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बड़े उलटफेर करती रही है हापुड़ विधानसभा सीट
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बड़े उलटफेर करती रही है हापुड़ विधानसभा सीट
हापुड़। विधानसभा चुनाव में जिले की सदर सीट कभी भी किसी पार्टी या प्रत्याशी की पारंपरिक सीट नहीं रही। यह सीट बड़े उलट फेर के लिए जानी जाती है। कई बार के विधायक भी इस सीट पर हार गए और नए प्रत्याशियों ने परचम लहर दिया।
हापुड़ की सदर सीट पर इस बार तीन लाख 65 हजार 384 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिनमें एक लाख 96 हजार 589 पुरुष और एक लाख 68 हजार 771 मतदाता महिलाएं हैं। इस सीट पर वर्ष 2017 में कांग्रेस के गजराज सिंह को भाजपा के विजयपाल आढ़ती ने हराया था। इस सीट की यही खासियत है कि इस पर बड़े उलटफेर होते रहे हैं। यहां से चार बार जीत हासिल करने वाले गजराज सिंह को भी पांच बार हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि कांग्रेस के प्रत्याशी की इस सीट पर सबसे अधिक सात बार जीत हुई है। लेकिन दूसरे दल भी पीछे नहीं हैं। भाजपा ने तीन बार और बसपा ने दो बार जीत हासिल की है।
दलित और मुस्लिम मत इस सीट पर निर्णायक की भूमिका में रहे हैं और इन मतों का बिखराव ही किसी दल के हार जीत का कारण बना है। यहां की जनता का मिजाज भी एक सा नहीं रहा। अलग अलग चुनाव में मुद्दों और लहर के हिसाब से प्रत्याशियों को समर्थन मिला। इस बार के चुनाव में भाजपा से विजयपाल आढ़ती और रालोद सपा गठबंधन से घोषित प्रत्याशी गजराज सिंह पिछले चुनाव में भी आमने सामने थे। बसपा के मनीष सिंह भी नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव लड़ चुके हैं। तीनों ही प्रत्याशियों का अपना अपना जनाधार है।
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कांग्रेस की लहर के बाद निर्दलीय ने मारी थी बाजी
आजादी के बाद 1952 में हुए पहले चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के लुफ्त अली खान ने एक तरफा जीत हासिल की थी। जबकि वर्ष 1957 में लुफ्त अली खान ने करीब 3800 वोटों से जीत हासिल की थी। लेकिन इसके बाद 1962 में प्रेम सुंदर नारायण सिंह निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद चुनाव जीते थे। वर्ष 1967 में हापुड़ विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई थी, तभी से यह सुरक्षित चली आ रही है। इस चुनाव में रिपब्लिक पार्टी आफ इंडिया के डीडी सेन को लोगों ने विधायक चुना था। यह उस समय का पहला उलटफेर था। इसके बाद कांग्रेस के गजराज सिंह के अलावा भूप सिंह केन और लुफ्त अली खान ही दूसरी बार विधायक बने हैं।
हापुड़ सीट से ये रहे विजेता
वर्ष विधायक पार्टी
2017 विजयपाल भाजपा
2012 गजराज सिंह कांग्रेस
2007 धर्मपाल सिंह बसपा
2002 धर्मपाल सिंह बसपा
1996 जय प्रकाश भाजपा
1993 गजराज सिंह कांग्रेस
1991 बिजेंद्र कुमार भाजपा
1989 गजराज सिंह कांग्रेस
1985 गजराज सिंह कांग्रेस
1980 भूप सिंह केन इंक (क)
1977 बनारसी दास जेएनपी
1974 भूप सिंह केन कांग्रेस
1969 लक्ष्मण स्वरूप भाक्रांद
1967 डीडी सैन रिपब्लिक पार्टी आफ इंडिया
1962 प्रेम सुंदर निर्दलीय
1957 लुफ्त अली खान कांग्रेस
1952 लुफ्त अली खान कांग्रेस
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हापुड़। विधानसभा चुनाव में जिले की सदर सीट कभी भी किसी पार्टी या प्रत्याशी की पारंपरिक सीट नहीं रही। यह सीट बड़े उलट फेर के लिए जानी जाती है। कई बार के विधायक भी इस सीट पर हार गए और नए प्रत्याशियों ने परचम लहर दिया।
हापुड़ की सदर सीट पर इस बार तीन लाख 65 हजार 384 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिनमें एक लाख 96 हजार 589 पुरुष और एक लाख 68 हजार 771 मतदाता महिलाएं हैं। इस सीट पर वर्ष 2017 में कांग्रेस के गजराज सिंह को भाजपा के विजयपाल आढ़ती ने हराया था। इस सीट की यही खासियत है कि इस पर बड़े उलटफेर होते रहे हैं। यहां से चार बार जीत हासिल करने वाले गजराज सिंह को भी पांच बार हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि कांग्रेस के प्रत्याशी की इस सीट पर सबसे अधिक सात बार जीत हुई है। लेकिन दूसरे दल भी पीछे नहीं हैं। भाजपा ने तीन बार और बसपा ने दो बार जीत हासिल की है।
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दलित और मुस्लिम मत इस सीट पर निर्णायक की भूमिका में रहे हैं और इन मतों का बिखराव ही किसी दल के हार जीत का कारण बना है। यहां की जनता का मिजाज भी एक सा नहीं रहा। अलग अलग चुनाव में मुद्दों और लहर के हिसाब से प्रत्याशियों को समर्थन मिला। इस बार के चुनाव में भाजपा से विजयपाल आढ़ती और रालोद सपा गठबंधन से घोषित प्रत्याशी गजराज सिंह पिछले चुनाव में भी आमने सामने थे। बसपा के मनीष सिंह भी नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव लड़ चुके हैं। तीनों ही प्रत्याशियों का अपना अपना जनाधार है।
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कांग्रेस की लहर के बाद निर्दलीय ने मारी थी बाजी
आजादी के बाद 1952 में हुए पहले चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के लुफ्त अली खान ने एक तरफा जीत हासिल की थी। जबकि वर्ष 1957 में लुफ्त अली खान ने करीब 3800 वोटों से जीत हासिल की थी। लेकिन इसके बाद 1962 में प्रेम सुंदर नारायण सिंह निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद चुनाव जीते थे। वर्ष 1967 में हापुड़ विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई थी, तभी से यह सुरक्षित चली आ रही है। इस चुनाव में रिपब्लिक पार्टी आफ इंडिया के डीडी सेन को लोगों ने विधायक चुना था। यह उस समय का पहला उलटफेर था। इसके बाद कांग्रेस के गजराज सिंह के अलावा भूप सिंह केन और लुफ्त अली खान ही दूसरी बार विधायक बने हैं।
हापुड़ सीट से ये रहे विजेता
वर्ष विधायक पार्टी
2017 विजयपाल भाजपा
2012 गजराज सिंह कांग्रेस
2007 धर्मपाल सिंह बसपा
2002 धर्मपाल सिंह बसपा
1996 जय प्रकाश भाजपा
1993 गजराज सिंह कांग्रेस
1991 बिजेंद्र कुमार भाजपा
1989 गजराज सिंह कांग्रेस
1985 गजराज सिंह कांग्रेस
1980 भूप सिंह केन इंक (क)
1977 बनारसी दास जेएनपी
1974 भूप सिंह केन कांग्रेस
1969 लक्ष्मण स्वरूप भाक्रांद
1967 डीडी सैन रिपब्लिक पार्टी आफ इंडिया
1962 प्रेम सुंदर निर्दलीय
1957 लुफ्त अली खान कांग्रेस
1952 लुफ्त अली खान कांग्रेस