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रेमडेसिविर की कमी नहीं, ब्लैक फंगस का इंजेक्शन मिल नहीं रहा
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रेमडेसिविर की कमी नहीं, ब्लैक फंगस का इंजेक्शन मिल नहीं रहा
हापुड़। कोरोना संक्रमण के चरम के दौरान 20 अप्रैल से सात मई के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की जबरदस्त किल्लत रही। अब जबकि ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं तो इसके उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन बी नहीं मिल रहा है। ब्लैक फंगस का इंजेक्शन मिलने की प्रक्रिया भी जटिल है और इसके लिए मंडलायुक्त की मंजूरी जरूरी है।
कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के बाद रेमडेसिविर की डिमांड एकाएक बढ़ गई थी। इस दौरा इस इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले भी सामने आए। सरकार की सख्ती के बाद रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई भी हुई। अब संक्रमितों की संख्या कम होने से रेमडेसिविर की डिमांड में करीब 90 फीसदी गिरावट आई है। इन दिनों 10-15 मरीजों को ही इस इंजेक्शन की प्रतिदिन जरूरत पड़ रही है, जो पहले 140 तक पहुंच गई थी। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके पास 1500 इंजेक्शन का स्टॉक मौजूद है।
उधर इन दिनों ब्लैक फंगस का प्रकोप बढ़ रहा है। जिले में पांच मरीज ब्लैक फंगस के मिल चुके हैं। इस बीमारी से रोकथाम के लिए आवश्यक एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन जिले में उपलब्ध ही नहीं है। इन मरीजों को मेरठ रेफर किया गया है। मेरठ मंडलायुक्त की मंजूरी पर ही इंजेक्शन अस्पताल को मिलता है।
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एक तिहाई रह गई ऑक्सीजन की डिमांड
कोरोना की दूसरी लहर में पीक के दौरान ऑक्सीजन के लिए भी मारामारी मची थी। तब अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन 10-12 (मीट्रिक टन)एमटी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी, इसके अलावा दूसरे जिलों से भी सिलिंडरों में ऑक्सीजन मंगाई जा रही थी। अब संक्रमण की रफ्तार घटने के साथ ही अस्पतालों में बेड भी खाली होने लगे हैं। इसके चलते ऑक्सीजन की मांग काफी कम रह गई है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इन दिनों करीब 400 एमटी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, जबकि उपलब्धता करीब 15 एमटी की है। हापुड़ के सरस्वती और रामा मेडिकल में ऑक्सीजन प्लांट लगा हैं, इसके साथ ही जिले में पांच स्थानों पर प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है।
ऐसे घटती गई रेमडेसिविर की डिमांड
तिथि जरूरत
7 मई 140
13 मई 126
19 मई 40
21 मई 25
28 मई 15
ऑक्सीजन की मांग भी हुई कम
तिथि मांग
8 मई 1200एमटी
11 मई 1150 एमटी
18 मई 910 एमटी
24 मई 600 एमटी
28 मई 400 एमटी
-----
संक्रमण घटा तो कम हुई डिमांड
संक्रमण की दर घटने के साथ ही रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की डिमांड कम हुई है। ब्लैक फंगस के मरीजों का उपचार मेरठ में ही चल रहा है, वहीं से उनके लिए अस्पतालों को इंजेक्शन भी मिल रहे हैं।
डॉ रेखा शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
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हापुड़। कोरोना संक्रमण के चरम के दौरान 20 अप्रैल से सात मई के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की जबरदस्त किल्लत रही। अब जबकि ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं तो इसके उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन बी नहीं मिल रहा है। ब्लैक फंगस का इंजेक्शन मिलने की प्रक्रिया भी जटिल है और इसके लिए मंडलायुक्त की मंजूरी जरूरी है।
कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के बाद रेमडेसिविर की डिमांड एकाएक बढ़ गई थी। इस दौरा इस इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले भी सामने आए। सरकार की सख्ती के बाद रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई भी हुई। अब संक्रमितों की संख्या कम होने से रेमडेसिविर की डिमांड में करीब 90 फीसदी गिरावट आई है। इन दिनों 10-15 मरीजों को ही इस इंजेक्शन की प्रतिदिन जरूरत पड़ रही है, जो पहले 140 तक पहुंच गई थी। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके पास 1500 इंजेक्शन का स्टॉक मौजूद है।
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उधर इन दिनों ब्लैक फंगस का प्रकोप बढ़ रहा है। जिले में पांच मरीज ब्लैक फंगस के मिल चुके हैं। इस बीमारी से रोकथाम के लिए आवश्यक एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन जिले में उपलब्ध ही नहीं है। इन मरीजों को मेरठ रेफर किया गया है। मेरठ मंडलायुक्त की मंजूरी पर ही इंजेक्शन अस्पताल को मिलता है।
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एक तिहाई रह गई ऑक्सीजन की डिमांड
कोरोना की दूसरी लहर में पीक के दौरान ऑक्सीजन के लिए भी मारामारी मची थी। तब अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन 10-12 (मीट्रिक टन)एमटी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी, इसके अलावा दूसरे जिलों से भी सिलिंडरों में ऑक्सीजन मंगाई जा रही थी। अब संक्रमण की रफ्तार घटने के साथ ही अस्पतालों में बेड भी खाली होने लगे हैं। इसके चलते ऑक्सीजन की मांग काफी कम रह गई है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इन दिनों करीब 400 एमटी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, जबकि उपलब्धता करीब 15 एमटी की है। हापुड़ के सरस्वती और रामा मेडिकल में ऑक्सीजन प्लांट लगा हैं, इसके साथ ही जिले में पांच स्थानों पर प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है।
ऐसे घटती गई रेमडेसिविर की डिमांड
तिथि जरूरत
7 मई 140
13 मई 126
19 मई 40
21 मई 25
28 मई 15
ऑक्सीजन की मांग भी हुई कम
तिथि मांग
8 मई 1200एमटी
11 मई 1150 एमटी
18 मई 910 एमटी
24 मई 600 एमटी
28 मई 400 एमटी
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संक्रमण घटा तो कम हुई डिमांड
संक्रमण की दर घटने के साथ ही रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की डिमांड कम हुई है। ब्लैक फंगस के मरीजों का उपचार मेरठ में ही चल रहा है, वहीं से उनके लिए अस्पतालों को इंजेक्शन भी मिल रहे हैं।
डॉ रेखा शर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी