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जागरूकता का अभाव, खुले में शौच जा रहे हजारों परिवार

Sun, 02 Oct 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Sun, 02 Oct 2016 11:11 PM IST
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Lack of awareness, thousands of families are going to open defecation
खुले में शौच - फोटो : अमर उजाला

दो साल पहले गांधी जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान की अलख जगाई थी। अगले दो वर्ष में देश को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य भी है। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर दावे भी किए जा रहे हैं लेकिन जागरूकता के अभाव में तय समय में इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है। हालांकि, कागजों में आंकड़े जरूर लक्ष्य के करीब है।

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खुले में शौच पर रोकथाम के सरकारी दावों के बीच दो साल बाद भी जिले की तस्वीर कुछ खास नहीं बदली है। जिले में मात्र चार गांव ही खुले में शौच मुक्त की दौड़ में अग्रणी हैं। दो दर्जन गांवों को अगले माह तक शौच मुक्त किए जाने के दावे जरूर किए जा हैं, लेकिन यह संभव होता नजर नहीं आ रहा है।
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आंकड़ों की नजर मेें जिले के गांवों में कुल 6900 शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य है। जिनमें से करीब 3900 शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। जबकि 3 हजार शौचालयों के लिए जल्द बजट जारी होने की बात कही जा रही है। जबकि शहरी क्षेत्र में शौचालयों के लिए कुल 1090 आदेवन हुए हैं।
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शासन ने नगर पालिका को आगामी मार्च 2017 तक इन सभी शौचालयों को पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कुल मिलाकर आंकड़ों में तस्वीर सुखद है, लेकिन हकीकत कोसो दूर है।

जिले के हजारों परिवार अभी भी खुले में शौच को मजबूर हैं। गांवों में आपसी राजनीति और भ्रष्टाचार के चलते 30 फीसदी से भी कम शौचालयों का निर्माण हो पाया है। जबकि शहर की स्थिति लगभग ऐसी ही है।

दरअसल, प्रधानों की माने तो जागरूकता की कमी के कारण सुबह के समय सैर के नाम पर अपने घरेलू शौचालय के बजाय खुले में शौच को जाते हैं और इसे सेहत के लिए लाभदायक मानते हैं।


अपने दावों के अनुसार शौचालय निर्माण में तेजी लाने के साथ साथ ऐसे लोगों में जागरूकता के बिना इस अभियान के सफल होने की संभावना नहीं है। इस संबंध में डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि शौचालय निर्माण की दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा खुले में शौच को लेकर लोगों में जागरूकता के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।

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