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खाते में पैसा होने पर भी खा रहे धक्के

Thu, 08 Dec 2016 09:30 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़ Updated Thu, 08 Dec 2016 09:30 PM IST
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money in account can not find cash.
चस्पा हुआ कैश खत्म का नोटिस - फोटो : अमर उजाला

नोटबंदी के एक महीने बाद भी बैंकों में कैश की किल्लत खत्म होेने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि खातों में रुपये होने के बावजूद भी लोगों को कैश निकालने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।

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नगर क्षेत्र में मुख्य बैंकों की शाखाओं पर ग्राहकों को निर्भर रहना पड़ रहा है। छोटी शाखाओं पर काफी कम कैश पहुंच रहा है, जो एक घंटे में ही खत्म हो जाता है। बृहस्पतिवार को भी कैश नहीं मिलने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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वहीं, शहर के अधिकांश एटीएम भी शोपीस बने रहे। बैंकों में कैश की किल्लत लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। कड़ाके की सर्दी में बृहस्पतिवार को दिन निकलते ही लोग बैंकों पर उमड़ने शुरू हो गए।
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बैंक खुलने के एक घंटे बाद ही अधिकांश स्थानों पर कैश खत्म होने के नोटिस चस्पा कर दिए गए। वहीं, मुख्य शाखाओं पर ग्राहकों की भारी भीड़ रही। कैश की कमी के चलते बैंक के बाहर अधिकतम पांच हजार रुपये तक देने का नोटिस चस्पा कर दिया गया था।

उधर, शहर भर के अधिकांश एटीएम भी शोपीस बने रहे, ग्राहकों को पैसों की निकासी के लिए एटीएम के बाहर लंबी कतारों में लगकर परेशान होना पड़ा।

एलडीएम एपी चतुर्वेदी का कहना है कि बृहस्पतिवार को अधिकांश बैंकों में कैश पहुंचाया गया था। ग्राहकों को जरूरत के अनुसार कैश मिल रहा है। जल्द ही इस समस्या से राहत दिला दी जाएगी।

गांधीगंज स्थित एसबीआई के प्रबंधक ने नोटबंदी के बाद से एक बार अपने खाते में पैसा जमा कर चुके ग्राहकों को 30 दिसंबर तक पुरानी करेंसी के नोटों को जमा न करने देने का फरमान जारी किया है।

इससे ग्राहकों में हड़कंप मच गया। प्रबंधक, एजीएम के आदेश पर इस तरह की कार्रवाई होना बता रहे हैं। जबकि, एजीएम ने इस तरह का कोई आदेश न होने की बात कही है। गांधीगंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक ने 500 और 1000 के नोटों को

जमा करने आ रहे ग्राहकों को टरकाना शुरू कर दिया है। प्रबंधक ने बैंक में फरमान जारी किया है कि जो ग्राहक आठ नवंबर के बाद एक बार अपने खाते में पैसा डाल चुका है। वह 30 दिसंबर तक पुरानी करेंसी का कोई नोट अपने खाते में नहीं डाल सकता है।

जबकि, आरबीआई का ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ है। ग्राहकों ने जब जीओ देखना चाहा तो प्रबंधक ने एजीएम के आदेश पर यह फरमान लागू होना बताया। हालांकि, इस संबंध में एजीएम ने कोई जीओ लागू करने से इंकार किया है।

ग्राहक दिनेश त्यागी, सतेंद्र गुप्ता, मुकेश त्यागी ने बताया कि नोटबंदी के बाद वह दूसरी बार पुरानी करेंसी के नोट अपने खाते में जमा करने पहुंचे। लेकिन प्रबंधक ने पैसे जमा नहीं करने दिए। 30 दिसंबर के बाद आने के लिए बोला है।

वहीं, प्रबंधक सुनील कुमार का कहना है कि मौखिक रूप से एजीएम ने निरीक्षण के दौरान यह बात कही थी। इसलिए वह एक बार खाते में पैसा जमा कर चुके ग्राहकों के पैसे जमा नहीं करा रहे हैं।

एजीएम मोहम्मद आरिफ खान का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई जीओ लागू नहीं किया है। ग्राहक 30 दिसंबर तक पुरानी करेंसी के नोट अपने खाते में जमा कर सकते हैं।  

नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिल रहा है। यह एक अच्छा विकल्प है, लेकिन कैशलेस ट्रांजेक्शन के दौरान साइबर अटैक का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में ऑनलाइन शापिंग करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान देना जरूरी है।

अभी तक इंटरनेट, एटीएम और डेबिट कार्ड से दूरी बनाकर रखने वाले लोगों के लिए यह इतना आसान नहीं होगा। ऐसे लोगों के खातों पर साइबर अटैक का खतरा मंडरा रहा है। साइबर क्राइम सेल में भी ऐसे मामले आने शुरू हो गए हैं।

कैशलेस सिस्टम को अपनाने से पहले सतर्कता बहुत जरूरी है। साइबर एक्सपर्ट योगेश शर्मा बताते हैं कि कैशलेस होने से कुछ मुश्किलें बढ़ेंगी। लोग लेन-देन का तरीका बदलेंगे तो क्राइम का तरीका भी बदलेगा।

मोबाइल से ई-पेमेंट करते समय ध्यान रखा जाए कि अपना मोबाइल किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में न दें। एटीएम और डेबिट कार्ड स्वैप करते समय यह देख लें कि मशीन में कोई अलग से उपकरण तो नहीं लगा है।

साइबर क्रिमनल इस स्थान पर स्कीमर लगाकर लगाकर डाटा चोरी कर लेते हैं। कार्ड किसी के हाथ में न दें। मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड का प्रयोग न करें। चिप वाला कार्ड अधिक सुरक्षित है।

नोटबंदी के बाद से बंद चल रहीं सुनारों की दुकानें फिर से खुल गई हैं, सराफा कारोबारियों ने स्वैप मशीन से पेमेंट लेना शुरू कर दिया है। बता दें कि नोटबंदी के बाद से सभी अन्य व्यापार की तरह ही सराफा कारोबार भी पटरी से उतरा हुआ था।

जेवरात खरीदने वाले ग्राहक चलन से बाहर हुए हजार और पांच सौ के नोट लेकर पहुंच रहे थे। जिससे बचने के लिए सराफा करोबारियों ने दुकानें बंद की हुई थीं। बृहस्पतिवार को एसबीआई ने सुनारों के साथ ही ग्राहकों की दिक्कत दूर करते हुए


सिंभावली के बाजार में सरफा कारोबारियों समेत रेडीमेड कपड़े और परचून बेचने वालें 15 दुकानदारों को स्वैप मशीन मुहैया कराई है। जिसके बाद सराफा कारोबारियों ने दुकानें खोल ली हैं। सराफा कारोबारी अब स्वैप मशीन के माध्यम से पेमेंट ले रहे हैं।

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