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Hapur News: लेखपाल की मौत मामले में तहसील में धरना, प्रदर्शनकारियों ने रखी ये मांग
Fri, 28 Nov 2025 07:32 PM IST
राहुल तिवारी
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
Published by: राहुल तिवारी
Updated Fri, 28 Nov 2025 07:32 PM IST
सार
हापुड़ में लेखपाल सुधीर कुमार की मौत के मामले लेखपालों ने तहसील में धरना देकर प्रदर्शन किया। लेखपालों ने कहा कि मुख्य आरोपी संजय कुमार सक्सैना का नाम अज्ञात के स्थान पर एफआईआर में नामजद किया जाए। मृतक की माता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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तहसील में लेखपालों ने किया प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फतेहपुर जिले में लेखपाल सुधीर कुमार की मौत के मामले से नाराज जिले के लेखपालों ने शुक्रवार को तहसील में धरना देकर प्रदर्शन किया। धरने के कारण लेखपाल कार्य से विरत रहे और विभागीय कार्य नहीं किए। मामले में संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम ईला प्रकाश को सौंपा।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश व जिला मंत्री विवेक चौधरी ने कहा कि फतेहपुर में कार्यरत वर्ष 2024 बैच के लेखपाल सुधीर कुमार की शादी 26 नवंबर 2025 को नियत थी। वह छुट्टी के लिए अधिकारियों से लगातार निवेदन कर रहे थे, लेकिन तहसील अधिकारियों द्वारा एसआईआर ड्यूटी के नाम पर उन्हें छुट्टी नहीं दी। शादी की व्यस्ता के कारण बीते 22 नवंबर को सुधीर कुमार एसआईआर की बैठक में उपस्थित नहीं हुए। इस कारण ईआरओ संजय कुमार सक्सेना द्वारा उन्हें निलंबित करवा दिया गया था।
उन्होंने बताया कि 25 नवंबर की सुबह करीब 6:30 बजे डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार सक्सेना व नायब तहसीलदार के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक शिवराम, लेखपाल सुधीर कुमार के घर पहुंचे और एसआईआर का कार्य स्वयं व अन्य से कराने की बात कही। इससे परेशान सुधीर कुमार तनाव में चल रहे थे। साथ ही बर्खास्तगी की धम की सुनकर अधिक तनाव पैदा हो गया। इस पर लेखपाल ने आत्महत्या कर ली।
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इस मामले में मृतक लेखपाल की बहन द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र देने के 30 घंटे तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इस पर परिजनों से शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। 26 नवंबर को मुकदमा तो दर्ज कराया गया, लेकिन मुख्य आरोपी संजय कुमार सक्सेना का नाम शामिल न करके केवल राजस्व निरीक्षक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवा दी गई। इससे लेखपालों में आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने मांग की है कि मुख्य आरोपी संजय कुमार सक्सैना का नाम अज्ञात के स्थान पर एफआईआर में नामजद किया जाए। मृतक की माता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही तनाव को देखते हुए एसआईआर की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। लेखपालों को सामान्य, उपनिर्वाचन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अपरिभाषित डयूटी (मौखिक /लिखित) के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में एक माह के वेतन के बराबर मानदेय भुगतान किया जाए। इस दौरान आलोक यादव, गंगा प्रसाद, मनोज शर्मा, ओमप्रकाश और शांति मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश व जिला मंत्री विवेक चौधरी ने कहा कि फतेहपुर में कार्यरत वर्ष 2024 बैच के लेखपाल सुधीर कुमार की शादी 26 नवंबर 2025 को नियत थी। वह छुट्टी के लिए अधिकारियों से लगातार निवेदन कर रहे थे, लेकिन तहसील अधिकारियों द्वारा एसआईआर ड्यूटी के नाम पर उन्हें छुट्टी नहीं दी। शादी की व्यस्ता के कारण बीते 22 नवंबर को सुधीर कुमार एसआईआर की बैठक में उपस्थित नहीं हुए। इस कारण ईआरओ संजय कुमार सक्सेना द्वारा उन्हें निलंबित करवा दिया गया था।
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उन्होंने बताया कि 25 नवंबर की सुबह करीब 6:30 बजे डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार सक्सेना व नायब तहसीलदार के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक शिवराम, लेखपाल सुधीर कुमार के घर पहुंचे और एसआईआर का कार्य स्वयं व अन्य से कराने की बात कही। इससे परेशान सुधीर कुमार तनाव में चल रहे थे। साथ ही बर्खास्तगी की धम की सुनकर अधिक तनाव पैदा हो गया। इस पर लेखपाल ने आत्महत्या कर ली।
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इस मामले में मृतक लेखपाल की बहन द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र देने के 30 घंटे तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इस पर परिजनों से शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। 26 नवंबर को मुकदमा तो दर्ज कराया गया, लेकिन मुख्य आरोपी संजय कुमार सक्सेना का नाम शामिल न करके केवल राजस्व निरीक्षक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवा दी गई। इससे लेखपालों में आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने मांग की है कि मुख्य आरोपी संजय कुमार सक्सैना का नाम अज्ञात के स्थान पर एफआईआर में नामजद किया जाए। मृतक की माता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही तनाव को देखते हुए एसआईआर की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। लेखपालों को सामान्य, उपनिर्वाचन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अपरिभाषित डयूटी (मौखिक /लिखित) के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में एक माह के वेतन के बराबर मानदेय भुगतान किया जाए। इस दौरान आलोक यादव, गंगा प्रसाद, मनोज शर्मा, ओमप्रकाश और शांति मौजूद रहे।