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अनुमति एक की भी नहीं, चल रहे 60 आरओ प्लांट

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 22 Mar 2022 10:57 PM IST
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hapur news
अनुमति एक की भी नहीं, जिले में चल रहे 60 आरओ प्लांट
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हापुड़। जिले में 60 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। इनके पास संचालन की कोई अनुमति भी नहीं है। इनका पानी कितना शुद्ध है इसकी भी कभी जांच नहीं हुई। खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर पालिका के अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
भूगर्भ जल दूषित होने के कारण लोग घरों में आरओ लगवा रहे हैं। वहीं दुकानों, प्रतिष्ठानों में मिनरल वाटर की डिमांड बढ़ते ही पानी का व्यापार करने वालों की संख्या बढ़ गई है। गर्मी का मौसम आने के बाद यह डिमांड और बढ़ जाती है। स्थिति यह है कि जिले के हर गली मोहल्लों में आरओ प्लांट चल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले में 60 से अधिक प्लांट लगे हुए हैं और यहां से प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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प्लांट लगवाने के पहले खाद्य सुरक्षा औषधि विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन जिले में पंजीकरण प्लांट की संख्या एक भी नहीं है और न ही किसी विभाग द्वारा पिछले कुछ वर्षों में इन आरओ प्लांट से पानी के नमूनों की जांच करने की जहमत उठाई है।
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10 से 30 रुपये में बिकता है कंटेनर
जिले की अनुमानित आबादी करीब 13.5 लाख है, जिनमें से करीब तीन लाख लोग 20 लीटर के कंटेनर या वाटर कूलर में बिकने वाला पानी खरीद कर पीते हैं। शहर में एक बोतल पानी 10 से 30 रुपये तक में बेचा जाता है। डिमांड अधिक होने के कारण बोरिंग के पानी को ट्रीट कर 20 लीटर के जार में पैक कर वॉटर सप्लाई करने का कारोबार शहर के अलग-अलग इलाकों में खूब फल-फूल रहा है। जिले में प्रतिदिन करीब तीन लाख रुपये का पानी का कारोबार का अनुमान है।
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पानी की शुद्धता की हो जांच
नियमानुसार बेचे जा रहे पानी की जांच की जानी चाहिए। लैब में पानी की शुद्धता के साथ ही इस बात की भी जांच की जाती है कि बोतल पर लगे लेबल पर पैकेजिंग डेट व एक्सपायरी डेट क्या है। ऐेसे मामलों में पानी के कुछ सैंपलों में टीडीएस की मात्रा अधिक मिलती है और कुछ में बैक्टीरिया भी मिल सकते हैं।
टीडीएस बढ़े पानी का लंबे समय तक सेवन करने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। 500 से 505 से अधिक टीडीएस का पानी लगातार पीते रहने से किडनी से संबंधित बीमारियां, खून की कमी और आंतों से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से आंतों व किडनी का कैंसर होने का भी खतरा बना रहता है। - डॉ गौरव मित्तल, फिजीशियन।
सील बंद बोतल के जारी होते हैं लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के दायरे में सील बंद पानी की बोतलों का कारोबार आता है। खुले पानी की बिक्री विभाग के दायरे में नहीं आती है। यह जिम्मेदारी नगर पालिका की है। - पवन कुमार, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।

खाने पीने की वस्तुओं की जिम्मेदारी सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की होती है। आरओ प्लांट का लाइसेंस उनके कार्य क्षेत्र में नहीं आता। आरओ प्लांट को लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की ही बनती है। - डीके सतसंगी, सहायक अभियंता जल, नगर पालिका।
लाइसेंस के संबंध में कराएंगे जानकारी
पानी के आरओ प्लांट के लाइसेंस के संबंध में जानकारी कराई जाएगी। यदि ये नियमों के विरुद्ध चल रहे हैं तो कार्रवाई होगी। - श्रद्धा शांडिल्यायन, एडीएम।
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