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पोलेंड बॉर्डर पर लात-घूंसे भी खाए, फिर भी नहीं मिली एंट्री
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सिंभावली के पीरनगर निवासी अभिषेक परिजनों के बीच मौजूद।
- फोटो : GARH
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पोलैंड बॉर्डर पर लात-घूंसे भी खाए, फिर भी नहीं मिली एंट्री
हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। यूक्रेन में फंसे जिले के पांच और छात्रों की घर वापसी हो गई है। तमाम दुश्वारियां झेलते हुए पांचों यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहां दो दिनों तक बॉर्डर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान पोलैंड की आर्मी ने उनके साथ अभद्रता भी की। उन्हें लात-घूंसे भी मारे। इसके बाद हंगरी के रास्ते आए। अभी भी जिले के छह छात्र फंसे हुए हैं। सबसे चिंताजनक हालात खारकीव में फंसे छात्रों की है।
शुक्रवार को घर लौटा पीरनगर निवासी अभिषेक मावी अभी भी सहमा हुआ है। वह यूक्रेन के लेलिव शहर में फंसा था। युद्ध छिड़ने के बाद हास्टल के साथियों के साथ पोलैंड बार्डर पर जैसे-तैसे पहुंच गया। वहां भारतीय छात्रों को बार्डर पार नहीं करने दिया गया। दो दिन तक केवल चॉकलेट और चिप्स खाकर गुजारा किया। इस दौरान तापमान माइनस पांच डिग्री था। वहां पोलैंड की सेना ने उनको मारा-पीटा भी। एंट्री नहीं मिली तो सभी छात्र दोबारा हॉस्टल लौट आए और हंगरी के रास्ते भारत पहुंचे। गढ़ के गांव नेकनामपुर फुल्ड़ी निवासी आसिफ पुत्र मुस्ताक भी खारकीव से जैसे-तैसे पोलेंड बार्डर पहुंचा। वह भी अभद्रता का शिकार हुआ।
माइनस पांच डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे बिताए 24 घंटे
घर पहुंचे गढ़ के सैफ अली ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर माइनस 5 डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे 24 घंटे बिताने पड़े। कड़ी मशक्कत के बाद बार्डर पार कर पाए।
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इस बॉर्डर से उस बॉर्डर भटक रहे छात्र, पैरों में पड़े छाले
अल्लाहबख्शपुर निवासी बिलाल अहमद खारकीव के पास एक आर्मी स्कूल में करीब सात सौ छात्रों के साथ पनाह लिए है। उसने बताया कि लगातार बमबारी हो रही है। हर पल दहशत में गुजर रहा है। इससे पहले छात्र एक बार्डर से दूसरे बार्डर हाथ में भारत का झंडा लेकर भटकते रहे। आसपास ब्लास्ट होने के बाद ग्रुप में भगदड़ मच जाती थी। ग्रुप में शामिल छात्राओं के पैरों में छाले पड़ चुके हैं और उनका बुरा हाल है। कई छात्राएं हिम्मत हार चुकी हैं। आने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। बिलाल अहमद अहमद के अलावा विकास चौहान पुत्र जयवीर सिंह निवासी सदरपुर बहदुरगढ़, अजीत सिंह पुत्र विनोद सिंह निवासी पलवाड़ा बहादुरगढ़ अभी यूक्रेन में फंसे हैं। जिले से करीब छह छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
शिवम को देख परिजनों की आंखें हुईं नम
धौलाना। शाहपुर फगौता निवासी दिनेश शर्मा का पुत्र शिवम शर्मा सकुशल घर पहुंचा तो परिजनों की आंखें नम हो गईं। शिवम ने बताया कि यूक्रेन में अभी भी कुछ भारतीय फंसे हुए है। वह 26 फरवरी से वहां से निकला था। 36 घंटे धक्का-मुक्की करने के बाद ही रोमानिया में दाखिल हो पाया था। बृहस्पतिवार रात भारत पहुंचा।
