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बिल नहीं देने पर फैक्टरी में झुलसे मजदूरों का बंद किया इलाज
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बिल नहीं देने पर फैक्टरी में झुलसे मजदूरों का बंद किया इलाज
हापुड़। अवैध पटाखा फैक्टरी में धमाके से झुलसे तीन मरीज गाजियाबाद के सुशीला अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। तीमारदारों का आरोप है कि अस्पताल ने बिल जमा करने का दबाव बनाया। इनकार करने पर इलाज बंद कर दिया। करीब 17 घंटे तक उपचार नहीं दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भी ठीक से उपचार नहीं मिला तो मरीजों को गाजियाबाद के ही एमएमजी अस्पताल में रेफर कराया गया।
घटना के बाद भंडेरी गांव निवासी मुस्तकीम, अंकुर, अमित गुप्ता को गाजियाबाद के सुशीला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुस्तकीम के भाई काईया व अंकुर के पिता रमेश चंद ने बताया कि अस्पताल ने तीनों मरीजों के उपचार का 35 हजार रुपये बिल मांगा। पैसे जमा कराने को लेकर दबाव बनाया गया। पैसे देने से इनकार किया तो मरीजों को कहीं और रेफर करा लेने की धमकी दी गई। इससे परेशान परिजन धौलाना थाना पहुंचे। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को फटकार लगाई। इसके बाद भी अस्पताल ने ठीक से उपचार नहीं किया।
परिजनों ने बताया कि रविवार सुबह 5 बजे के बाद न तो कोई दवा दी गई और न ही कोई सुध ली। काफी कहने के बाद रात में 10 बजे आधा बोतल ग्लूकोज ही चढ़ाया। मरीजों की हालत को देखते हुए परिजनों ने मुस्तकीम और अंकुर को गाजियाबाद के ही एमएमजी हॉस्पिटल में रेफर करा लिया। डीएम मेधा रूपम का कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज दिलाया जा रहा है, वे खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रही हैं।
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हापुड़। अवैध पटाखा फैक्टरी में धमाके से झुलसे तीन मरीज गाजियाबाद के सुशीला अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। तीमारदारों का आरोप है कि अस्पताल ने बिल जमा करने का दबाव बनाया। इनकार करने पर इलाज बंद कर दिया। करीब 17 घंटे तक उपचार नहीं दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भी ठीक से उपचार नहीं मिला तो मरीजों को गाजियाबाद के ही एमएमजी अस्पताल में रेफर कराया गया।
घटना के बाद भंडेरी गांव निवासी मुस्तकीम, अंकुर, अमित गुप्ता को गाजियाबाद के सुशीला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुस्तकीम के भाई काईया व अंकुर के पिता रमेश चंद ने बताया कि अस्पताल ने तीनों मरीजों के उपचार का 35 हजार रुपये बिल मांगा। पैसे जमा कराने को लेकर दबाव बनाया गया। पैसे देने से इनकार किया तो मरीजों को कहीं और रेफर करा लेने की धमकी दी गई। इससे परेशान परिजन धौलाना थाना पहुंचे। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को फटकार लगाई। इसके बाद भी अस्पताल ने ठीक से उपचार नहीं किया।
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परिजनों ने बताया कि रविवार सुबह 5 बजे के बाद न तो कोई दवा दी गई और न ही कोई सुध ली। काफी कहने के बाद रात में 10 बजे आधा बोतल ग्लूकोज ही चढ़ाया। मरीजों की हालत को देखते हुए परिजनों ने मुस्तकीम और अंकुर को गाजियाबाद के ही एमएमजी हॉस्पिटल में रेफर करा लिया। डीएम मेधा रूपम का कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज दिलाया जा रहा है, वे खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रही हैं।
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