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लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Tue, 14 Jun 2016 08:37 PM IST
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ब्रजघाट पर उमड़े कई प्रांतों के श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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ज्येष्ठ गंगा दशहरा पर्व पर मंगलवार को कई प्रांतों से आए अनुमानित दस लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कच्चे घाट और ब्रजघाट गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। बाद में गंगा तट पर पूजा अर्चना कर परिवार की समृद्धि की कामना की।
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खास बात यह रही कि चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी भी गंगा भक्तों की राह में रोड़ा नहीं बन पाई। रात में आई आंधी और बारिश भी श्रद्धालुओं के सैलाब को नहीं रोक पाई।
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सोमवार की शाम से ही यहां दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों के श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मध्य रात्रि तक यहां गंगा स्नान कर पुण्य के भागीदार बनने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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गंगा की ओर जाने वाले हर रास्ते पर श्रद्धालुओं का रेला दिखाई दे रहा था। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए लोगों में होड़ मची रही। इसके चलते भारी संख्या में लोगों ने गंगा के किनारे रात से ही डेरा डाल रखा था।
ब्रह्म मुहूर्त में शुभ मुहूर्त लगते ही भोर में 5:30 बजते ही ‘हर-हर गंगे’ उद्घोष से समूचा क्षेत्र गूंज उठा। गंगा मैय्या के जयकारे के साथ दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई।
मोक्ष दायिनी में आस्था की डुबकी लगाने का सिलसिला मंगलवार को सूर्यास्त होने तक चलता रहा। जबकि बुधवार को भी सूर्योदय के बाद बड़ी संख्या में लोग गंगा में डुबकी लगाएंगे।
गंगा में डुबकी लगाने के बाद अधिकांश श्रद्धालुओं ने घाट के किनारे बैठे कर्मकांडी पंडितों से भगवान सत्यनारायण की कथा सुन मंदिरों में जाकर अपने ईष्ट देव की पूजा अर्चना की। नव विवाहित जोड़ों ने गंगा किनारे आराधना कर संतान प्राप्ति की कामना की।
सैकड़ों धर्मशाला, मंदिर और आश्रम परिसर फुल होने से लाखों की भीड़ को पक्का घाट, स्टेशन रोड, शिव चौक समेत इधर उधर खुले आकाश के नीचे रात बिताने को मजबूर होना पड़ा। इससे गंगा में डुबकी लगाने आने जाने के दौरान भक्तों को आवाजाही में खासी दिक्कत झेलनी पड़ीं।
सोमवार की रात में करीब साढ़े 10 बजे धूल भरी आंधी चलने के साथ ही आकाश में बादल घिर आए, जिससे करीब एक घंटा तक बूंदाबांदी होती रही। मौसम के करवट बदलने से हर किसी को उमस भरी गर्मी के प्रकोप से राहत मिली,
परंतु खुले आकाश के नीचे रात बिता रहे लाखों भक्तों को भीगते हुए इधर उधर छिपने को मजबूर होना पड़ा। इसके बाद भी उनका जोश कम नहीं हुआ।