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Hapur News: हापुड़ के अस्पतालों में न वेंटिलेटर न विशेषज्ञ चिकित्सक

Wed, 03 Jul 2024 09:23 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Wed, 03 Jul 2024 09:23 PM IST
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neither ventilator or doctors in hospitals
हापुड़। हाथरस जैसे हादसे ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। भगवान न करें लेकिन यदि ऐसा हादसा हापुड़ में हुआ तो यहां के सरकारी अस्पतालों में इससे निपटने के इंतजाम नहीं हैं। अस्पतालों में न ते विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न स्टाफ, आपात वार्डों में वेंटिलेटर तक की व्यवस्था नहीं हैं। वहीं, आक्सीजन प्लांट भी बंद रहते हैं।
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हापुड़ में जिला अस्पताल के अलावा आठ सीएचसी हैं। जिले में हाथरस जैसा कोई हादसा होता है तो यहां के आपात वार्ड ऐसी किसी भी घटना के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। जिले के अस्पताल अभी भी सुविधाओं के साथ स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। जिला बनने के 13 साल बाद जाकर ट्रामा सेंटर चलने के आसार दिखाई दिए हैं। इस माह सिखैड़ा में ट्रामा सेंटर की शुरूआत होने के बाद कुछ राहत जरूर मिल सकेगी।
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जिले में सर्जन नहीं, केवल एक हड्डी रोड विशेषज्ञ

जिले में छह सर्जन की आवश्यकता है, लेकिन फिलहाल जिले में एक भी सर्जन नहीं है। जिले में तैनात एक मात्र सर्जन का हाल ही में दूसरे जिले के लिए स्थानांतरण हो चुका है। गढ़ रोड सीएचसी पर तैनात एक मात्र हड्डी रोड विशेषज्ञ का स्थानांतरण ट्रामा सेंटर के लिए किया गया है। ऐसे में जिला अस्पताल समेत जिले की सभी आठ सीएचसी पर एक भी हड्डी रोड विशेषज्ञ तैनात नहीं है।
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इमरजेंसी में न वेंटिलेटर और न ऑक्सीजन की सुविधा

जिले के आपात वार्डों की बात करें तो यहां एक भी वेंटिलेटर चालू नहीं है। जबकि करीब 20 वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ऑक्सीजन की लाइन ही नहीं है। ऐसे में यहां भर्ती होने वाले गंभीर रोगियों का इलाज संभव नहीं है। जिला अस्पताल की लिफ्ट भी बंद है। इसके साथ हापुड़ समेत अधिकतर सीएचसी के ऑक्सीजन प्लांट भी बंद रहते हैं। इमरजेंसी में ये कितने कारगर होंगे, यह कहा नहीं जा सकता। ऐसे में गंभीर रोगियों को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है।



बच्चों की नर्सरी में भी नहीं सुविधा -

जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। जिले की बच्चा नर्सरियों में भी सुविधाएं नहीं हैं। जिला अस्पताल की नर्सरी राज्यपाल के उद्घाटन के बाद से ही बंद पड़ी है। ऐसे में बच्चों के घायल के होने की स्थिति में उन्हें रेफर ही किया जाएगा।


कोट -

जिले के अस्पतालों की इमरजेंसी वार्ड में उपचार की व्यापक व्यवस्था है, जो भी कमियां रह गई हैं, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर की कुछ दिनों में शुरूआत हो जाएगी। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. सुनील त्यागी, सीएमओ।





जिले में तैनात चिकित्सकों की स्थिति --

विशेषज्ञ चिकित्सक पद कार्यरत

सर्जन 6 0

हड्डी रोग 3 1

फिजीशियन 6 1

प्रसूता एवं स्त्री रोग 8 1

रेडियोलॉजिस्ट 6 2

बाल रोग 4 3

एनीस्थिसिया 6 3

---------

अन्य स्टाफ की स्थिति --

पोस्ट पद कार्यरत

नर्सिंग स्टाफ 20 12

चीफ फार्मासिस्ट 5 3

फार्मासिस्ट 40 31

लैब टेक्नीशियन 7 2

लैब असिस्टेंट 16 7

एलएचबी 35 0

बेसिक हेल्थ वर्कर्स 264 52
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