यूक्रेन में फंसे चार छात्र गढ़ लौटे, तीन अभी भी फंसे
गढ़मुक्तेश्वर। यूक्रेन और रूस के बीच हो रहे युद्ध के चलते भारतीय छात्रों ने घर वापसी शुरू कर दी है, जिसमें गढ़ क्षेत्र के सात छात्रों में से चार अपने घर सकुशल पहुंच चुके हैं। जबकि तीन छात्र अभी भी फंसे हुए हैं।
तहसीलदार विवेक भदौरिया ने बताया कि क्षेत्र के सात छात्र यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस कर रहे हैं, जिनमें से शुक्रवार तक चार छात्र अपने परिजनों के बीच सकुशल पहुंच गए हैं। तहसीलदार ने बताया कि जो बच्चे अभी भी फंसे हुए हैं उनके परिजन संपर्क में हैं। तहसीलदार ने बताया कि तीन दिन पहले गांव अठसैनी के अरबाज और नगर के तालिब अपने घर पहुंच गए थे। वहीं शुक्रवार को नगर के मोहल्ला जमीदारान हनूद निवासी सैफ पुत्र साजिद और सिंभावली क्षेत्र के पीरनगर निवासी अभिषेक पुत्र योगेंद्र मावी भी सकुशल घर पहुंच चुके हैं। इनके अलावा बिलाल अहमद पुत्र मुनफैद निवासी अल्लाबख्शपुर, विकास चौहान पुत्र जयवीर सिंह निवासी गांव सदरपुर बहादुरगढ़, अजीत सिंह पुत्र विनोद सिंह निवासी गांव पलवाड़ा बहादुरगढ़, ये तीनों भी जल्द ही आ जाएंगे।
गोली बारी के बीच होते हुए पहुंचे हंगरी बॉर्डर
पीरनगर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह एमबीबीएस का उनका पहली हा साल था। लेकिन माहौल खराब होने के कारण वहां से मजबूरी में लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि हंगरी बॉर्डर तक करीब 35 किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ा। इस दौरान भूखे-प्यासे भी रहना पड़ा।
वहीं गढ़ के सैफ अली ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर माइनस 5 डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे 24 घंटे गोलीबारी के बीच बिताए। कड़ी मशक्कत करते हुए बॉर्डर पार कर दिया, जिसके बाद हवाई जहाज के माध्यम से वह अपने भारत लौट आए, जो सुबह को दिल्ली पहुंचे। संवाद
निशांत को देखते ही परिजनों के खिले चेहरे
पिलखुवा। यूक्रेन के युद्धग्रस्त इलाके में फंसे पिलखुवा निवासी निशांत वर्मा शुक्रवार को सकुशल अपने घर पहुंच गया। निशांत के पहुंचते ही उसके परिजन, मित्र और रिश्तेदारों के चेहरे खिल उठे। घर पहुंचे निशांत ने सबसे पहले परिवार के साथ मंदिर में पूजा कर प्रसाद चढ़ाया।
पिलखुवा की वैष्णो कालोनी निवासी मोहनलाल वर्मा का इकलौता पुत्र निशांत वर्मा यूक्रेन के खारकीव स्थित मेडिकल विश्वविद्यालय में पंचम वर्ष का छात्र है। निशांत ने बताया कि गत 24 फरवरी को पहले धमाके के साथ वह अपने साथियों के साथ विश्वविद्यालय से बाहर निकलकर भूमिगत मेट्रो स्टेशन में पहुंच गया था। वहां पर 28 फरवरी तक रहे। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। फ्लैट पर सामान होने के कारण वह खाने के लिए रोजाना फ्लैट पर जाता था। उन्होंने बताया कि खारकीव से ट्रेन लेकर लिवी पहुंचे, वहां से बस द्वारा दो मार्च को पोलैंड बॉर्डर पहुंचा। पोंलैंड बॉर्डर से कुछ दूरी पर भारत की बस उन्हें लेकर होटल पहुंची। होटल में खाना खाने के बाद बस द्वारा तीन मार्च को एयरपोर्ट पहुंचे। तीन मार्च की सुबह सात बजे वह फ्लाइट में बैठ गया। फ्लाइट पहले तरकी होते हुए शुक्रवार सुबह सात बजे दिल्ली पहुंचा। निशांत के सकुशल पहुंचने पर मिलने वालों का घर पर तांता लगा रहा।
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हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। यूक्रेन में फंसे जिले के पांच और छात्रों की घर वापसी हो गई है। तमाम दुश्वारियां झेलते हुए पांचों यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पहले पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे थे। वहां दो दिनों तक बॉर्डर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान पोलैंड की आर्मी ने उनके साथ अभद्रता भी की। उन्हें लात-घूंसे भी मारे। इसके बाद हंगरी के रास्ते आए। अभी भी जिले के छह छात्र फंसे हुए हैं। सबसे चिंताजनक हालात खारकीव में फंसे छात्रों की है।
शुक्रवार को घर लौटा पीरनगर निवासी अभिषेक मावी अभी भी सहमा हुआ है। वह यूक्रेन के लेलिव शहर में फंसा था। युद्ध छिड़ने के बाद हास्टल के साथियों के साथ पोलैंड बार्डर पर जैसे-तैसे पहुंच गया। वहां भारतीय छात्रों को बार्डर पार नहीं करने दिया गया। दो दिन तक केवल चॉकलेट और चिप्स खाकर गुजारा किया। इस दौरान तापमान माइनस पांच डिग्री था। वहां पोलैंड की सेना ने उनको मारा-पीटा भी। एंट्री नहीं मिली तो सभी छात्र दोबारा हॉस्टल लौट आए और हंगरी के रास्ते भारत पहुंचे। गढ़ के गांव नेकनामपुर फुल्ड़ी निवासी आसिफ पुत्र मुस्ताक भी खारकीव से जैसे-तैसे पोलेंड बार्डर पहुंचा। वह भी अभद्रता का शिकार हुआ।
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माइनस पांच डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे बिताए 24 घंटे
घर पहुंचे गढ़ के सैफ अली ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर माइनस 5 डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे 24 घंटे बिताने पड़े। कड़ी मशक्कत के बाद बार्डर पार कर पाए।
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इस बॉर्डर से उस बॉर्डर भटक रहे छात्र, पैरों में पड़े छाले
अल्लाहबख्शपुर निवासी बिलाल अहमद खारकीव के पास एक आर्मी स्कूल में करीब सात सौ छात्रों के साथ पनाह लिए है। उसने बताया कि लगातार बमबारी हो रही है। हर पल दहशत में गुजर रहा है। इससे पहले छात्र एक बार्डर से दूसरे बार्डर हाथ में भारत का झंडा लेकर भटकते रहे। आसपास ब्लास्ट होने के बाद ग्रुप में भगदड़ मच जाती थी। ग्रुप में शामिल छात्राओं के पैरों में छाले पड़ चुके हैं और उनका बुरा हाल है। कई छात्राएं हिम्मत हार चुकी हैं। आने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। बिलाल अहमद अहमद के अलावा विकास चौहान पुत्र जयवीर सिंह निवासी सदरपुर बहदुरगढ़, अजीत सिंह पुत्र विनोद सिंह निवासी पलवाड़ा बहादुरगढ़ अभी यूक्रेन में फंसे हैं। जिले से करीब छह छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
शिवम को देख परिजनों की आंखें हुईं नम
धौलाना। शाहपुर फगौता निवासी दिनेश शर्मा का पुत्र शिवम शर्मा सकुशल घर पहुंचा तो परिजनों की आंखें नम हो गईं। शिवम ने बताया कि यूक्रेन में अभी भी कुछ भारतीय फंसे हुए है। वह 26 फरवरी से वहां से निकला था। 36 घंटे धक्का-मुक्की करने के बाद ही रोमानिया में दाखिल हो पाया था। बृहस्पतिवार रात भारत पहुंचा।
यूक्रेन में फंसे चार छात्र गढ़ लौटे, तीन अभी भी फंसे
