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खाद संकट: किसानों को एक एकड़ पर मिलेगा सिर्फ दो कट्टा यूरिया
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खाद संकट : किसानों को एक एकड़ पर मिलेगा सिर्फ दो कट्टा यूरिया
हापुड़। किसानों को गन्ना समिति और खाद केंद्रों से एक एकड़ जमीन पर सिर्फ दो कट्टा यूरिया, 70 किलोग्राम डीएपी और 90 किलोग्राम एनपीके मिल सकेगा। समितियों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है, इतने खाद से किसानों ने पूर्ति न होने का आरोप लगाया है। अधिकारियों ने गोदाम में सही मात्रा में यूरिया उपलब्ध होने का दावा किया है, लेकिन शासनादेश का हवाला देते हुए किसानों को इसी व्यवस्था के तहत यूरिया आवंटित करने की भी बात कही है।
जिले में 90 हजार से अधिक किसान खेतीबाड़ी करते हैं। हापुड़ गन्ना समिति से 15 हजार और सिंभावली गन्ना समिति से करीब 35 हजार किसान जुड़े हुए हैं। इन समितियों से किसानों को उधार में यूरिया मिल जाता है, जिसका पैसा किसानों के गन्ना भुगतान से कटता रहता है। इन दिनों गन्ने में खाद लगाने का पर्याप्त समय चल रहा है।
विशेषज्ञों ने खेतों प्रति एकड़ दो कट्टा यूरिया इस्तेमाल का मानक तय किया है, जबकि किसानों का कहना है कि एक एकड़ में 4 से 5 कट्टा यूरिया प्रयोग होता है। जिला कृषि विभाग की ओर से इन समितियों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। ऐसे में जिन किसानों के पास जमीन अधिक है, उन्हें भी एक बार में अधिकतम पांच कट्टे ही दिए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था से फसलों में खाद नहीं लग पा रहा है, किसान ब्याज पर पैसे लेकर बाजार का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी इस तरह की बाध्यता उन्हें परेशान कर रही है।
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अधिक खाद देते हैं तो आता है नोटिस
जिले की गन्ना समिति और केंद्र किसानों को एक एकड़ पर दो कट्टे से अधिक यूरिया देते हैं। उन्हें नोटिस जारी कर दिया जाता है। फिर किसानों से प्रमाण पत्र और स्टाक का सत्यापन लिया जाता है। इस सरदर्दी से बचने के लिए केंद्रों ने दो कट्टे ही देने की व्यवस्था शुरू की हुई है।
हर गांव के किसान प्रभावित
जिले में सबसे अधिक गन्ने की खोती होती है, सभी किसानों को खाद की जरूरत होती है। ऐसा कोई गांव नहीं है, जो इस आदेश के लागू होने से परेशान न हो। किसानों का कहना है कि पूर्व की भांति ही उन्हें यूरिया दिलाया जाए।
जिले में खाद की स्थिति-
यूरिया का स्टॉक----6500 टन
डीएपी का स्टॉक---2000 टन
(नोट : जून महीने में यूरिया की खपत एक हजार मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, यह आंकड़ा पीसीएफ के एआर विकास नेहरा ने दिया है)
कम खाद से नहीं चल रहा काम
एक एकड़ के हिसाब से दो कट्टे दिए जा रहे हैं, उनके पिता के नाम सात एकड़ से अधिक जमीन है, फिर भी पांच कट्टे दिए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था से खेती नहीं हो पा रही है। अधिकारियों को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। - रजनीश त्यागी, ग्राम प्रधान दत्तियाना।--फोटो संख्या--08
किसानों को दें भरपूर खाद
किसानों को भरपूर खाद उपलब्ध कराया जाए। दो कट्टे की बाध्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। समस्या से राहत को लेकर जिला कृषि अधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे, राहत नहीं मिलने पर आंदोलन किया जाएगा।--पवन हूण, जिलाध्यक्ष भाकियू।--फोटो संख्या--09
कोट-
जिले में 6500 टन से अधिक यूरिया उपलब्ध है, शासन ने मानक तय किया है, इसी के आधार पर किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को खाद किल्लत से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।--मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
