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प्राधिकरण के खिलाफ किसान ने दोबारा खोला मोर्चा
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किसान ने प्राधिकरण के खिलाफ दोबारा खोला मोर्चा
हापुड़। चमरी गांव निवासी किसान नूतन प्रकाश त्यागी की समस्या का हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण के आश्वासन के बाद भी समाधान नहीं हुआ है। किसान का अधिग्रहित भूमि का विवाद चल रहा है। नाराज किसान ने 14 दिसबंर तक समस्या का समाधान नहीं होने पर 15 दिसंबर से प्राधिकरण के परिसर में धरना देने और 21 दिसंबर को प्रदेश से पलायन करने की चेतावनी दी है।
किसान नूतन प्रकाश ने बताया कि उसकी आनंद विहार में भूमि है। हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण ने उनकी भूमि का 2008 में अधिग्रहण किया था। जिसकी उन्होंने कोई मुआवजा नहीं लिया, न ही कोई समझौता हुआ है। प्राधिकरण, डीएम और एडीएम समेत मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। किसान ने बताया कि एचपीडीए के गठन से पहले भूमि पर दुकानें बनी थी। अब एचपीडीए के अधिकारी 1900 रुपये प्रति मीटर मुआवजा देकर भूमि देने का दबाव बना रहे हैं। कुछ माह पहले भी किसान ने वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग को लेकर धरना दिया था और अधिकारियों के आश्वासन के बाद खत्म कर दिया था, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
कोट
मामले की जानकारी नहीं है। किसान की जो भी शिकायतें हैं, उनका वार्ता के साथ समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। - प्रदीप कुमार, एचपीडीए सचिव
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हापुड़। चमरी गांव निवासी किसान नूतन प्रकाश त्यागी की समस्या का हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण के आश्वासन के बाद भी समाधान नहीं हुआ है। किसान का अधिग्रहित भूमि का विवाद चल रहा है। नाराज किसान ने 14 दिसबंर तक समस्या का समाधान नहीं होने पर 15 दिसंबर से प्राधिकरण के परिसर में धरना देने और 21 दिसंबर को प्रदेश से पलायन करने की चेतावनी दी है।
किसान नूतन प्रकाश ने बताया कि उसकी आनंद विहार में भूमि है। हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण ने उनकी भूमि का 2008 में अधिग्रहण किया था। जिसकी उन्होंने कोई मुआवजा नहीं लिया, न ही कोई समझौता हुआ है। प्राधिकरण, डीएम और एडीएम समेत मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। किसान ने बताया कि एचपीडीए के गठन से पहले भूमि पर दुकानें बनी थी। अब एचपीडीए के अधिकारी 1900 रुपये प्रति मीटर मुआवजा देकर भूमि देने का दबाव बना रहे हैं। कुछ माह पहले भी किसान ने वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग को लेकर धरना दिया था और अधिकारियों के आश्वासन के बाद खत्म कर दिया था, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
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मामले की जानकारी नहीं है। किसान की जो भी शिकायतें हैं, उनका वार्ता के साथ समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। - प्रदीप कुमार, एचपीडीए सचिव