्तों की 11 जून 2022 में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश कर दी। इसके विरुद्ध वादी मुकदमा केके अग्रवाल ने न्यायालय में अपनी आपत्ति दाखिल की, जिससे न्यायालय ने संतुष्ट होकर 2 फरवरी 2026 को अग्रिम विवेचना किए जाने के आदेश किए है।