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हापुड़। किसानों को गन्ना समिति और खाद केंद्रों से एक एकड़ जमीन पर सिर्फ दो कट्टा यूरिया, 70 किलोग्राम डीएपी और 90 किलोग्राम एनपीके मिल सकेगा। समितियों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है, इतने खाद से किसानों ने पूर्ति न होने का आरोप लगाया है। अधिकारियों ने गोदाम में सही मात्रा में यूरिया उपलब्ध होने का दावा किया है, लेकिन शासनादेश का हवाला देते हुए किसानों को इसी व्यवस्था के तहत यूरिया आवंटित करने की भी बात कही है।
जिले में 90 हजार से अधिक किसान खेतीबाड़ी करते हैं। हापुड़ गन्ना समिति से 15 हजार और सिंभावली गन्ना समिति से करीब 35 हजार किसान जुड़े हुए हैं। इन समितियों से किसानों को उधार में यूरिया मिल जाता है, जिसका पैसा किसानों के गन्ना भुगतान से कटता रहता है। इन दिनों गन्ने में खाद लगाने का पर्याप्त समय चल रहा है।
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विशेषज्ञों ने खेतों प्रति एकड़ दो कट्टा यूरिया इस्तेमाल का मानक तय किया है, जबकि किसानों का कहना है कि एक एकड़ में 4 से 5 कट्टा यूरिया प्रयोग होता है। जिला कृषि विभाग की ओर से इन समितियों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। ऐसे में जिन किसानों के पास जमीन अधिक है, उन्हें भी एक बार में अधिकतम पांच कट्टे ही दिए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था से फसलों में खाद नहीं लग पा रहा है, किसान ब्याज पर पैसे लेकर बाजार का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी इस तरह की बाध्यता उन्हें परेशान कर रही है।
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अधिक खाद देते हैं तो आता है नोटिस
जिले की गन्ना समिति और केंद्र किसानों को एक एकड़ पर दो कट्टे से अधिक यूरिया देते हैं। उन्हें नोटिस जारी कर दिया जाता है। फिर किसानों से प्रमाण पत्र और स्टाक का सत्यापन लिया जाता है। इस सरदर्दी से बचने के लिए केंद्रों ने दो कट्टे ही देने की व्यवस्था शुरू की हुई है।
हर गांव के किसान प्रभावित
जिले में सबसे अधिक गन्ने की खोती होती है, सभी किसानों को खाद की जरूरत होती है। ऐसा कोई गांव नहीं है, जो इस आदेश के लागू होने से परेशान न हो। किसानों का कहना है कि पूर्व की भांति ही उन्हें यूरिया दिलाया जाए।
जिले में खाद की स्थिति-
यूरिया का स्टॉक----6500 टन
डीएपी का स्टॉक---2000 टन
(नोट : जून महीने में यूरिया की खपत एक हजार मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, यह आंकड़ा पीसीएफ के एआर विकास नेहरा ने दिया है)
कम खाद से नहीं चल रहा काम
एक एकड़ के हिसाब से दो कट्टे दिए जा रहे हैं, उनके पिता के नाम सात एकड़ से अधिक जमीन है, फिर भी पांच कट्टे दिए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था से खेती नहीं हो पा रही है। अधिकारियों को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। - रजनीश त्यागी, ग्राम प्रधान दत्तियाना।--फोटो संख्या--08
किसानों को दें भरपूर खाद
किसानों को भरपूर खाद उपलब्ध कराया जाए। दो कट्टे की बाध्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। समस्या से राहत को लेकर जिला कृषि अधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे, राहत नहीं मिलने पर आंदोलन किया जाएगा।--पवन हूण, जिलाध्यक्ष भाकियू।--फोटो संख्या--09
कोट-
जिले में 6500 टन से अधिक यूरिया उपलब्ध है, शासन ने मानक तय किया है, इसी के आधार पर किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को खाद किल्लत से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।--मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी।