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एंबुलेंस की वैधता खत्म, फिर भी निजी अस्पतालों से भर रहीं फर्राटा
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सड़क पर खड़ी खटारा एम्बुलेंस संवाद
- फोटो : HAPUR
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वैधता खत्म फिर भी निजी अस्पतालों से फर्राटा भर रहीं एंबुलेंस
हापुड़। परिवहन विभाग ने 61 में से 30 एंबुलेंस की वैधता खत्म कर दी है। इसके बावजूद इन वाहनों का संचालन अब निजी अस्पतालों के बाहर से किया जा रहा है। बिना ऑक्सीजन सिलिंडर, जीवन रक्षक दवाओं और अग्निशमन यंत्रों के ही इनका संचालन किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान भी संकट में है। वहीं, जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे हैं, एंबुलेंस की आड़ में ही सड़कों पर ऐसे वाहन जमकर फर्राटा भर रहे हैं।
जिले के अस्पताल सी श्रेणी में आते हैं, गंभीर मरीजों को उपचार के लिए बाहर के अस्पतालों में ही रेफर करना पड़ता है। इसकी जिम्मेदारी एंबुलेंस पर होती है, जिले में प्राइवेट अस्पतालों की संख्या 250 से अधिक हैं। इनमें हर रोज मरीज भर्ती होते हैं और रेफर भी किए जाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि परिवहन निगम के रिकॉर्ड के अनुसार पंजीकृत प्राइवेट एंबुलेंस की संख्या अब सिर्फ छह है।
जबकि, स्वर्ग आश्रम, गढ़ रोड के अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस का जमावड़ा देखा जा सकता है। रिकॉर्ड के अनुसार इन छह एंबुलेंस में दो की फिटनेस तक नहीं है, फिर भी फर्राटा भर रही हैं। खास बात यह है कि इन एंबुलेंस में टेक्नीशियन तक नहीं रहते, जरूरत पड़ने पर मरीजों की बीपी, ऑक्सीजन लेबल का पता भी नहीं चल पाता।
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गाड़ी रंगकर बना रहे एंबुलेंस
जिले में कई एंबुलेंस सामान्य गाड़ी ही हैं, जिन्हें रंग कर सिर्फ एंबुलेंस लिख दिया जा रहा है, साथ ही ऊपर लाइट और सायरन लगा दिया जाता है। इनके एंबुलेंस होने का कोई रिकॉर्ड परिवहन विभाग में नहीं होता।
एंबुलेंस के लिए तीन वर्ग में होते हैं मानक
वर्ग ए- चालक का नाम, कर्मचारी संख्या, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, पैरामेडिकल स्टाफ, शैक्षणिक योग्यता, लॉग बुक, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, पेशेंट केयर बुक होनी चाहिए।
वर्ग बी- एंबुलेंस नंबर, वार्मिंग लाइट, सायरन, अग्निशमन सिलिंडर, मास्क, स्ट्रेचर, सक्शन डिवाइस, बीपी मापक, आला, एयरबैग, ऑक्सीजन सिलिंडर, मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए जंबो बैग होना चाहिए।
वर्ग सी- रुई, सेवलॉन, बीटाडीन, मास्क, सर्जिकल ग्लव्स, डिस्पोजल सक्शन पंप, ड्रिप सेट, डीएनएस फ्लूड, ओआरएस, दवा इंजेक्शन समेत 19 तरह की दवाएं होनी चाहिए।
कोट
स्वास्थ्य विभाग की सभी गाड़ियों की है फिटनेस
स्वास्थ्य विभाग में 102 नंबर की 16 और 108 नंबर की 9 गाड़िया हैं, सभी की फिटनेस कराई गई है। मरीजों के लिए तमाम आवश्यक सेवाएं दी जा रही हैं। - डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ
अभियान चलाकर करेंगे कार्रवाई
जिले में वैधता खत्म होने के बावजूद गाड़ियों का संचालन बर्दाश्त नहीं होगा। अभियान चलाकर ऐसे एंबुलेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन
