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स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं हैं डेंगू से निपटने के इंतजाम
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Fri, 23 Jun 2017 10:41 PM IST
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डेंगू
- फोटो : demo pic
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मौसमी बीमारियों के बाद अब डेंगू का खतरा सताने लगा है। अगर आपको डेंगू हो जाए तो आप स्वास्थ्य विभाग के भरोसे बिल्कुल नहीं रहिएगा, क्योंकि डेंगू से निपटने के लिए विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। सीएमओ अब व्यवस्था सुधरवाने के दावे कर रहे हैं।
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जिले में सपनावत, गढ़मुक्तेश्वर, धौलाना और हापुड़ समेत चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में न तो डेेंगू टेस्ट की सुविधा है और न ही अन्य सुविधाएं। प्लेटलेट्स कम होने पर इलाज की कोई सुविधा नहीं है। हालांकि इन दिनों अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट की व्यवस्था जरूर की गई है।
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इसके अलावा जांच के लिए लैब आदि की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। मरीज को बुखार की जांच के लिए सैंपल चिकित्सकों को बाहर भेजना पड़ता है। जबकि जिले में हर वर्ष अनेक लोग डेंगू की चपेट में आते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बिगड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई पहल नहीं की है।
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डेंगू फैलाने वाले मच्छर अक्सर बरसात के मौसम में सक्रिय होते हैं। इनके काटने से मरीज के शरीर में तेज दर्द, सिर दर्द व बुखार हो जाता है। जल्द इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
जिलेभर में दो वर्ष पहले डेंगू के करीब 150 मामले रिपोर्ट हुए थे। इन सभी ने शहर और अन्य जिलों के निजी नर्सिंग होम में उपचार कराया था। निजी अस्पताल में डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं। वहीं बीते वर्ष चिकनगुनिया ने कहर बरपाया था।
हापुड़ को जिला बने तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है, फिर भी यहां अब तक पुरानी स्थिति बरकरार है। लोगों को जिला स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। सीएमओ ने बीते वर्ष भी जिले में मिलने वाले डेंगू के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे किए थे, लेकिन लाख दावे करने के बाद भी वह जिले में डेंगू के टेस्ट तक की व्यवस्था नहीं करा पाए थे।
जिले में डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। अब तक सामान्य वायरल के केस सामने आ रहे हैं। जल्द ही व्यवस्थाएं ठीक कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. एके सिंह, सीएमओ