गढ़मुक्तेश्वर। यूक्रेन और रूस के बीच हो रहे युद्ध के चलते भारतीय छात्रों ने घर वापसी शुरू कर दी है, जिसमें गढ़ क्षेत्र के सात छात्रों में से चार अपने घर सकुशल पहुंच चुके हैं। जबकि तीन छात्र अभी भी फंसे हुए हैं।
तहसीलदार विवेक भदौरिया ने बताया कि क्षेत्र के सात छात्र यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस कर रहे हैं, जिनमें से शुक्रवार तक चार छात्र अपने परिजनों के बीच सकुशल पहुंच गए हैं। तहसीलदार ने बताया कि जो बच्चे अभी भी फंसे हुए हैं उनके परिजन संपर्क में हैं। तहसीलदार ने बताया कि तीन दिन पहले गांव अठसैनी के अरबाज और नगर के तालिब अपने घर पहुंच गए थे। वहीं शुक्रवार को नगर के मोहल्ला जमीदारान हनूद निवासी सैफ पुत्र साजिद और सिंभावली क्षेत्र के पीरनगर निवासी अभिषेक पुत्र योगेंद्र मावी भी सकुशल घर पहुंच चुके हैं। इनके अलावा बिलाल अहमद पुत्र मुनफैद निवासी अल्लाबख्शपुर, विकास चौहान पुत्र जयवीर सिंह निवासी गांव सदरपुर बहादुरगढ़, अजीत सिंह पुत्र विनोद सिंह निवासी गांव पलवाड़ा बहादुरगढ़, ये तीनों भी जल्द ही आ जाएंगे।
गोली बारी के बीच होते हुए पहुंचे हंगरी बॉर्डर
पीरनगर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह एमबीबीएस का उनका पहली हा साल था। लेकिन माहौल खराब होने के कारण वहां से मजबूरी में लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि हंगरी बॉर्डर तक करीब 35 किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ा। इस दौरान भूखे-प्यासे भी रहना पड़ा।
वहीं गढ़ के सैफ अली ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर माइनस 5 डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे 24 घंटे गोलीबारी के बीच बिताए। कड़ी मशक्कत करते हुए बॉर्डर पार कर दिया, जिसके बाद हवाई जहाज के माध्यम से वह अपने भारत लौट आए, जो सुबह को दिल्ली पहुंचे। संवाद
निशांत को देखते ही परिजनों के खिले चेहरे
पिलखुवा। यूक्रेन के युद्धग्रस्त इलाके में फंसे पिलखुवा निवासी निशांत वर्मा शुक्रवार को सकुशल अपने घर पहुंच गया। निशांत के पहुंचते ही उसके परिजन, मित्र और रिश्तेदारों के चेहरे खिल उठे। घर पहुंचे निशांत ने सबसे पहले परिवार के साथ मंदिर में पूजा कर प्रसाद चढ़ाया।
पिलखुवा की वैष्णो कालोनी निवासी मोहनलाल वर्मा का इकलौता पुत्र निशांत वर्मा यूक्रेन के खारकीव स्थित मेडिकल विश्वविद्यालय में पंचम वर्ष का छात्र है। निशांत ने बताया कि गत 24 फरवरी को पहले धमाके के साथ वह अपने साथियों के साथ विश्वविद्यालय से बाहर निकलकर भूमिगत मेट्रो स्टेशन में पहुंच गया था। वहां पर 28 फरवरी तक रहे। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। फ्लैट पर सामान होने के कारण वह खाने के लिए रोजाना फ्लैट पर जाता था। उन्होंने बताया कि खारकीव से ट्रेन लेकर लिवी पहुंचे, वहां से बस द्वारा दो मार्च को पोलैंड बॉर्डर पहुंचा। पोंलैंड बॉर्डर से कुछ दूरी पर भारत की बस उन्हें लेकर होटल पहुंची। होटल में खाना खाने के बाद बस द्वारा तीन मार्च को एयरपोर्ट पहुंचे। तीन मार्च की सुबह सात बजे वह फ्लाइट में बैठ गया। फ्लाइट पहले तरकी होते हुए शुक्रवार सुबह सात बजे दिल्ली पहुंचा। निशांत के सकुशल पहुंचने पर मिलने वालों का घर पर तांता लगा रहा।

गढ़ नगर में परिजनों के बीच पहुंचा सैफ अली।- फोटो : GARH

यूक्रेन से लौटा निशांत वर्मा परिवार के साथ।- फोटो : PILAKHWA