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हापुड़। परिवहन विभाग ने 61 में से 30 एंबुलेंस की वैधता खत्म कर दी है। इसके बावजूद इन वाहनों का संचालन अब निजी अस्पतालों के बाहर से किया जा रहा है। बिना ऑक्सीजन सिलिंडर, जीवन रक्षक दवाओं और अग्निशमन यंत्रों के ही इनका संचालन किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान भी संकट में है। वहीं, जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे हैं, एंबुलेंस की आड़ में ही सड़कों पर ऐसे वाहन जमकर फर्राटा भर रहे हैं।
जिले के अस्पताल सी श्रेणी में आते हैं, गंभीर मरीजों को उपचार के लिए बाहर के अस्पतालों में ही रेफर करना पड़ता है। इसकी जिम्मेदारी एंबुलेंस पर होती है, जिले में प्राइवेट अस्पतालों की संख्या 250 से अधिक हैं। इनमें हर रोज मरीज भर्ती होते हैं और रेफर भी किए जाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि परिवहन निगम के रिकॉर्ड के अनुसार पंजीकृत प्राइवेट एंबुलेंस की संख्या अब सिर्फ छह है।
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जबकि, स्वर्ग आश्रम, गढ़ रोड के अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस का जमावड़ा देखा जा सकता है। रिकॉर्ड के अनुसार इन छह एंबुलेंस में दो की फिटनेस तक नहीं है, फिर भी फर्राटा भर रही हैं। खास बात यह है कि इन एंबुलेंस में टेक्नीशियन तक नहीं रहते, जरूरत पड़ने पर मरीजों की बीपी, ऑक्सीजन लेबल का पता भी नहीं चल पाता।
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गाड़ी रंगकर बना रहे एंबुलेंस
जिले में कई एंबुलेंस सामान्य गाड़ी ही हैं, जिन्हें रंग कर सिर्फ एंबुलेंस लिख दिया जा रहा है, साथ ही ऊपर लाइट और सायरन लगा दिया जाता है। इनके एंबुलेंस होने का कोई रिकॉर्ड परिवहन विभाग में नहीं होता।
एंबुलेंस के लिए तीन वर्ग में होते हैं मानक
वर्ग ए- चालक का नाम, कर्मचारी संख्या, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, पैरामेडिकल स्टाफ, शैक्षणिक योग्यता, लॉग बुक, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, पेशेंट केयर बुक होनी चाहिए।
वर्ग बी- एंबुलेंस नंबर, वार्मिंग लाइट, सायरन, अग्निशमन सिलिंडर, मास्क, स्ट्रेचर, सक्शन डिवाइस, बीपी मापक, आला, एयरबैग, ऑक्सीजन सिलिंडर, मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए जंबो बैग होना चाहिए।
वर्ग सी- रुई, सेवलॉन, बीटाडीन, मास्क, सर्जिकल ग्लव्स, डिस्पोजल सक्शन पंप, ड्रिप सेट, डीएनएस फ्लूड, ओआरएस, दवा इंजेक्शन समेत 19 तरह की दवाएं होनी चाहिए।
कोट
स्वास्थ्य विभाग की सभी गाड़ियों की है फिटनेस
स्वास्थ्य विभाग में 102 नंबर की 16 और 108 नंबर की 9 गाड़िया हैं, सभी की फिटनेस कराई गई है। मरीजों के लिए तमाम आवश्यक सेवाएं दी जा रही हैं। - डॉ. रेखा शर्मा, सीएमओ
अभियान चलाकर करेंगे कार्रवाई
जिले में वैधता खत्म होने के बावजूद गाड़ियों का संचालन बर्दाश्त नहीं होगा। अभियान चलाकर ऐसे एंबुलेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन

सड़क पर खड़ी एम्बुलेंस संवाद- फोटो : HAPUR

सड़क पर खड़ी खटारा एम्बुलेंस संवाद- फोटो : HAPUR

एम्बुलेंस में नही लगा आग बुझाने वाला सिलेंडर संवाद- फोटो : HAPUR

सड़क पर खड़ी खटारा एम्बुलेंस संवाद- फोटो : HAPUR

बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के खड़ी एम्बुलेंस संवाद- फोटो : HAPUR