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250 लोगों पर ब्लैक फंगस का साया, इन्हें दिया था स्टेरॉयड
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250 लोगों पर ब्लैक फंगस का साया, इन्हें दिया था स्टेरॉयड
हापुड़। जिले में कोरोना से बेहद मुश्किल से उबरे करीब 250 लोग ब्लैक फंगस के साये में हैं। इनकी जान बचाने को स्टेरॉयड, रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए गए। कई मरीज अनेकों दिन वेंटिलेटर, ऑक्सीजन पर रहे। इनमें सबसे ज्यादा फंगल इंफेक्शन का खतरा है। ऐसे मरीजों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमेटी गठित की है। साथ ही जिला अस्पताल में बने ओपीडी वार्ड में भी इस तरह के रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं।
जिले में कोरोना महामारी के बाद ब्लैक फंगस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक सात मरीजों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि हापुड़ के कई अन्य मरीज निजी अस्पतालों में भी उपचार पा रहे हैं। हापुड़ में यह रोग विशेष ऐसे मरीजों में देखा जा रहा है, जो कोरोना से हाल ही में उबरे हैं और डायबिटिज व अन्य समस्या से परेशान हैं।
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में हापुड़ जिले के करीब सात हजार मरीज संक्रमण की चपेट में आए। इनमें 500 से ज्यादा की हालत इतनी बिगड़ी की चिकित्सकों को उनकी जान बचाने के लिए हर उच्च क्षमता की दवा देनी पड़ी। इसका नतीजा यह रहा कि इनमें बहुत से मरीज घर तो लौटे, लेकिन उनकी प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गई। अनेकों मरीजों के ब्लड में शुगर की मात्रा काफी बढ़ गई। विशेषज्ञों की मानें तो अधिक समय तक ऑक्सीजन पर रहने वाले मरीजों पर भी फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक है। हापुड़ जिले में ऐसे करीब 250 मरीजों का चयन किया गया है। सीएमओ ने इन मरीजों की निगरानी के लिए एक स्पेशल टीम गठित की है, जो रोजाना इन मरीजों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी ले रही है।
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-जिला अस्पताल में पहुंच रहे रोजाना दस से अधिक मरीज
दस्तोई रोड पर बने जिला अस्पताल में इन दिनों रोजाना करीब दस से अधिक ऐसे मरीज ब्लैक फंगस की जांच को पहुंच रहे हैं, जो हाल ही में कोरोना से उबरे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ परमेंद्र वर्मा ने बताया कि अब तक अस्पताल में जांच को आया एक मरीज संक्रमित मिला है, बाकी मरीज स्वस्थ हैं।
तीन लोग गवां चुके हैं जान
ब्लैक फंगस के जिले में अब तक सात मरीज मिले हैं, जिनमें तीन की मौत हो चुकी है। बाकी चार की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जिनका उपचार मेरठ और नोएडा में चल रहा है।
शुगर को रखें नियमित
ब्लड में शुगर की मात्रा को यदि नियमित रख पाए तो काफी हद तक ब्लैक फंगस से निजात मिल जाएगी। इस तरह के रोगियों पर फंगल इंफेक्शन का अधिक खतरा है। चिकित्सकों का कहना है कि यह इंफेक्शन एक से दूसरे मरीज में नहीं फैलता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को जल्द शिकंजे में लेता है।
कोट्स
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाना प्राथमिकता है। कोरोना से उबरे मरीजों की मॉनेटरिंग करायी जा रही है। जिला अस्पताल में ओपीडी भी शुरू करा दी गई है।
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हापुड़। जिले में कोरोना से बेहद मुश्किल से उबरे करीब 250 लोग ब्लैक फंगस के साये में हैं। इनकी जान बचाने को स्टेरॉयड, रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए गए। कई मरीज अनेकों दिन वेंटिलेटर, ऑक्सीजन पर रहे। इनमें सबसे ज्यादा फंगल इंफेक्शन का खतरा है। ऐसे मरीजों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमेटी गठित की है। साथ ही जिला अस्पताल में बने ओपीडी वार्ड में भी इस तरह के रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं।
जिले में कोरोना महामारी के बाद ब्लैक फंगस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक सात मरीजों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि हापुड़ के कई अन्य मरीज निजी अस्पतालों में भी उपचार पा रहे हैं। हापुड़ में यह रोग विशेष ऐसे मरीजों में देखा जा रहा है, जो कोरोना से हाल ही में उबरे हैं और डायबिटिज व अन्य समस्या से परेशान हैं।
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बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में हापुड़ जिले के करीब सात हजार मरीज संक्रमण की चपेट में आए। इनमें 500 से ज्यादा की हालत इतनी बिगड़ी की चिकित्सकों को उनकी जान बचाने के लिए हर उच्च क्षमता की दवा देनी पड़ी। इसका नतीजा यह रहा कि इनमें बहुत से मरीज घर तो लौटे, लेकिन उनकी प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गई। अनेकों मरीजों के ब्लड में शुगर की मात्रा काफी बढ़ गई। विशेषज्ञों की मानें तो अधिक समय तक ऑक्सीजन पर रहने वाले मरीजों पर भी फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक है। हापुड़ जिले में ऐसे करीब 250 मरीजों का चयन किया गया है। सीएमओ ने इन मरीजों की निगरानी के लिए एक स्पेशल टीम गठित की है, जो रोजाना इन मरीजों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी ले रही है।
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-जिला अस्पताल में पहुंच रहे रोजाना दस से अधिक मरीज
दस्तोई रोड पर बने जिला अस्पताल में इन दिनों रोजाना करीब दस से अधिक ऐसे मरीज ब्लैक फंगस की जांच को पहुंच रहे हैं, जो हाल ही में कोरोना से उबरे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ परमेंद्र वर्मा ने बताया कि अब तक अस्पताल में जांच को आया एक मरीज संक्रमित मिला है, बाकी मरीज स्वस्थ हैं।
तीन लोग गवां चुके हैं जान
ब्लैक फंगस के जिले में अब तक सात मरीज मिले हैं, जिनमें तीन की मौत हो चुकी है। बाकी चार की हालत भी गंभीर बनी हुई है। जिनका उपचार मेरठ और नोएडा में चल रहा है।
शुगर को रखें नियमित
ब्लड में शुगर की मात्रा को यदि नियमित रख पाए तो काफी हद तक ब्लैक फंगस से निजात मिल जाएगी। इस तरह के रोगियों पर फंगल इंफेक्शन का अधिक खतरा है। चिकित्सकों का कहना है कि यह इंफेक्शन एक से दूसरे मरीज में नहीं फैलता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को जल्द शिकंजे में लेता है।
कोट्स
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाना प्राथमिकता है। कोरोना से उबरे मरीजों की मॉनेटरिंग करायी जा रही है। जिला अस्पताल में ओपीडी भी शुरू करा दी गई है।