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बच्चों में कोरोना संक्रमण के साथ डायरिया और निमोनिया का हमला
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बच्चों में कोरोना संक्रमण के साथ डायरिया और निमोनिया का हमला
हापुड़। मौसम में उतार चढ़ाव से बच्चे डायरिया, निमोनिया के तो शिकार हो ही रहे हैं वहीं कोरोना संक्रमण की चपेट में भी आ रहे हैं। इन दिनों अस्पतालों को ओपोडी में बीमार बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। वहीं अस्पताल में भर्ती होने वालों में पांच प्रतिशत कोरोना से भी संक्रमित मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार घर के बड़ों से ही बच्चों में संक्रमण फैलने की पुष्टि हुई है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश गोयल ने बताया कि डायरिया बच्चों के लिए काफी घातक साबित हो रहा है। ओपीडी में आने वाले 40 प्रतिशत बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं, जिनमें पांच प्रतिशत को भर्ती करने की भी जरूरत पड़ रही है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी बच्चों की जान पर खतरा बन रही है।
इसके अलावा निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या भी अचानक बढ़ी है। पसलियां चलने से बच्चों का बुरा हाल हो रहा है। बीमारी की शुरूआत में ही अगर उपचार मिल जाए तो बीमारी ठीक हो जाती है लेकिन देरी होने से बच्चा काफी मुश्किल से ठीक हो पाता है।
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बच्चों में बढ़ रहा संक्रमण
अस्पताल में भर्ती होने वाले पांच प्रतिशत बच्चों में कोरोना संक्रमण भी मिल रहा है। जिन बच्चों को खांसी, जुकाम की समस्या है, उनके अभिभावकों से बच्चों की कोविड जांच कराने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि कोरोना के नए स्वरूप से पीड़ित सभी लोगों में हल्के लक्षण आ रहे हैं। हालांकि बच्चों में कोरोना संक्रमण ज्यादा घातक साबित नहीं हो रहा, बच्चे आराम से ठीक हो रहे हैं।
पोस्ट कोविड करता है परेशान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सचिन बंसल के अनुसार कोरोना की तीन लहरों में संक्रमण के दौरान बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन बाद में पोस्ट कोविड बच्चों को अधिक परेशान करता है। दूसरी लहर के बाद इस समस्या से पीड़ित बच्चों में तेज बुखार, बेहोशी की समस्या बनी थी। ऐसे में बच्चों का बचाव कर रखें।
बच्चों में इस तरह के आ रहे लक्षण
* छोटे बच्चों का चिड़चिड़ा होना।
* बार बार रोना, दस्त लगना।
* शरीर पर चकत्ते बनना, बुखार का होना।
* बच्चे को नजला, खांसी के साथ सांस में परेशानी होना।
इन बातों का रखें ध्यान
* मौसम के उतार चढ़ाव में बच्चे को सर्दी न लगनें दें।
* संतुलित खान पान जारी रखें।
* दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें।
* घर के बड़े सदस्यों को यदि खांसी, जुकाम है तो बच्चों को दूर रखें।
* बच्चे के बीमार पड़ने पर कुशल चिकित्सकों को दिखाएं और समय से उपचार शुरू कराएं, घरेलू उपचार नुकसान दायक हो सकता है।
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हापुड़। मौसम में उतार चढ़ाव से बच्चे डायरिया, निमोनिया के तो शिकार हो ही रहे हैं वहीं कोरोना संक्रमण की चपेट में भी आ रहे हैं। इन दिनों अस्पतालों को ओपोडी में बीमार बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। वहीं अस्पताल में भर्ती होने वालों में पांच प्रतिशत कोरोना से भी संक्रमित मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार घर के बड़ों से ही बच्चों में संक्रमण फैलने की पुष्टि हुई है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश गोयल ने बताया कि डायरिया बच्चों के लिए काफी घातक साबित हो रहा है। ओपीडी में आने वाले 40 प्रतिशत बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं, जिनमें पांच प्रतिशत को भर्ती करने की भी जरूरत पड़ रही है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी बच्चों की जान पर खतरा बन रही है।
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इसके अलावा निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या भी अचानक बढ़ी है। पसलियां चलने से बच्चों का बुरा हाल हो रहा है। बीमारी की शुरूआत में ही अगर उपचार मिल जाए तो बीमारी ठीक हो जाती है लेकिन देरी होने से बच्चा काफी मुश्किल से ठीक हो पाता है।
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बच्चों में बढ़ रहा संक्रमण
अस्पताल में भर्ती होने वाले पांच प्रतिशत बच्चों में कोरोना संक्रमण भी मिल रहा है। जिन बच्चों को खांसी, जुकाम की समस्या है, उनके अभिभावकों से बच्चों की कोविड जांच कराने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि कोरोना के नए स्वरूप से पीड़ित सभी लोगों में हल्के लक्षण आ रहे हैं। हालांकि बच्चों में कोरोना संक्रमण ज्यादा घातक साबित नहीं हो रहा, बच्चे आराम से ठीक हो रहे हैं।
पोस्ट कोविड करता है परेशान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सचिन बंसल के अनुसार कोरोना की तीन लहरों में संक्रमण के दौरान बच्चों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन बाद में पोस्ट कोविड बच्चों को अधिक परेशान करता है। दूसरी लहर के बाद इस समस्या से पीड़ित बच्चों में तेज बुखार, बेहोशी की समस्या बनी थी। ऐसे में बच्चों का बचाव कर रखें।
बच्चों में इस तरह के आ रहे लक्षण
* छोटे बच्चों का चिड़चिड़ा होना।
* बार बार रोना, दस्त लगना।
* शरीर पर चकत्ते बनना, बुखार का होना।
* बच्चे को नजला, खांसी के साथ सांस में परेशानी होना।
इन बातों का रखें ध्यान
* मौसम के उतार चढ़ाव में बच्चे को सर्दी न लगनें दें।
* संतुलित खान पान जारी रखें।
* दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें।
* घर के बड़े सदस्यों को यदि खांसी, जुकाम है तो बच्चों को दूर रखें।
* बच्चे के बीमार पड़ने पर कुशल चिकित्सकों को दिखाएं और समय से उपचार शुरू कराएं, घरेलू उपचार नुकसान दायक हो सकता है।